बहुत हो गयी गंभीर बातें और उनपर गंभीरतम विमर्श...आज कुछ हल्की -फुलकी पोस्ट लिखने का मन है....फेसबुक पर ये वाकया शेयर किया पर मेरे जैसे ढेर सारा लिखने वालों को फेसबुक वाल पर लिखकर संतुष्टि नहीं मिलती . कितनी ही बातें मन में उमड़ती-घुमड़ती ही रह जाती हैं...और इसके लिए अपना ब्लॉग तो है ही...:)
हाल ही में दूसरी बार ऐसा मजेदार संयोग हुआ. कुछ साल पहले..लैंड लाइन पर एक फोन आया था.
"रश्मि है?".. एक पुरुष स्वर
"हाँ..कहिए ?"..मेरा प्रत्युत्तर
"रश्मि से बात करनी है.."
"हाँ, बोल रही हूँ..."
"मुझे रश्मि..रश्मिकांत से बात करनी है...मैं उसका फ्रेंड बोल रहा हूँ.." एक अटकता हुआ स्वर.
"सॉरी रॉंग नंबर .."
आज एक अनजान नंबर से कॉल था..
"हाँ..कहिए ?"..मेरा प्रत्युत्तर
"रश्मि से बात करनी है.."
"हाँ, बोल रही हूँ..."
"मुझे रश्मि..रश्मिकांत से बात करनी है...मैं उसका फ्रेंड बोल रहा हूँ.." एक अटकता हुआ स्वर.
"सॉरी रॉंग नंबर .."
आज एक अनजान नंबर से कॉल था..
"हू इज दिस "..मैने पूछा.
"सीमा .हियर.."
सीमा नाम की दो फ्रेंड और एक रिलेटिव हैं..लगा नए नंबर से फोन कर रही होंगी या फिर मुझसे उनमे से किसी का नंबर गुम हो गया होगा...इसलिए आवाज में अतिरिक्त ख़ुशी छलका कर पूछा . "ओह..सीमा...क्या हाल हैं..कैसी हो??"
"बढ़िया.. तू बता .."
"बस सब ठीक है... चल रहा है..."
"सुना तूने जी.डी.एस. ज्वाइन कर लिया ." चहक भरी आवाज सुन मेरा माथा ठनका.आवाज जानी-पहचानी तो पहले भी नहीं लग रही थी..पर लगा शायद बारिश की वजह से आवाज क्लियर नहीं सुनाई दे रही...उस तरफ भी यही मुगालता हुआ होगा.
"किस से बात करनी है...?
"रश्मि से..रश्मि बोल रही हो ना.."
हाँ..पर आप कहाँ से बोल रही हैं..?."
"बैंगलोर से "
"सॉरी बैंगलोर में तो मेरी सीमा नाम की कोई फ्रेंड नहीं है..मेरा नंबर आपको कहाँ से मिला.."
"पता नहीं मेरे सेल में रश्मि नाम से सेव्ड है...आप नेहा की फ्रेंड हो..??" ..वो भी आप पर आ गयी थी.
"नेहा नाम की मेरी दो फ्रेंड तो है..अब पता नहीं..किस नेहा की बात कर रही हैं.."
"नेहा...नेहा मंत्री.."
"ना सॉरी मैं किसी नेहा मंत्री को नहीं जानती.."
"सॉरी.. .."
जबकि मैंने किसी सोशल वेबसाईट पर अपना नंबर नहीं डाला है..सबसे शेयर भी नहीं करती..फिर भी ऐसे संयोग..:):)
"सीमा .हियर.."
सीमा नाम की दो फ्रेंड और एक रिलेटिव हैं..लगा नए नंबर से फोन कर रही होंगी या फिर मुझसे उनमे से किसी का नंबर गुम हो गया होगा...इसलिए आवाज में अतिरिक्त ख़ुशी छलका कर पूछा . "ओह..सीमा...क्या हाल हैं..कैसी हो??"
"बढ़िया.. तू बता .."
"बस सब ठीक है... चल रहा है..."
"सुना तूने जी.डी.एस. ज्वाइन कर लिया ." चहक भरी आवाज सुन मेरा माथा ठनका.आवाज जानी-पहचानी तो पहले भी नहीं लग रही थी..पर लगा शायद बारिश की वजह से आवाज क्लियर नहीं सुनाई दे रही...उस तरफ भी यही मुगालता हुआ होगा.
"किस से बात करनी है...?
"रश्मि से..रश्मि बोल रही हो ना.."
हाँ..पर आप कहाँ से बोल रही हैं..?."
"बैंगलोर से "
"सॉरी बैंगलोर में तो मेरी सीमा नाम की कोई फ्रेंड नहीं है..मेरा नंबर आपको कहाँ से मिला.."
"पता नहीं मेरे सेल में रश्मि नाम से सेव्ड है...आप नेहा की फ्रेंड हो..??" ..वो भी आप पर आ गयी थी.
"नेहा नाम की मेरी दो फ्रेंड तो है..अब पता नहीं..किस नेहा की बात कर रही हैं.."
"नेहा...नेहा मंत्री.."
"ना सॉरी मैं किसी नेहा मंत्री को नहीं जानती.."
"सॉरी.. .."
जबकि मैंने किसी सोशल वेबसाईट पर अपना नंबर नहीं डाला है..सबसे शेयर भी नहीं करती..फिर भी ऐसे संयोग..:):)
जब फेसबुक पर ये लिखा तो रंजना सिंह जी का कमेन्ट आया
घबराई आवाज़ :- संजय भैया हैं..?
संजय(मेरा भाई)- जी , बोल रहा हूँ..
- भैया (अमुक स्थान पर)जल्दी आ जाइये, अंकल का एक्सीडेंट हो गया है, हम उन्हें लेकर
संजय(मेरा भाई)- जी , बोल रहा हूँ..
- भैया (अमुक स्थान पर)जल्दी आ जाइये, अंकल का एक्सीडेंट हो गया है, हम उन्हें लेकर
हॉस्पिटल जा रहे हैं..
(गनीमत कि पिताजी बगल वाली कुर्सी में बैठ चाय पी रहे थे..वर्ना...)
(गनीमत कि पिताजी बगल वाली कुर्सी में बैठ चाय पी रहे थे..वर्ना...)
इन वाकयों ने एक रॉंग नंबर का किस्सा याद दिला दिया..मेरी मौसी के पहचान वाले हैं. उनकी बेटी की शादी तय हुई. एंगेजमेंट हो गया...लड़की के पास मोबाइल फोन नहीं था ..लड़के ने बातें करने को उसे मोबाइल फोन गिफ्ट किया. बातें होने लगीं..इसी बीच उस मोबाइल पर किसी लड़के का रॉंग नंबर आया. उस रॉंग नंबर से इतनी बातें होने लगीं की बातों की परिणति प्रेम में हुई..और फिर घर से भाग कर शादी करने में .
वैसे अनूप जलोटा का भी यही किस्सा है...सोनाली राठौर से अफेयर था..पर परिवार के दबाव में कहीं और शादी के लिए हाँ कर दी थी. शादी का निमंत्रण पत्र देने किसी म्यूजिक डायरेक्टर के पास गए, वहाँ सोनाली मिल गयीं...सोनाली ने आँखों में आँसू भर कर पूछा.."मेरा क्या कसूर था?" और अनूप जलोटा ने निमंत्रण पत्र फाड़ दिए और उसी वक्त मंदिर में जाकर उनसे शादी कर ली...ये अलग बात है कि दोनों की आपस में ज्यादा दिन निभी नहीं..और सोनाली आज रूपकुमार सिंह राठौर की पत्नी हैं..और अनूप जलोटा की पत्नी मेधा जलोटा हैं...जिनकी पहली शादी शेखर कपूर से हुई थी .
वो बिचारा लड़का..अब लड़कों शादी से पहले कोई गिफ्ट दो..अपनी मंगेतर को मोबाइल फोन कभी मत देना..:)
अब इसके पहले कि लोग शुरू हो जाएँ "ये आजकल की लडकियाँ"...कि कुछ वाकये और याद आ गए.
करीब पच्चीस साल पहले की बात है. पिताजी की पोस्टिंग एक छोटे से शहर में हुई थी. वे लोग हमारे पड़ोसी थे. एक उच्च पदस्थ लड़के से बेटी की शादी तय की. लड़के वालों ने कहा...'लड़की की नाक थोड़ी फैली हुई है..उसकी प्लास्टिक सर्जरी करवा दीजिये. लड़की के माता-पिता ने मुंबई लाकर बेटी की नाक की प्लास्टिक सर्जरी करवा दी.' महल्ले वालों को यह बात अजीब सी लगी थी...लड़कियों में तो बहुत नाराजगी थी कि आखिर लड़का क्या बिलकुल परफेक्ट होगा.उसमे भी तो कोई कमी होगी .पर यह उन लोगों का अपना निर्णय था.
तय दिन बारात आई. लड़के के सबसे छोटे भाई ने बारात में माइक पर गाने गाए...खूब डांस भी किया. जयमाला की रस्म हो गयी. सबलोग खाने-पीने में लग गए. लड़के के साथ बाराती जनवासे में चले गए. अब शादी की रस्मे शुरू होने का समय हो रहा था पर लड़का जनवासे से शादी के लिए मंडप में आ ही नहीं रहा था. उसने कह दिया..'उसे लड़की पसंद नहीं है' उसके घर वाले भी उसे समझा रहे थे. लड़की के चाचा-पिता अपनी पगड़ी उतार कर उसके पैरों में रख रहे थे (हमने ऐसा सुना था ) .पर लड़का नहीं मान रहा था. लड़के के घर वालों से बातचीत चल ही रही थी...कि इन सब हंगामों के बीच पता चला...बारात में आई हुई एक लड़की के साथ दूल्हा भाग गया. उन दोनों का पहले से अफेयर था. स्टेशन..बस स्टैंड सब जगह लोग ढूंढ कर वापस आ गए..वे दोनों नहीं मिले..आखिर सुबह चार बजे के करीब लड़के वालों के कुछ रिश्तेदार लड़के के सबसे छोटे भाई.जो इंजीनियरिंग का छात्र था और लड़की से उम्र में छोटा था. उसे लेकर आए और आग्रह किया कि इस लड़के से अपनी लड़की की शादी कर दीजिये. लड़के के मंझले भाई की शादी भी तय हो चुकी थी और एक हफ्ते बाद उसकी शादी थी. और दोनों भाइयों का रिसेप्शन एक साथ ही देने की योजना थी. यह छोटा भाई..पत्ते की तरह काँप रहा था..बार बार पानी पी रहा था. पर अपने बड़े भाई की करतूत की सजा अपने सर ले ली थी. सिंदूरदान और फेरे जैसे बस कुछ महत्वपूर्ण रस्म हुए और लड़की विदा हो कर ससुराल भी चली गयी...और जब एक हफ्ते बाद मायके आई...तो दूल्हा-दुल्हन दोनों ही खुश नज़र आ रहे थे.
इस घटना के आस-पास का ही एक और वाकया है...
मोनी, नीता की सहेली थी..दोनों साथ पढ़ती थीं. पर स्वभाव में बहुत अलग. मोनी को पढ़ाई-लिखाई से कोई मतलब नहीं था. सिर्फ फैशन ..सारा दिन केवल अपने कपड़ों अपने बालों की देखभाल. उन दिनों भी पार्लर में डेढ़ सौ रुपये में वो अपने बाल सेट करवाती थी. नीता का एक चचेरा भाई अमन था. बारहवीं पास था और एक प्रायवेट कॉलेज में दो सौ रुपये की तनख्वाह पर क्लर्क था पर गाँव में जमीन जायदाद बहुत थी. अमन, मोनी के घर के बाजार के..सारे काम करता. अक्सर मोनी के साथ मार्केट...फिल्म देखने भी जाता. पूरे मोहल्ले को यह बात पता थी पर पता नहीं मोनी की माँ कभी अमन को अपने यहाँ आने से मना नहीं करती...बल्कि साथ में फिल्म जाने की इजाज़त भी वहीँ देतीं थीं. नीता को उनकी दोस्ती बिलकुल पसंद नहीं थी. पर वो कुछ नहीं कर सकती थी. वो इतनी भोली थी..एक दिन उसने ये सारा किस्सा मुझे बताया और ये भी बताया कि पहले मोनी, अमन को भैया कहा करती थी ,राखी भी बांधती थी..और एक बार राखी बांधते हुए फोटो भी खिंचवाई थी. नीता ने वो फोटो फ्रेम करवा कर अपने घर में शोकेस में सबसे आगे सजा दी है कि शायद उसे देख-देख कर दोनों को कुछ अपराध बोध हो.
कुछ ही दिनों बाद मेरे पिताजी का ट्रांसफर हो गया और हम वहाँ से चले आए. नीता के पत्र मेरे पास आते रहे. और एक पत्र में उसने बताया कि अमन की शादी तय हो गयी थी, शादी की रस्मे शुरू हो गयी थीं हल्दी लग चुकी थी और बारात वाली सुबह वो मोनी के साथ भाग गया. अमन के छोटे भाई अजय को लेकर बारात घर से निकली और जिस लड़की की शादी अमन से तय हुई थी..उसकी शादी अजय से कर दी गयी. मुझे तो बस यही चिंता थी कि जो लड़का दो सौ रुपये कमाता है...और जो लड़की डेढ़ सौ रुपये में अपने बाल सेट करवाती है..उनकी कैसे निभेगी?
पर उसके बाद मैं भी अपनी पढाई-लिखाई में व्यस्त हो गयी...नीता का पता भी गुम हो गया..उस से कोई संपर्क नहीं रहा. आज भी कभी-कभी सोचती हूँ...कैसे निभी होगी,उन दोनों की ??
खैर , इतने दिनों में इतना बदलाव तो आया ही होगा...मुझे अब नहीं लगता..शादी टूटने की स्थिति में छोटे भाई या बहन से शादी कर दी जाती होगी. क्यूंकि इसके बाद ऐसा कोई किस्सा नहीं सुना. जबकि करीब दो साल पहले पटना में एक लड़की से मिली. उसकी एंगेजमेंट हो गयी थी. लड़का मुंबई का था. वो मुंबई के बारे में कई बातें पूछ रही थी..खुश थी कि उसके जानने वालों में से एक मैं मुंबई में हूँ. लड़का उन दिनों छः महीने के लिए लंदन गया हुआ था. उसके लौटते ही शादी हो जानी थी. पर फिर पता चला...लड़के के माता-पिता सगाई की अंगूठी लौटा गए. लड़के का किसी से अफेयर था..उसने उसी लड़की से शादी कर ली.
वैसे अनूप जलोटा का भी यही किस्सा है...सोनाली राठौर से अफेयर था..पर परिवार के दबाव में कहीं और शादी के लिए हाँ कर दी थी. शादी का निमंत्रण पत्र देने किसी म्यूजिक डायरेक्टर के पास गए, वहाँ सोनाली मिल गयीं...सोनाली ने आँखों में आँसू भर कर पूछा.."मेरा क्या कसूर था?" और अनूप जलोटा ने निमंत्रण पत्र फाड़ दिए और उसी वक्त मंदिर में जाकर उनसे शादी कर ली...ये अलग बात है कि दोनों की आपस में ज्यादा दिन निभी नहीं..और सोनाली आज रूपकुमार सिंह राठौर की पत्नी हैं..और अनूप जलोटा की पत्नी मेधा जलोटा हैं...जिनकी पहली शादी शेखर कपूर से हुई थी .
पर एक बात समझ में नहीं आ पाती. ये प्रेमी -प्रेमिका....किसी और से शादी के लिए 'हाँ' क्यूँ करते हैं...और 'हाँ' करते हैं तो फिर ऐन समय पर धोखा क्यूँ देते हैं..दूसरे के आत्म-सम्मान को चोट क्यूँ पहुंचाते हैं??....अपने परिवार की इतनी फजीहत क्यूँ करवाते हैं. ??
















.jpg)