आप लोगों ने सब्जी काटना.. फल काटना सुना होगा और काटे भी होंगे. पर कभी किसी को किशमिश काटते सुना है ??.हमने भी नहीं सुना था, जबतक 'तंगम ' से दोस्ती नहीं हुई थी. क्रिसमस के समय 'तंगम' को बहुत सारे केक के ऑर्डर मिलते हैं और 'तंगम' केक में बाकी मेवों के साथ किशमिश भी काट कर ही डालती है तो हम सब सहेलियाँ एक महीने पहले से बारी-बारी से उसके घर जाकर मेवे काटने में उसकी मदद करते हैं. उसके पतिदेव हम सबको उकसाते रहते हैं कि तंगम से हम इन मेवों को काटने का मेहनताना लिया करें. पर तंगम तो हमारी मेहनत का मोल चुका देगी...लेकिन सालो भर जो इतने प्यार से हमें केक-पेस्ट्री-बिस्किट्स खिलाती है...उस प्यार का मोल हम कहाँ से चुकायेंगे?? बल्कि यही वजह है कि इतना वॉक और योगा करने के बाद भी 'वेइंग स्केल' की सूई टस से मस नहीं होती :):)
मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और मैने उस से विस्तार से पूछा कि उसने कब और कैसे केक बनाना शुरू किया??...और यह सब जानने के बाद से ही मेरी इच्छा थी कि ब्लॉग पर शेयर करूँ...कि उम्र के किसी भी मोड पर नई शुरुआत की जा सकती है और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुंचा जा सकता है. तंगम जब कॉलेज में थी तो उसकी तमन्ना एयरहोस्टेस बनने की भी थी...उसने क्वालिफाई भी कर लिया था ..पर परिवार से इज़ाज़त नहीं मिली . फिर उसने सोचा कि वो एक बुटिक कम पार्लर खोलेगी..जहां महिलाएँ...शॉपिंग भी कर सकेंगी और अपने सौन्दर्य की देखभाल भी .पर २२ साल की कच्ची सी उम्र में उसकी शादी हो गयी और वो चेन्नई से मुंबई आ गयी. नया शहर... नई भाषा {आज भी तंगम हिंदी में सिर्फ सब्जी वालों से ही बात करती है और इतने धीमे से प्यार से पूछती है.."भैया, ये कैसे दिया.?.' कि सब्जी वाला सुनता ही नहीं...फिर हमें जोर से पूछकर उसकी सहायता करनी पड़ती है :):)}. साल के छः से आठ महीने उसके पति 'शिप' पर रहते हैं .(वे मर्चेंट नेवी में हैं ). ज्यादातर समय अकेले ही अपने बेटे और बेटी की देखभाल करती .पर उसे अपना सपना याद था और उसने ब्यूटीशियन का कोर्स किया . ब्यूटी पार्लर खोलने के लिए सारे जरूरी उपकरण ख़रीदे और घर में ही पार्लर खोल लिया. पर बच्चे छोटे थे .उनको माँ का पूरा अटेंशन चाहिए था. जब वो किसी क्लाइंट को अटेंड कर रही होती उसी वक़्त पांच वर्षीय बेटा चीखना शुरू कर देता. कुछ ही दिनों में उसे बच्चों का ख्याल कर पार्लर बंद कर देना पड़ा.
वो बच्चों की देखभाल में पूरी तरह संलग्न थी. उन्ही दिनों उसकी एक सहेली ने अपने बेटे के बर्थडे पार्टी पर मदद करने के लिए अपने घर बुलाया . उसकी सहेली ने खुद ही केक बनाया था और उसकी आइसिंग कर रही थी. उसकी सहेली के बच्चे भी बड़े उत्साहित थे और केक को सजाने में अपनी माँ की मदद कर रहे थे. तंगम बहुत प्रभावित हुई और सोचा वो कोशिश करे तो इस से भी अच्छा केक बना सकती है. कुछ ही दिनों बाद , उसके माता-पिता के शादी की 'पचासवीं वर्ष्गांठ' थी. वर्षगाँठ वाले दिन तंगम के घर पर ही कुछ रिश्तेदारों की छोटी सी पार्टी थी . दस दिनों के बाद होटल में बड़ी पार्टी थी. जिसमे देश और विदेश से उसके काफी रिश्तेदार आने वाले थे. घर वाली पार्टी में तंगम ने खुद ही केक बनाने की सोची. पर उस समय उसके पास अवन भी नहीं था. उसने बाजार से स्पंज केक ख़रीदा और आइसिंग का सारा सामान भी खरीद कर लाई. देर रात तक जागकर केक को सजाया. उसके पति भी पूरे उत्साह से उसका साथ देते रहे. सारे रिश्तेदारों ने केक की बहुत तारीफ़ की .और दूसरे ही दिन पति के साथ जाकर वह अवन खरीद लाई. (अवन से सम्बंधित एक रोचक वाकया है...मैं जब पहली बार 'तंगम' के घर गयी तो सबसे पहले उसका अवन देखने की इच्छा जाहिर की...मुझे लगता था इतने बढ़िया प्रोफेशनल तरीके से केक बनाने का अवन भी कुछ अलग सा होता होगा, पर हैरानी हुई ये देख उसके पास भी वही अवन था जो मेरे पास था.....और आम घरों में होता है...यानि कि बढ़िया केक बनाने का हुनर उसके हाथों में था..अवन में नहीं )
अब तंगम का ट्रायल एंड एरर शुरू हुआ. उसके साथ एक मजेदार बात और हुई थी. जब एंगेजमेंट के बाद उसके होने वाले पति ने फोन कर के पूछा.."तुम्हारे लिए क्या उपहार लाऊं?"
तंगम को कुछ समझ नहीं आया. उसने किसी के घर पर चमकीले चिकने कागज़ वाली केक के सुन्दर तस्वीरों से सजी विदेशी रेसिपी बुक देखी थी. और उसी की फरमाइश कर डाली. पतिदेव ने भी बड़ी मेहनत से छांटकर केक बनाने के सरल तरीकों वाली किताब खरीदी और उसे भेंट की. इतने दिनों तक वो किताब बक्से के निचली तह में रखी हुई थी. अब तंगम ने उस किताब को निकाला ...और उसमे से पढ़ पढ़ कर केक बनाना शुरू किया.
उस बड़ी पार्टी में भी इस बार तंगम ने खुद ही केक भी बनाया और उसको डेकोरेट भी किया. सबको केक का स्वाद और सज्जा बहुत पसंद आई. दस दिनों बाद ही उसके एक रिश्तेदार की बेटी की शादी थी. कैथोलिक लोगों में केक का बहुत महत्व होता है. उसकी रिश्तेदार ने लंदन से कलर और सजाने का समान मँगा कर एक प्रोफेशनल बेकर को दिए थे. पर उस शादी में सबकी जुबान पर कुछ ही दिनों पहले तंगम के बनाये केक की चर्चा ज्यादा थी और सबका कहना था कि तंगम के बनाए केक का स्वाद और सज्जा दोनों इस प्रोफेशनल बेकर के केक से ज्यादा बढ़िया था. इसके बाद से ही किसी भी अवसर पर रिश्तेदार...दोस्त ..पड़ोसियों के लिए केक तंगम ही बनाती. उसने कई किताबें खरीदीं...इंटरनेट से भी हमेशा नई नई चीज़ें सीखने की कोशिश करती रही. करीब चार साल के बाद...लोग उसपर ऑर्डर से केक बनाने के लिए जोर डालने लगे और तंगम ने केक बनाने का ऑर्डर लेना शुरू कर दिया.
अब वो इतनी सिद्धहस्त हो गयी है कि उसे जो भी तस्वीर दिखाओ..वो वैसा ही केक बना देती है. किसी की बेटी को सैंडल पसंद है तो सैंडल की आकृति...किसी सहेली को पर्स पसंद है तो..पर्स की आकृति...किसी भी चीज़ की आइसिंग बनाने में वो सक्षम है...और डेकोरेशन के उपयोग में लाई सारी चीज़ें खाई जा सकती हैं.
फेसबुक पर उसने केक की बहुत सारी तस्वीरें अपलोड कर रखी हैं.(यहाँ देखी जा सकती हैं ) उन्हें ही देख कर हैदराबाद से एक महिला ने अपनी बेटी की शादी में केक बनाने के लिए उसे निमंत्रित किया. आने जाने का प्लेन का टिकट और एक अच्छे होटल में उसके ठहरने की व्यवस्था भी की. अगर तंगम फ्री ना हो तो लोग अपनी पार्टी का डेट आगे बढ़ा देते हैं.
तंगम को कई बेकरी से उनके लिए केक बनाने का ऑफर मिला है.पर वो अपनी मर्जी से और अपनी सुविधा और अपनी शर्तों पर काम करना चाहती है इसलिए उनका ऑफर स्वीकार नहीं करती.
तंगम के विषय में कुछ और बातें बहुत ही उल्लेखनीय हैं. जब उसके बच्चे छोटे थे तो वो अपना विशेष ख्याल नहीं रख पाती थी और उसका वजन बढ़ गया था. एक बार रास्ते में किसी ने उसे टोक दिया.."वो पहचान में नहीं आ रही है' और उसने ठान लिया उसे अपना वजन कम करना है.पर उसने ना तो जिम ज्वाइन किया ना ही..डायटिंग की. सिर्फ अपने खाने-पीने का ख्याल रखा और वॉक किया करती. तीन साल में उसने अपना वजन पंद्रह किलो घटा लिया. अब दस साल हो गए हैं और आज भी उसका वजन उतना ही है. अगर वो खुद नहीं बताये तो कोई नहीं जान सकता वो कभी ओवरवेट भी थी.यही अगर डायटिंग और जिम जाकर वजन घटाया जाए तो पुनः वापस वजन बढ़ते देर नहीं लगती. आज तंगम को देख कर कोई नहीं कह सकता कि उसका तेइस साल का एक बेटा है. इसमें उसके खुशमिजाज स्वभाव का भी हाथ है.
तंगम के सारे भाई-बहन..अमेरिका..कनाडा.. ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं. लिहाजा उसकी माँ तंगम के पास ही रहती हैं. पति भी शिप पर रहते हैं .बेटे ने भी मर्चेंट नेवी ही ज्वाइन कर लिया है. अकेली ही तंगम अपनी 'बुजुर्ग माँ' की देखभाल करती है .डॉक्टर, ब्लड टेस्ट..हॉस्पिटल का चक्कर चलता ही रहता है,अकेले ही सब संभालती है और वो कहती है...बहन-भाई ने अपने पास ले जाने की कोशिश की पर अब माँ का वहाँ कैसे मन लगेगा...इसलिए माँ तो मेरे पास ही रहेंगी
तंगम जैसी महिलाएँ कोई शिकायत नहीं करती...कैसी भी परिस्थिति सामने हो..उसे अपने अनुकूल बनाने की कोशिश करती हैं..और उसी में अपनी राह तलाश कर शिखर तक पहुँचने का प्रयास करती हैं. ऐसी महिलाएँ ही समाज में परिवर्तन लाने की काबिलियत रखती हैं . उन्हें अपने अधिकार का भी पता होता है और वे अपने कर्तव्य निभाने से भी नहीं चूकतीं.
तंगम के कलात्मक केक के कुछ और नमूने











