Thursday, February 18, 2021

प्रवासी पक्षी : खंजन

 


जानि सरद रितु खंजन आए।

पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।’’

पंछियों की दुनिया में रूचि लेने से पहले ही इस 'खंजन' पक्षी से परिचित थी. माँ को रामायण की बहुत सारी चौपाइयां कंठस्थ हैं और गाँव में कभी इस पक्षी को दिखाकर उन्होंने ये चौपाई कही थी. हमारे गाँव में इसे खिर्लीच कहा जाता है. तभी से इस पक्षी की पहचान हो गई थी .पर कभी गहराई से नहीं सोचा था कि ऐसा क्यूँ कहते हैं कि खंजन को देख कर समझ जाना चाहिए कि शरद ऋतु आने वाली है.

सहस्त्रों वर्षों से ये पंछी हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय कर सर्दियों में बर्फीले प्रदेशों से हमारे यहाँ आते हैं. और गर्मी आते ही अपने देश लौट जाते हैं. गर्मियों में ही ये अपने देश में प्रजनन और बच्चों की देखभाल करते हैं. उन प्रदेशों में यह पंछी गौरैया की तरह ही आम है पर हमें इनके दर्शन शरद ऋतु में ही होते हैं. इनकी पूंछ हमेशा हिलती रहती है इसीलिए अंग्रेजी में इसे wagtail कहते हैं. ये अलग अलग रंगों के होते हैं. सफेद-सलेटी-पीला .मैंने सफेद वाला खंजन ही देखा था. पहली बार पीले रंग के गले और वक्ष वाला खंजन देखा.
नवंबर-दिसम्बर से ही अन्य प्रदेशों के पक्षी-प्रेमी खंजन की तस्वीर लगाने लगे थे. पर मुंबई में मुझे ये पंछी नजर नहीं आ रहे थे .अब तो सर्दी उतार पर है.मैंने आशा ही छोड़ दी थी कि आज सुबह दूर से एक छोटा सा पंछी नजर आया जिसकी पूंछ लगातार हिल रही थी . मैं समझ गई, आज मेरा लकी डे है 🙂. नई जगह पर कुछ कुछ भूला सा, देर तक चुपचाप बैठा यह इधर उधर देख रहा था 💛💛 .
इस पंछी से सम्बन्धित एक जिज्ञासा और थी . आँखों की सुन्दरता की उपमा खंजन नयन से दी जाती है .तुलसीदास ने भी सीता जी के आँखों की तुलना खंजन से की है.
सूरदास ने कृष्ण जी के रूप का बखान करते हुए कहा


खंजन नैन रूप रस माते।
अतिसय चारू चपल अनियारे, पल पिंजरा न समाते।
लेकिन खंजन पक्षी की आँखें बहुत खास नहीं होतीं।ज्यादातर पक्षियों की तरह ही सामान्य सी होती हैं
शायद खंजन पक्षी के आकार की तुलना आँखों से की गई है. अगर दो खंजन पास पास हों तो दो सुंदर नयनों से लगेंगे.



























Sunday, January 17, 2021

दोस्ती की भावना से भरा पंछी 'मैगपाई रॉबिन ' Magpie Robin

 सफेद और काले रंग का ये सुंदर सा पंछी ' मैगपाई रॉबिन ' बहुत खूबसूरत लगता है. यह बहुत जल्दी दोस्ती कर लेता है .दोस्ती यानी आप पर भरोसा कर लेता है कि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. सुबह मेरे कमरे की खिड़की खुलने से पहले यह आवाजें लगाता है.और शाम को खिड़की बंद होने पर भी मानो डांटता है कि इतनी जल्दी क्यों बंद कर लिया. :)  कई बार खिड़की से कूदकर घर के अंदर भी आ जाता है. अगर मैं बहुत देर तक खिड़की के पास ना जाऊं तो अपनी सुरीली आवाज़ में इतनी टेर लगाता है कि सागर कह उठती है, 'भाभी  जाओ ,अपना चेहरा दिखा कर आ जाओ "उसे भी झिड़कती है, 'रुक आ रहीं हैं :) '

 अगर मैं खिड़की पर खड़ी हूँ और रॉबिन  सामने वाले पेड़ की डाल पर बैठा हो तो उड़ कर खिड़की पर आ कर बैठ जायेगा . उड़ते हुए उसके काले-सफेद पंख इतने सुंदर लगते हैं कि मैं मुग्ध हो देखती रह जाती हूँ, वीडियो लेना भूल जाती हूँ.मेरे बच्चे भी  मुझे देखकर, हर बार इस तरह दौड़ कर नहीं आयें होंगे. अगर मैं खिड़की पर हाथ टिका कर बैठूं तो बिलकुल कुहनी के पास बैठ जाएगा, ज़रा भी नहीं डरता 😊

नर-रॉबिन के सर-चोंच-वक्ष और पंख चमकते हुए काले रंग के होते हैं. पेट सफेद होता है और पंख पर सफेद धारियां होती हैं जो बहुत सुंदर लगती हैं. मादा-रॉबिन के सर-चोंच-वक्ष और पंख धूसर रंग के होते हैं.नर की तरह ही पेट सफेद और पंख पर सफेद धारियां होती हैं. मादा-रॉबिन बहुत शांत दिखती है. एक ही जगह पर देर तक बैठी रहती है. इनसे  ही शिकायत  है, नर और मादा कभी साथ साथ बैठे नहीं दिखते .इनकी ऐसी एक भी तस्वीर नहीं ले पाई हूँ. वैसे भी बुलबुल-तोता-गौरया=मैना-कबूतर की तरह ये झुण्ड में नहीं रहते. कभी कभी ही दो रॉबिन साथ में दिखते हैं.

रॉबिन की इन आदतों के विषय में अपूर्व को बता रही थी तो उसने बताया, “डबलिन में भी रॉबिन बहुत दिखते हैं . (रॉबिन की अलग किस्म ).ग्रैंडपा (मकान-मालिक) इनकी एक स्टोरी सुनाते हैं “ . मुझे वो कहानी सुनने की इच्छा थी पर हमेशा ह्मारी बात किसी और तरफ मुड जाती. एक रोज मैंने कहा, “पहले रॉबिन की कहानी सुनाओ, फिर आगे दूसरी बात होगी “

“हाँ सुनाता हूँ...ग्रैंडपा बताते हैं, अगर लॉन में अकेले टहल रहे हो तो रॉबिन पास में आ जाएगा .पार्क में भी अकेले देख,उडकर पास आ जाता है , बहुत फ्रेंडली होता है “

“कहानी तो सुनाओ...”
“यही कहानी थी...”

ये कहानी थी या इन्सटाग्राम स्टोरी :) ....मुझे लगा था रॉबिन से जुड़ा कोई किस्सा होगा. :D














 

प्रवासी पक्षी : खंजन

  जानि सरद रितु खंजन आए। पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।’’ पंछियों की दुनिया में रूचि लेने से पहले ही इस 'खंजन' पक्षी से परिचित थी. माँ ...