पिछले महीने अपने ब्लोगर मित्रों से काफी जल्दी-जल्दी मिलना हो गया. पहले अभिषेक ओझा...अमेरिका से मुंबई तशरीफ़ लाए...
आभा मिश्रा जी के यहाँ , अभिषेक ओझा ...युनुस खान, ममता सिंह...प्रमोद सिंह...अनिल रघुराज...इकट्ठे हुए थे. अभिषेक, बिलकुल अच्छे बच्चे बन कर अपने घर जा रहे थे....बालों की स्टाइल बिलकुल शरीफ लडको वाली थी. मैने तस्वीरों में उनके बालों के पीछे की टेल देख चुकी थी...और पूछ ही बैठी,"चोटी गायब??" उन्होंने हंस कर सर हिला दिया. सबलोग उनसे पूछ रहे थे.."अमेरिका से वापस आने का इरादा है या नहीं?" उन्होंने ईमानदारी से बता दिया, " इरादा तो है..पर पक्का कुछ नहीं कह सकता....क्यूंकि कई मित्रों को देखता हूँ...वे तय कर लेते हैं...छः महीने बाद वापस लौट आऊंगा..पर वे छः महीने दो साल में बदल जाते हैं "
अभिषेक ने ये भी जिक्र किया...कि 'मुंबई में उन्होंने करीब आठ महीने बाद एक फ्रेंड के टिफिन में घर की बनी चपाती खाई'
वहाँ बोधिसत्व जी और प्रमोद जी में समाज में कवि की भूमिका को लेकर सार्थक बहस छिड़ गयी. अनिल रघुराज जी और आभा बोधिसत्व जी ने भी इस विषय पर खुलकर अपने विचार रखे. बोधिसत्व जी ने निराला...पन्त..महादेवी से सम्बंधित कई बातों की चर्चा की..कि कैसे निराला जब बीमार हुए तो उनके इलाज के लिए नेहरु जी महादेवी वर्मा के माध्यम से पैसे भिजवाते थे क्यूंकि निराला जैसे स्वाभिमानी कवि को को किसी तरह की मदद लेना गवारा नहीं था.
ऐसी बहस का तो कोई अंत नहीं होता किन्तु अभिषेक को जल्दी निकलना था क्यूंकि उन्हें कहीं लेक्चर देने जाना था. मैने कह ही दिया ,"आप तो इतने छीटे दिखते हैं...लोग,आपकी बात सुनते भी है?" अब सुनते ही होंगे ना...वरना इनवाईट क्यूँ करते :)
युनुस जी...ममता जी ने विविध भारती के अपने अनुभव से और बोधिसत्व जी ने फिल्मो से जुड़ी कई रोचक बातें बताईं ...अफ़सोस भी किया कि अब सागर सरहदी और साहिर लुधियानवी जैसे लोग नहीं हैं जो स्क्रिप्ट का या गाने का एक शब्द भी बदलने को तैयार नहीं होते थे बल्कि कहते थे....आप लेखक/गीतकार बदल लीजिये.
बातों के साथ चाय का दौर चलता रहा....बोधिसत्व जी की बनाई स्पेशल चाय.:)
फोटो आभा जी के ब्लॉग के सौजन्य से मैं उस दिन कैमरा ले जाना ही भूल गयी
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| बोधिसत्व जी एवं अभिषेक ओझा |
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| मैं, आभा जी एवं ममता सिंह जी |
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| आभा जी,मैं,अभिषेक एवं ममता जी |
इसके कुछ ही दिनों बाद....विमोचन समारोह था जिसका जिक्र मैं यहाँ कर चुकी हूँ.
उस दिन विमोचन समारोह में सबसे मुलकात तो हुई..पर इत्मीनान से बैठकर बात नहीं हो पायी थी. और दूसरे दिन ही शरद जी को वापस लौट जाना था. बहुत ही जल्दबाजी में कुछ लोगो को ही सूचना दे पायी उसमे भी ममता सिंह जी और अनीता कुमार जी नहीं आ पायीं. घुघूती बासुती जी...शरद जी..युनुस जी...आभा जी...बोधिसत्व जी और सतीश पंचम जी ही आ पाए.
संयोग से शरद जी के भाई का घर और घुघूती जी का घर एक ही इलाके में है....इसलिए वो लोग साथ ही आ गए. और इस बात की तो प्रशंसा करनी पड़ेगी कि मुंबई में इतनी दूरी होने पर भी...उनलोगों ने इतने अच्छे से कैलकुलेट किया था कि बिलकुल समय पर आ गए. थोड़ी ही देर में आभा जी बोधिसत्व जी और युनुस जी भी आ गए. सतीश जी...पोस्ट तो बड़ी जल्दी जल्दी लिखते हैं...पर यहाँ काफी देर से पहुंचे.
पता नहीं किस बात पर भगवान राम का जिक्र आया और पुरातन काल में स्त्रियों की स्थिति पर गहरा विमर्श शुरू हो गया. सब लोग अपने अपने विचार रख रहे थे.पर घुघूती जी और बोधिसत्व जी ज्यादा मुखर थे. अब घुघूती जी की तस्वीर तो नहीं दिखा सकती {उन्हें कैमरे को सजा देने की आदत है ..उसे डांट कर दूर भगा देती हैं :)} लेकिन बोधिसत्व जी की तस्वीर से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कितने जोश में थे, दोनों वक्ता :)...फेसबुक पर इस सन्दर्भ में हुए कुछ संवाद का आपलोग भी लुत्फ़ उठाएँ
Rashmi Ravija अनुमान लगाइए बोधिसत्व जी, किसे कुछ समझाने की कोशिश कर रहे हैं??
Bodhi Sattva उधर कौन है जो नहीं समझ रहा...
Praveen Trivedi .........तो इतना गुस्साने की क्या जरुरत है ? .
Yunus Khan कउन कहता है कि बोधि गुस्सा रहे हैं। कोई मत कहिए कि वो खीझ रहे हैं। अरे भई वो तो बतियाए रए हैं।
Praveen Trivedi ओह! युनुस भाई .....माफी देव हमका ........हम समझे कि .................?
गुस्सा रहें हैं |
Praveen Trivedi वैसे इत्त्ने तथाकथित स्नेह से वह किससे बतिया रहे हैं ........अब ज़रा यहु तो बता दीजिए ना ?
Yunus Khan उनसे जिनका नाम एक चिडिया का नाम भी है।
Anil Pusadkar ghughuti basuti jee,
Bodhi Sattva लोग भावनाओं को नहीं समझते....तो क्या करें....
Ghughuti Basuti भावनाओं को तो समझना सरल है तर्क नहीं. वहीं तो मतभेद हो रहा है, मनभेद नहीं. वैसे कल जब हम बतिया / तर्किया रहे थे 'राम जी' हिचकियों से बहुत परेशान हो रहे थे.
Rashmi Ravija हा हा सही कहा,घुघूती जी..बेचारे राम , द्रौपदी, कृष्ण, अर्जुन,अहिल्या,गौतम , इंद्र को बड़ी हिचकियाँ आ रही होंगी....युनुस जी का सुझाव बढ़िया था...अगली बहस ठीक उसी बिंदु से शुरू होगी...:)..... वैसे मजा आ गया...सबको कॉलेज स्टुडेंट्स जैसे हँसते-बतियाते-बहसियाते देख.
Abha Bodhisatva अभी तो घुघूती जी के साथ हूँ......:)
Ghughuti Basuti प्रवीण, स्नेह तो स्नेह ही था तथाकथित नहीं, हाँ, विषय ही कुछ ऐसा था कि जोश आ ही रहा था, मजा भी.
Praveen Trivedi हम तो केवल बूझ पाने की कोशिश ही कर पा रहे हैं| .......फिर भी बड़ा मजा आ रहा है| वैसे चित्र चर्चा से कुछ आगे बढ़कर यह 'हिचकी' प्रकरण आगे बढ़ाया जाए .....तो कैसा ? .........बस क्यूंकि समझने में तनिक नहीं बहुत कठिनाई समझ आ रही है | इस (बोध) कथा को भी अगर समझाया जा सके ....तो बहुत ...........साधुवाद आप सबका |
Yunus Khan कुछ नहीं जी। बस ज़रा चर्चा श्रीराम के बहाने पौराणिक संदर्भ में स्त्री की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों से शुरू हो गयी थी। और फिर क्या था।
Praveen Trivedi ...........क्या था .....युनुस भाई ?
Yunus Khan अरे मास्साब!!
Bodhi Sattva बता दो भाई..
शरद जी से घुघूती जी ने यूँ ही पूछ लिया कि कितनी महिलाएँ उनकी कविता से प्रभावित हुई हैं और शरद जी ने तुरंत बता दिया कि उनकी पत्नी भी पहले उनकी कविताओं से ही प्रभावित हुई थीं. एक रोचक घटना भी उन्होंने शेयर की . शादी से पहले उन्होंने, लता जी से पूछा, "आप मार्क्स से परिचित हैं?" { अब कवि हुए तो क्या हुआ...लड़कियों से बात करने में सारे लड़के dumb ही होते हैं...(सॉरी शरद जी :))अब पहली मुलाकात में कोई लड़की से कार्ल मार्क्स के बारे में पूछता है?:)} और लता जी ने कहा..."हाँ बिलकुल परिचित हूँ..वो मार्क्स के पर्सेंटेज ना ?" (वे टीचर हैं...तो नंबर(मार्क्स) से ही उनका वास्ता पड़ता है ).
इस बात पर शरद जी की बहुत खिंचाई हुई पर सतीश जी और आभा जी की वेशभूषा पर हुई खिंचाई से कम.
संयोग कुछ ऐसा था कि दोनों लोगो ने बिलकुल मिलते जुलते रंग के ड्रेस पहने थे. फेसबुक पर इसपर बड़े रोचक संवाद हुए जो फोटो के नीचे कॉपी पेस्ट कर दे रही हूँ...
Rashmi Ravija किस स्कूल से क्लास बंक कर के आ रहे हैं दोनों...ड्रेस तो एक ही स्कूल की लग रही है...एकदम मैचिंग :)
Abha Bodhisatva कल तो छुट्टी थी..... :)
Rashmi Ravija कोचिंग क्लास का बहाना बनाया होगा...हा हा
Abha Bodhisatva कोचिंग में स्कूल ड्रेस हा हा हा.... :)
Rashmi Ravija यूनिफॉर्म वाला नया कोचिंग क्लास खुलनेवाला है..:)
Ghughuti Basuti जहाँ पढ़ने जाएंगे ब्लॉगर!
Satish Pancham मेरी टीचर ने तो आज मेरे कान पकड़ कर पिटाई भी कर दी.....ये कहते कि क्लास में तबीयत खराब का बहाना बहाना बनाकर छुट्टी ली और वहां ब्लॉगर बैठकी में जा पहुंचा ......वो क्या है कि मेरी टीचर भी फेसबुक पर ही है, उसे भी यहीं से पता चला :)
Ghughuti Basuti जो टीचर फेसबुक पर हो उससे पढ़ने नहीं जाना चाहिए.
वैसे रोचक बात यह भी थी कि घुघूती जी, बोधिसत्व जी एवं शरद जी ने शायद वसंत के आगमन की ख़ुशी में पीले रंग के कपड़े पहन रखे थे..(घुघूती जी तो पीली साड़ी और लाल बिंदी में बहुत ही ख़ूबसूरत लग रही थीं.) उनके परिधानों पर वसंत के असर के जिक्र पर बोधि जी ने कहा .."भायं भायं करता आया वसंत..." सतीश जी ने इसपर 'इसी पंक्ति से एक कविता रच डालने का अनुरोध भी कर डाला. देख लीजिये बानगी
atish Pancham वैसे युनुस जी ने या शायद आप ही ने कहा था - 'भांय भांय बसंत'......रोचक शब्द रचना है :)
Bodhi Sattva यह मैंने कहा था भाई..खुद के लिए....
Satish Pancham बोधि जी.....इतने से नहीं चलेगा....पूरा किजिए :) 'भांय भाय करता बसंत' अब रच ही डालिए :)
Yunus Khan भांय भांय करते ब्लॉगर/भांय भांय करता बसंत। इस तस्वीर में खिले दांतों को देखकर कहा जा सकता है कि ब्लॉगरी करके भी खुश रहा जा सकता है।
Bodhi Sattva अरे सतीश जी...मैं अपनी वावाज को कितना प्यार करता हूँ.....निरपेक्ष हो कर नहीं लिख पाऊँगा... :)
Rashmi Ravija वावाज ???
Bodhi Sattva वावाज...के मायने हैं.....ऐसी आवाज जो तारीफ के काबिल हो.....
शरद जी की उसी शाम की ट्रेन थी और बोधि जी की भी एक मीटिंग थी..इसलिए बातचीत अधूरी छोड़ कर ही सबको उठ जाना पड़ा. युनुस जी ने हँसते हुए सुझाव रखा कि "अब ये बहस अगली मीटिंग में ठीक उसी बिंदु से शुरू होगी."
मैने कहा..."हाँ! मैने विषय नोट कर लिया है..".अब तो यहाँ लिख भी दिया :)
वैसे एक "कोडक मोमेंट" छूट गया....बोधी जी ने "माफ़ करना माते " कहते झुक कर विधिवत घुघूती जी के पैर छू लिए और घुघूती जी ने भी भरपूर आशीर्वाद दिया. सबके चेहरे पर मुस्कान खिल आयी...बहुत ही हंसी-ख़ुशी के माहौल में वो पल गुजरे... कुछ ऐसे ही और पलों का इंतज़ार है,अब.
कुछ और चित्र
| शरद जी, युनुस जी एवं बोधिसत्व जी |
| सतीश पंचम जी, बोधिसत्व जी,आभा जी,शरद जी एवं युनुस जी |
| दो महिलाओं के बीच बैठकर फोटो खिंचवाने के लिए मुस्कराहट की कॉन्फिडेंस जरूरी है. |














