31दिसंबर 2012 को You Tube पर कड़वी सच्चाई बयान करता हुआ एक जोशीला गीत रिलीज़ हुआ . इस गीत को बनाने वालों (Swangsongs ) ने अपनी पहचान नहीं बतायी है बल्कि सिर्फ गीत के जरिये दिया सन्देश ही महत्वपूर्ण माना है।
इस गीत का एक एक शब्द बहुत ही प्रभावी है।
माँ नी मेरी मैं नई डरना .
जावेद अख्तर की ये ग़ज़ल बड़ी मौजूं लग रही है ,इस माहौल में
वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है
जमीन, सूरज की उँगलियों से फिसल रही है
जो मुझे जिंदा जला रहे हैं, वे बेखबर हैं
कि मेरी ज़ंजीर धीरे धीरे पिघल रही है
मैं क़त्ल तो हो गया, तुम्हारी गली में लेकिन
मेरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है
न जलने पाते थे ,जिनके चूल्हे भी हर सवेरे
सुना है, कल रात से वो बस्ती भी जल रही है
सुना है, कल रात से वो बस्ती भी जल रही है
मैं समझता हूँ कि खामोशी में ही समझदारी है
मगर यही समझदारी मेरे दिल को खल रही है
कभी तो इंसान ज़िन्दगी की करेगा इज्ज़त
ये एक उम्मीद आज भी दिल में पल रही है

