Monday, March 7, 2011

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो....

वो हमारे योगा क्लास में आती थी, बाइस-तेइस साल की कोई कॉलेज गोइंग लड़की लगती थी. चुलबुली सी....हमेशा मुस्कुराती  हुई. फिर बातों बातों में पता चला वो छब्बीस बसंत देख चुकी है...और सिर्फ शादी-शुदा ही नहीं...दो बच्चियों की माँ भी है. उन्नीस साल की छोटी सी उम्र में एक बड़े व्यवसायी खानदान में उसकी शादी हो गयी. पति भी शादी के वक्त इक्कीस वर्ष के ही थे. उसकी शादी के बाद ही जिठानी ने घर के कामो  से बचने के लिए ,एक स्कूल में नौकरी कर ली. खुशमिजाज़ प्रिया ( नाम बदला हुआ है) जिठानी की दोनो  बेटियों को भी संभालती और किचन  भी देखती. क्यूंकि उसे कुकिंग का बहुत शौक था....थाई, चाइनीज़, इटैलियन, मुगलई हर तरह का खाना बना लेती. हमलोगों से भी  बातों-बातों में कई रेसिपीज़ शेयर करती. बाद में उसकी  अपनी भी दो बेटियाँ आ गयीं. थोड़ा सा समय अपने साथ गुजारने के लिए उसने योगा ज्वाइन किया था.

क्लास में ज्यादा बात नहीं हो पाती. एक दिन मार्केट में मिल गयी तो हमने साथ-साथ शॉपिंग की. उसी दरम्यान उसके पति के करीब ६-७ फोन आए. योगा क्लास में हम उसकी खूब खिंचाई करते कि......'अब तक, इसका तो हनीमून पीरियड ही ख़त्म नहीं हुआ '. वो भी मुस्कुरा कर साथ देती रहती. जब उसे पता चला कि मैं कहानियाँ लिखती हूँ...तो अक्सर कहती,'मेरी कहानी लिखो, मेरे पास बहुत मेटेरियल है' मैं भी हंस कर कह देती...'हाँ...जरूर' सोचा अफेयर और शादी के किस्से होंगे. फिर दो महीने बाद उसने आना बंद कर दिया. यह आम बात थी....अक्सर महिलाएँ समय नहीं एडजस्ट कर पातीं....और आना बंद कर देतीं हैं.


काफी दिनों बाद, मेरी सहेली के पास  (जो योगा इंस्ट्रक्टर भी है) प्रिया का sms आया...." My husband is in coma...please pray for him." जब उसने हतप्रभ होकर प्रिय को कॉल किया तो पता चला ,प्रिया का पति अल्कोहलिक है और करीब पिछले दो साल  से बीमार चल रहा है.डॉक्टर का कहना है कि उसके अंदरूनी अंग काम नहीं कर रहे. पर वह कोमा से बाहर आ गया. सिर्फ उसकी युवा उम्र और उसके  विल पावर से ही यह संभव हो पाया. उसके बाद करीब चार  महीने वह हॉस्पिटल में रहा, तीन बार कोमा में भी गया पर फिर रिकवर कर गया.


वह घर आ गया.  कभी फोन पर या कभी रास्ते में प्रिया मिल जाती तो मैं, प्रिया से उसके पति का हाल पूछ लेती. एक बार मैं अपने गेट से निकली ही थी कि पीछे से हॉर्न सुनाई दिया, देखा कार में प्रिया थी...उसके पति का हाल-चाल पूछ ही रही थी कि उसने कहा, "तुम्हारे पास समय है....मैं बहुत परेशान हूँ....किसी से भी बस थोड़ा बात करना चाहती हूँ...."  उस वक्त मुझे सौ जरूरी काम होते तो वो भी छोड़ देती, "किसी का दुख बाँट तो नहीं सकते,हम...कम से कम सुन तो सकते हैं." मेरे हाँ, कहने पर वो मुझे एक पार्क में ले गयी और सारी कहानी बतायी...."वो बी.ए. सेकेण्ड इयर में थी, तभी उसके ससुराल वालों ने उसे किसी फंक्शन में देखकर अपने छोटे बेटे के लिए पसंद कर लिया था. इन लोगों का बहुत बड़ा बिजनेस  था, बड़ा सा बंगला...घर में ही एक मंजिल से दूसरी मंजिल जाने के लिए लिफ्ट लगे हुए हैं...यह सब देख, प्रिया के परिवार वाले भी मान गए. 


शुरू में उसके पति बस पार्टी में शौक के लिए पीते थे...फिर धीरे-धीरे शराब उन्हें पीने लगी...दोस्तों का जमावड़ा बढ़ गया. ससुराल वाले भी प्रिया को ही दोष देते कि 'वो गलत संगत में जा रहा था, इसीलिए इतनी छोटी उम्र में उसकी शादी कर दी, लेकिन प्रिया उसकी ये आदत छुडवा नहीं सकी.' प्रिया ने जिद करके उसे दो बार rehab  में भी भेजा.पर वापस आकर वो फिर से शराब पीना शुरू कर देते . दो साल  पहले उसके ससुर को पैरालेटिक अटैक आया...जिस वजह से वे अब घर से बाहर नहीं जा पाते. दोनों भाई मिलकर ही  बिजनेस देखते थे....उसके पति को और छूट मिलने लगी और वह काम के बहाने घर से दूर रहकर और शराब पीने लगे . दो साल से उनकी  तबियत खराब चल रही थी और अब तो डॉक्टर ने भी कह दिया है, कि उनका शरीर  अंदर से बिलकुल खोखला हो गया है. 

प्रिया ही बार-बार उन्हें  हॉस्पिटल में लेकर जाती है...वहाँ साथ रहती है. क्यूंकि जेठ बिजनेस देखते हैं और ससुर..अशक्त हैं. दूसरे शहर से उसके भाई और माता-पिता आते हैं,पर दस दिन से ज्यादा नहीं  रुक पाते. अम्बानी हॉस्पिटल इतना अच्छा हस्पिटल है..पर उसमे पेशेंट की देखभाल करनेवाले के खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं है. कैंटीन भी नहीं है. घर से दूर होने के कारण खाना भेजना भी नहीं संभव और पूरे चार महीने प्रिया ने सिर्फ ब्रेड...बड़ा पाव ..यही सब खाकर गुजारे. पति को घर तो ले आई , पर फिर भी हर तीन दिन पर उसे लेकर पास के हॉस्पिटल में जाना पड़ता, क्यूंकि उनके  पेट में पानी भर जाता उसे निकालना जरूरी था. . वैसे भी  हर दस दिन पर कुछ ना कुछ कम्प्लिकेशन हो जाते हैं और उन्हें उसी दूर अम्बानी हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ता है. डॉक्टर भी उसे बुलाकर  कहते कि हस्पिटल लेकर मत आया करो, अब इसके अंदर कुछ नहीं बचा है. एक दिन में तेरह तेरह हज़ार के पांच  इंजेक्शन लग जाते . 

शराब नहीं मिलने से विड्रौल सिम्पटम भी होते, वो बहुत चिडचिडा हो जाता. और सारा गुस्सा प्रिया पर ही निकालता. फिर भी प्रिया  उसके साथ साए की तरह लगी रहती. दस बजे रात को अगर वाटर मेलन खाने को  कहता तो प्रिया उसके लिए लेकर आती. 
अब ससुराल वाले उसे कहते  हैं...'तलाक ले लो '. पर प्रिया का कहना था कि उसे पता नहीं कितना पैसा देंगे, और वह दो बेटियों को लेकर मायके चली भी जाती है तो आज उसका भाई उसे बहुत प्यार करता है लेकिन कल  क्या उसका यही प्यार बना रहेगा? फिर अंतिम समय में पति का साथ छोड़ना भी उसका दिल  गवारा नहीं करता. लेकिन प्रिया ने परिवार के बड़े बुजुर्गों को बुला, उस बंगले का एक फ्लोर अपने नाम करवा लिया . मैं सोच रही थी, 'इतनी सी उम्र पर हालात ने उसे कितना चौकन्ना  बना दिया  है.' प्रिया बता रही थी कि वह कहीं बाहर जाती है तो पति शक के मारे दस फोन करते हैं  क्यूंकि उन्हें  विश्वास ही नहीं होता, "वो एक शराबी पति के साथ कैसे रह सकती है...उन्हें छोड़कर क्यूँ नहीं जाती"

अक्सर  ही पति के कोई ना कोई टेस्ट होते हैं और उसकी रिपोर्ट लेकर प्रिया को अम्बानी हॉस्पिटल जाना पड़ता है. और ऐसी हालत में भी उसे अनुपस्थित पा पति चुपके से शराब मंगवा कर  पी लेते हैं. जिस दुकान से वे शराब ख़रीदा करते  थे. उस दुकान वाले को भी अपराध बोध हुआ क्यूंकि एक दिन प्रिया ने जाकर उसे बहुत डांटा कि 'आपने तो पैसे बनाए पर किसी की ज़िन्दगी तबाह कर दी.' उसने प्रिया को फोन करके बताया कि उसके पति ने उसे शराब भेजने के लिए फोन किया था, जब उसने मना कर दिया तो उन्होंने दूसरे दुकान से शराब मंगवाई है. आज भी वो रिपोर्ट लेकर गयी थी कि हॉस्पिटल में ही शराब के दुकान वाले का फोन आया और वह इतनी अपसेट हो गयी थी कि घर आकर ,पति को खूब बाते सुनाईं और बस गाड़ी लेकर निरुद्देश्य इधर- उधर भटकने को निकल  पड़ी थी कि मैं उसे दिख गयी...मैं उसे क्या कह सकती थी, यही कहा कि 'तुम इतनी स्ट्रॉंग हो, इसीलिए भगवान ने तुम्हे चुना है..वरना दूसरी लड़की कब की बिखर गयी होती."

इतनी कोशिशों के बावजूद भी, ये सावित्री अपने सत्यवान को नहीं बचा पायी.


हम उस से मिलने गए तो इतने कम उम्र के एक सुदर्शन युवक के फोटो के ऊपर चढ़ी माला और सामने जलता दीपक देखे नहीं जा रहे थे. प्रिया की आँखें  वैसी ही सूखी हुई थीं. प्रिया को रंगीन  कपड़ों में देख सुकून  हुआ. पता चला उनके धर्म में तेरहवीं के बाद खुद उनके धर्म गुरु रंगीन कपड़े आशीर्वाद स्वरुप देते हैं. प्रिया अपने पति के अंतिम क्षण बता रही थी की डॉक्टर को बुलाया तो उन्होंने कहा, 'अब अंत निकट है...कहीं ले जाने का कोई फायदा नहीं...परन्तु उसके पति की लाल आंखे उस पर टिकी हुई थीं..."और  मेरे लिए सुनना बहुत मुश्किल हो रहा था क्यूंकि ये सब मैने इसके पहले कभी सुना और देखा नहीं था पर अपनी पहली लम्बी कहानी में बिलकुल ऐसा ही दृश्य लिख चुकी थी, वहाँ शरद अपने दोस्त के लिए  कहता है...(लाल-लाल आँखें, बेचैनी से सारे कमरे में घूमती और मुझपर टिक जातीं
और जावेद को शांति से इस लोक से विदा करने की खातिर, मैंने उसके समक्ष प्रतिज्ञा की, बार-बार कसम खायी कि आज से उसके परिवार का बोझ मेरे कंधे पर आ गया। प्राण-पण से उनके सुख-दुख का ख्याल रखूंगा मैं... उसके बच्चों की सारी जिम्मेवारी अब मुझ पर है ) यहाँ प्रिया कह रही थी, मैने उसे बार-बार कहा...मैं तुम्हारी बेटियों को बहुत अच्छी एडुकेशन दूंगी, उनकी अच्छी शादी करुँगी...मेरी चिंता मत करो...मैं भी खुश रहूंगी तुम शान्ति से जाओ'

पर प्रिया को अपना दुख भूल, अपनी बड़ी बेटी को संभालना पड़ रहा था क्यूंकि वो अपनी माँ और दादी से नाराज़ थी कि  "उसके पापा को हॉस्पिटल क्यूँ नहीं ले गए..."


छब्बीस साल  की उम्र तक कितनी लडकियाँ पढ़ाई ही करती रहती हैं...नौकरी भी करती हैं तो अपना बिस्तर-कपड़े सब यूँ हीं माँ के भरोसे छोड़ चली जाती हैं....और यहाँ प्रिया इसी उम्र में अपने कंधे पर जिम्मेवारियों का बोझ लिए खड़ी है.....पर  चेहरे पर मुस्कान लिए उन्हें बखूबी निभा रही है.


कहते है..अनजान  की दुआ क़ुबूल होती  है....मेरी इल्तजा  है कि आज 'नारी दिवस' पर मन ही मन एक प्रार्थना  'प्रिया' के लिए करें कि उसका आगामी  जीवन कंटकरहित हो.

51 comments:

  1. रश्मि जी ,
    बहुत हृदयस्पर्शी पोस्ट है ..महिला दिवस पर इससे अच्छा तोहफा कुछ नहीं हो सकता ..एक महिला की सहनशीलता और जुझारूपन को हृदय से नमन .प्रिया के लिए असीम शुभकामनाएं

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  2. हम्म!! अजीब मन हो गया...प्रिया के लिए प्रार्थना करते हैं...

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  3. bahut sundar post
    priya jaisi har mahila ke liye dil se dua karti hoon .

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  4. आज रोजी कमाती रेजाओं (मेहनतकश महिलाएं) जिनके नाम नहीं मालूम, के प्रति सम्‍मान व्‍यक्‍त करने का मन है, शायद हमारी प्रार्थना पर उन्‍हें हंसी आए.

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  5. प्रिया की यह कहानी पढ़कर मुझे मेरे सा‍थ काम करने वाली एक दोस्‍त की कहानी याद आ गई। हां उसकी शादी 22 की उम्र में हुई। दो बेटियां हुईं और फिर पति इसी शराब में डूबकर चला बसा। दोस्‍त की यह शादी घर वालों की पसंद से हुई थी। दोस्‍त किसी और को चाहती थी। अब देखिए चाहने वालों को कुदरत मिला ही देती है। दोस्‍त जिसे चाहती थी,तो उसने शादी ही नहीं की। जब यह हादसा हुआ तो वह चौथे दिन ही दोस्‍त के सामने हाथ थामने के लिए खड़ा था।दोस्‍त ने केवल एक शर्त पर हामी भरी कि उनका कोई बच्‍चा नहीं होगा। दोनों की शादी को इसी जनवरी में 9 साल हो गए हैं। दोनों खुश हैं,बच्चियां भी खुश हैं।
    *
    मेरी तो यही कामना है कि प्रिया को भी कोई ऐसा ही हमसफर मिल जाए। शुभकामनाएं।

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  6. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सामयिक और सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार !
    प्रिया और प्रिया जैसी अनगिनत महिलाओं के लिए शुभकामनाएँ !

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  7. priya kee yah himmat uske her raah ko raushan kare

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  8. क्‍या किया जा सकता है आजकल तो शराब का चलन फैशन बन गया है लोग ताल ठोककर इसकी अच्‍छाई बताते हैं। जो भुगतता है बस उसे ही मालूम पड़ता है।मैं ऐसी कई प्रियाओं को जानती हूँ।

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  9. क्या कहूँ दीदी?ऐसी पोस्ट निकलेगी ये सोचा नहीं था..
    अजीब सा फील हो रहा है पढकर

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  10. प्रिया के अन्दर एक नयी प्रिया का जन्म तो हो गया पर इतनी कम उम्र में दुनिया की हर सच्चाई उसके सामने आ गई जो कभी कभी ...नारी मन की कोमलता को जला देती है ... प्रिया के लिए दुआ करती हूँ उसका जीवन सहज हो जाए

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  11. मार्मिक .... ह्रदय स्पर्शी .... पर सच पूछें तो प्रिय जरूर हिम्मत से हर स्थिति को पार कर लेगी ... दरअसल नारी में बहुत शक्ति होती है ... वो कुछ करना चाहे तो उसे कोई रोक नहीं सकता ...
    नारी दिवस पर मेरी दुआ है की प्रिय को हिम्मत मिले ...
    सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएं ....

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  12. एक प्रिया को तो मैं भी जानता हूं.....उसने अपने शराबी पति को सुधारने का बहुत प्रयास किया, मारी पीटी गई, लांछन लगाये गये और अंत में उसने अपने पति से तलाक ले लिया।

    तलाक के बाद उसने बी एड की पढ़ाई की और आज टीचर है।

    ऐसी न जाने कितनी प्रियाएं हमारे आस पास हैं....बस उनकी बातें सामने नहीं आ पातीं।

    आपने बढ़िया किया जो इस मुद्दे को रखा और साथ ही शराब की तरफदारी करती मानसिकता को भी संभवत: एक आइना सा दिखाया है।

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  13. प्रिया की कहानी मन को कस कर झकझोर गयी ! इतनी छोटी सी उम्र में उसे कितना संघर्ष करना पड़ रहा है और कैसी विषम परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है यह जान कर मन व्यथित हो गया ! प्रिया नारी शक्ति की जीवित मिसाल है ! ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे हर कदम पर उसकी सहायता करें और दायित्वों के निर्वहन में उसकी कठिनाइयों को कम करें ! प्रिया तथा उस जैसी सभी नारियों का अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं हृदय से अभिनन्दन करती हूँ ! आप सबको भी महिला दिवस की शुभकामनायें !

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  14. bouth he aacha post kiya hai aapne dear... keep it up
    happy women's day...Visit My Blog PLz..
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  15. इस शराब ने न जाने कितने घर बर्बाद किये हैं ।
    प्रिया की कहानी सचमुच दिल दहला देने वाली है ।

    भगवान उसको शक्ति दे अपने पैरों पर खड़ा होने की ।

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  16. bahut marspershi andar tak aatma ko bhed jaati hain aap ki ye kahani aur priya ki sacchayi ]

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  17. हमारी संवेदनायें और प्रार्थनायें साथ में हैं।

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  18. प्रिया के रूप में आपने एक कटु सच को सामने रख दिया है, कुछ कहते नही बन रहा है. ना जाने हम कब सुधरेंगे?

    रामराम.

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  19. व्यथित करने वाली सत्यकथा!! ईश्वर से प्रार्थना है प्रिया के सुखद भविष्य की!!

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  20. कहानी ....तो दिल को रुलाने वाली है .. . पता नहीं लोगों कि जिन्दगी कब कैसे बर्बाद हो जाती है .... और शक उसकी कोई दावा नहीं ये मानव का स्वभाव है...

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  21. बहुत संवेदनायें समेटे हुये है ये पोस्ट। प्रिया का व्यक्तित्व प्रेरना देता है। उसके अच्छे स्वास्थ्य के लिये भगवान से प्रार्थना करती हूँ। शुभकामनायेण।

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  22. प्रिया!! सच मे बहुत हिम्मत वाली हे, ऎसी नारिया जीवन मे बहुत कुछ कर लेती हे,शरबी पति का साथ अंत तक नही छोडा वो भी आज के जमाने मे, धन्य हे यह नारी, मै भगवान से यही प्राथना करता हुं कि अब इसे कोई दुख ना हो, इस की बच्चिया मां का ध्यान रखे, ओर बाकी जीवन खुशी खुशी बीते... बहुत कष्ट सह लिये छोटी सी उम्र मे, भगवान अब इस बेचारी पर दया करो, हमारी शुभकामनाऎ प्रिया के लिये

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  23. आज के दिन यह एक सार्थक पोस्ट है। दिल से कामना करते हैं कि प्रिया का आगामी जीवन कंटकरहित हो!

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  24. बहुत जीवट वाली है प्रिया. वैसे ऐसी परिस्थियों में महिलाओं के अन्दर पता नहीं कहां से ताक़त आ जाती है, झेलने की. प्रिया तो आर्थिक रूप से सम्पन्न है, मेरी बाई की भी ऐसी ही कहानी है. उसके पति का निधन भी शराब के कारण बीमारी के साथ हुआ. छोटे छोटे बच्चों को उसने न केवल पाला, बल्कि उनकी पढाई भी जारी रखी.
    सलाम प्रिया को, और तुम्हें भी, इस हौसले को साझा करने के लिये.

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  25. कैसे कैसे लोग होते हैं दुनिया में..

    और प्रिया बहुत मजबूत है और जीवन की लड़ाई वह जीतकर ही रहेगी.. क्योंकि जो अंदर से मजबूत होते हैं वही जीवटता से जी पाते हैं और हर किसी घटना का सामना करने को तैयार रहते हैं।

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  26. मैं वही तो कहता हूँ की शराब क्यूँ पीना? शराब पीने से अच्छा है की नाली का पानी पी लो..... कमोड में straw डाल कर पी लो... लेकिन शराब क्यूँ पीना.... वैसे प्रिया के लिए दुआ कर रहा हूँ...

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  27. अपने हिस्से के दुःख प्रिया ने इतनी छोटी सी उम्र में भोग लिए आनेवाला जीवन सरल, सामान्य हो प्रिया और उसके बच्चो के लिए यही प्रर्थना है ईश्वर से हमारी , प्रिया और प्रिया जैसी अनेक लडकियों के लिए जो जीवन के लिए संघर्षरत है |

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  28. कुछ कहते नहीं बन रहा....
    शिकायत है भगवान् जी से....

    आपके सद्प्रयास के लिए बहुत बहुत आभार...क्या पता कईयों के ह्रदय से निकली शुभेक्षा अब प्रिय के आने वाले कल में उजाला बन चमके...

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  29. एक सशक्त सामाजिक कहानी -औपन्यासिक कृति का रूप ले तो रानू और गुलशन सभी ध्वस्त !:)

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  30. रश्मि आंख मे सिर्फ़ पानी ही पानी है और होठों और दिल से एक ही दुआ है प्रिया का जीवन सुखद हो और उसे जीवन मे वो सब मिले जिसकी वो हकदार है ………महिला दिवस की इससे सार्थक पोस्ट हो ही नही सकती क्योंकि ये हकीकत है कहीं कोई बनावट नही है…………बस यही कहूंगी तुम्हे जब भी मिले तो उसे आगे जीवन जीने के लिये प्रेरित करना और नये सिरे से जीने की सोचे इतनी लम्बी ज़िन्दगी अकेले नही गुजारी जा सकती वो भी आज के वक्त मे …………बेशक वो जुझारू है फिर भी एक साथ मिले तो जीवन आसान हो जायेगा।

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  31. रश्मी, बहुत ही दिल को छू लेने वाली कहानी है ।हिम्मत वीली है प्रिया और यही हिम्मत उसे पार लगायेगी । आपके इस ब्लॉग का पता आपने दिया बहुत अच्छा लगा ।

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  32. @अरविन्द जी,
    आपने इसे सशक्त कहानी माना,...ठीक पर ...इस दुखद घटना पर आपकी स्माइली समझ में नहीं आई

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  33. @अगर यह सच्ची घटना है तो स्माईली के लिए सचमुच खेद है ....सामाजिक कहानीकारों का यथार्थ वर्णन प्रायः एक सामाजिक सच्चाई को उजागर भले ही करता है मगर लेखक के निजी परिवेश की किसी वास्तविक घटना से सम्बन्धित ही हो ऐसा नहीं होता ..इसलिए कई बार इस आशय के डिस्क्लेमर लगा दिये जाते हैं -हाँ मुझसे निर्णय की भूल शायद यह हो गयी कि मैं इंगित कहानी का इस लिहाजा से मूल्यांकन न कर सका -इसे एक यथार्थवादी फिक्शन मान बैठा -और नेगेटिव स्टाईल में मगर जोरदार काम्प्लीमेंट दे बैठा और इस लिए ही स्माईली लगाया ताकि उसे आप पाजिटिव रूप में लें ....कभी कभी बहुत अच्छी फिल्मो के देखकर निकालते ही कुछ ऐसे भी कमेन्ट सुनायी पड़ते हैं -व्हाट अ ब्लडी मार्वेलस फिल्म -मतलब वह बहुत अच्छी फिल्म है ..... :) अब ठीक है ?

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  34. @अरविन्द जी,
    कहानियों का मेरा अलग ब्लॉग है...यहाँ सिर्फ सच्चे संस्मरण ही होते हैं.

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  35. प्रिया जैसा कष्ट ईश्वर किसी को न दे ...उसको इस कच्ची उम्र में अभी बहुत कुछ सीखने को बाकी है !

    बेहतर है कि नए सिरे से जीवन कि शुरुआत करे और स्वाबलंबी बने ! इस वक्त इस लड़की को आत्मविश्वास की बेहद आवश्यकता है और इसे पाने के लिए एक " समझदार आत्मीय अपनापन " की बेहद आवश्यकता होगी !

    मैं उम्मीद करता हूँ कि रश्मि इस कमी को पूरा करने में समर्थ होंगी, मगर इसके लिए बहुत समय चाहिए ....

    लडखडाती हुई यह लड़की, इस समय अगर मज़बूत फैसला ले पाती है तो बाकी जीवन आसान हो जाएगा, मगर एक भी गलत फैसला, पिछली कडवी यादों के साथ, सारा बचा हुआ जीवन बिगाड़ने के लिए काफी होगा !

    प्रिया के लिए हार्दिक शुभकामनायें.

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  36. मन अजीब सा हो गया पढ़कर.... बहुत ही मार्मिक ... :(
    God bless her...

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  37. रि‍श्‍तों को ढोने से क्‍या मतलब? दुनि‍यां से जि‍न्‍दगी छीननी पड़ती है और इस सब में टैगोर के कहे जैसे "अकेले ही" चलना पड़ता है।

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  38. बहुत दर्दनाक !
    सोच रही हूँ की ईश्वर कुछ लोगों की कितनी परीक्षा लेता है और उन लोगों को कितनी सहनशक्ति भी देता है ...

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  39. कितना कुछ होता है इस दुनिया में!

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  40. @ Rajey Sha राजे_शा

    रि‍श्‍तों को ढोने से क्‍या मतलब?

    दूसरों के लिए कहना बहुत आसान है ...पर जब दो मासूम ज़िंदगियाँ भी जुड़ी हों साथ में,... तो ये "एकला चलो रे" नहीं चलता...

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  41. bahut si feelings h...log sharab kyu peete h!!

    aap painter b h.......achha laga..vaise kabhi kabhi mei b karta hu.

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  42. हमारी संवेदनायें और प्रार्थनायें साथ में हैं।

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  43. आपकी दुआ के साथ हमारी भी शुभकामनायें !

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  44. दुःख तो हुआ ही किन्तु प्रिया जैसी युवतियां समाज की रीढ़ है. एक उम्मीद पर कि वो शराब पीना छोड़ देंगे उसने सब सहा. तलाक या परिवार को छोडना ही तो इस समस्या का हल नही.
    ईश्वर उसे हिम्मत दे और.....रिश्तेदारों के असली रूप जो पति के ना रहने पर आते है उन्हें 'फेस' करने की शक्ति दे.उसे पैरों पर खड़ा होना चाहिए चाहे व्यापार को खुद संभालना हो या इनकम के सोर्सेज तैयार करने हो.
    बाकी...सब समय के साथ फैसले ले.
    शादी कर ले बाद में... नही तो...घर कत्तई ना छोड़े.

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  45. पढ़ लिया, कुछ कहने योग्य न तो अनुभव है न शब्द।
    आपकी दुआ में समवेत स्वर है बस, आमीन!

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  46. बहुत ही मार्मिक पोस्ट।
    मैने भी इस तरह कई प्रियाओं को देखा है।
    लेकिन अगर इस जगह प्रिया की जगह अगर किसी प्रिया का पति होता तो शायद परिवार बिखर जाता। इस जगह बहुत कम ही (शायद विरले ही) पुरुष घर संभाल पाते हैं।

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  47. प्रिया जी की हिम्मत को नमन। ईश्वर इतना कठोर नहीं हो सकता है। अपनी, उनकी और सबकी प्रार्थनाएं जरूर रंग लाएंगी और सब दुख देखना जल्दी ही दूर हो जाने हैं।

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  48. नानक दुखिया सब संसार

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