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| सोनाली मुखर्जी का एसिड अटैक से पहले का चित्र |
दुनिया के करीब बीस देशों में हर वर्ष करीब 1500 लोग एसिड अटैक के शिकार होते हैं और इनमे 80 % औरतें होती हैं ,जिनमे से 70 % की उम्र 18 साल के आस-पास होती है . दक्षिण एशियाई देशों में ही ऐसे कुकृत्य ज्यादा देखने में आते हैं और इनमे प्रमुख हैं,. भारत, पकिस्तान, बांगला देश ,ईरान , अफगानिस्तान, कम्बोडिया आदि .
इन देशों में साल में करीब 100 एसिड अटैक की रिपोर्ट दर्ज होती है. इसके अलावा कितनी घटनाओं की तो रिपोर्ट ही नहीं की जाती.
भारत में भी देश के एक कोने से दुसरे कोने तक हमारी बहने इस जघन्य अत्याचार की शिकार हो रही हैं .बिहार, यू.पी , कर्णाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र ,कश्मीर हर प्रदेश में कई ऐसे नाम हैं जो अपना चेहरा खो चुकी हैं, बस उनकी कहानियाँ बाकी हैं . विद्या के माता -पिता ने जब शादी स्थगित कर दी, तो उसके मंगेतर ने उसके चेहरे पर तेज़ाब उंडेल दिया .विनोदिनी के पिता को पैसे उधार देने के बाद, वो व्यक्ति विनोदिनी से शादी करना चाहता था . विनोदिनी के इनकार करने पर उसका यही हाल किया गया
सत्रह साल की सोनाली मुखर्जी के भी इनकार करने पर उसके कॉलेज के ही तीन लड़कों 'तापस मित्रा' , 'संजय पासवान ' और 'ब्रह्मदेव हाजरा ' ने घर में घुसकर सोती हुई सोनाली को तेज़ाब से नहला दिया . वे लड़के पकडे गए ,लोअर कोर्ट ने उन्हें नौ वर्ष की सजा भी सुनायी पर 'तापस मित्रा' , 'संजय पासवान ' बस चार महीने जेल में रहकर बेल लेकर आजाद घूम रहे हैं .ब्रह्मदेव हाजरा ' को कोई सजा नहीं मिली क्यूंकि कोर्ट ने उसे बरी कर दिया क्यूंकि वह उस वक़्त नाबालिग था .हाईकोर्ट में अपील की गयी है, पर नौ वर्ष हो गए और फैसला आना अभी बाकी है.
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| एसिड अटैक के हादसे के बाद सोनाली KBC में |
KBC के season 6 में सोनाली को आमंत्रित किया गया और वे पच्चीस लाख की इनाम राशि जीत पायीं . इस से कुछ तो उनके इलाज का खर्च निकल आयेगा . .
पर ऐसी पता नहीं कितनी ही सोनाली इस दर्दनाक हादसे का खामियाजा भुगत रही हैं
एक कश्मीरी स्कूल टीचर का रोज पीछा करने वाले एक युवक ने टीचर की तरफ से कोई बढ़ावा न दिए जाने पर उसका चेहरा ही बिगाड़ दिया. हसीना हुसैन के पूर्व बॉस ने शादी से इनकार करने पर बदला लेने का हथियार तेज़ाब को ही बनाया शिरीन जुवाले, स्वप्निका, सबकी यही कहानी है. कुछ साल पहले मुंबई में ही एक खबर पढ़ी थी, जहां एक लड़की ग़लतफ़हमी (mistaken identity ) की शिकार हो गयी .एक लड़के ने दो लोगो को एक लड़की पर तेज़ाब फेंकने के लिए हायर किया था. ये दोनों लोग उस लड़की को नहीं पहचनाते थे और गलती से किसी दूसरी लड़की को निशाना बना आये.
अभी हाल की ही खबर है, जहां जातिवाद की वजह से भी दो मासूम बहनें ,ऐसे भयानक हादसे की शिकार हुईं .21 अक्तूबर 2012 को चार ऊँची जाति के युवकों ने उन्नीस वर्षीय चंचल पासवान और उसकी पंद्रह वर्षीय बहन के ऊपर तेज़ाब फेंककर,उन्हें बुरी तरह झुलसा दिया . चंचल अकेली दलित लड़की है जो दसवीं पास कर ग्यारहवीं में पढ़ रही थी, पढने में तेज थी और कंप्यूटर इंजिनियर बनाना चाहती थी/है . ऊँची जाति के युवक उसे हमेशा परेशान किया करते थे .फिर भी अपनी पढ़ाई जारी रखने और उन युवकों के दबाव में नहीं आने के कारण उसे यह सजा दी गयी .उसके माता-पिता मजदूर हैं , दोनों बहनों का पटना मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है. ज्यादातर दवाइयां और मलहम बाहर से खरीदने के लिए कहे जाते हैं जिसे वे नहीं खरीद पाते.
हमारे क़ानून में एसिड फेंकने वाले अपराधियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान नहीं है. न्यायिक प्रक्रिया भी बहुत लम्बी है . और फैसला आने तक अपराधी किसी की ज़िन्दगी तबाह कर खुद आराम से सामान्य जीवन बिताते हैं . जबकि पीडिता न सिर्फ असहनीय दर्द झेलते एक जिंदा लाश में तब्दील हो जाती है बल्कि उसके चरित्र पर भी अंगुलियाँ उठायी जाती है.
तेज़ाब सिर्फ चेहरे को ही नहीं झुलसाता बल्कि पीड़ितों के लिए एक एक दिन जीना मुश्किल कर देता है .अक्सर उनकी आँखों की रौशनी भी चली जाती है. कान से सुनाई नहीं देता और उनके हाथ-पैर भी ठीक से काम नहीं करते .
समाज ज्यादातर ऐसी घटनाओं से असंपृक्त ही रहता है. यहाँ तक कि एक संगठन ने एक कॉलेज में इस विषय पर सेमीनार करने की इच्छा प्रगट की तो कॉलेज की प्रिंसिपल ने यह कह कर मना कर दिया कि एसिड विक्टिम का चेहरा देखकर छात्राएं डर जायेंगी .
फिर भी कई लोग, अपनी आत्मा की आवाज़ सुन ,इन पीड़ितों के लिए काम कर रहे हैं .पाकिस्तान की एक महिला जो ब्यूटीपार्लर चलाती है , अपने पार्लर में एसिड अटैक से पीड़ित लड़कियों/महिलाओं को ट्रेन करती है और उन्हें काम देती है. लन्दन में कार्यरत एक पाकिस्तानी डॉक्टर जावेद नियमित रूप से पाकिस्तान आते हैं और एसिड विक्टिम का फ्री में इलाज करते हैं .
हमारे देश में भी कई संगठन प्रतिरोध जता रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं .कि एसिड अटैक विक्टिम को न्याय दिलाने के लिए अलग से कानून बनाए जाएँ . अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान हो , उन्हें बेल न मिले . एसिड अटैक पीड़ित के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाये और उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था करे.
पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता आलोक दीक्षित एवं प्रसिद्ध कहानीकार मनीषा कुलश्रेष्ठ के सौजन्य से 8 मार्च 2013 को दिल्ली में हिंदी भवन में 12 बजे से 4 बजे के बीच एक सेमीनार आयोजित किया जा रहा है .
इन पीड़ितों को न्याय दिलाने उनके इलाज उनके पुनर्वास के प्रयास पर विमर्श किया जायेग. अगर आप दिल्ली में हैं तो मेरी गुजारिश है वहां जरूर जाएँ और अपना योगदान दें .
एसिड अटैक पीड़ितों के विषय में ज्यादा जानकारियों के लिये इस पेज से जुड़ सकते हैं
युवा भी अपनी तरफ से विरोध प्रगट कर रहे हैं, इस जघन्य अपराध की तरफ लोगो का ध्यान आकर्षित करने के लिए 11 जनवरी 2013 को दिल्ली यूनिवर्सिटी के 70 छात्र-छात्राओं ने मिलकर 7 मिनट के लिए freeze mob अभियान का आयोजन किया









