बेटा अति उत्साहित स्वर में "पता है माँ, आज क्या हुआ ?"
माँ --"कुछ बहुत इम्पोर्टेंट बात है ? "
बेटे के स्वर में थोड़े से उत्साह की कमी -- "नहीं इम्पोर्टेंट तो नहीं, इंटरेस्टिंग है "
"अभी टी वी पर कितना हीटेड डिस्कशन चल रहा है, ब्रेक में बात करें ?"
"हाँ ठीक है " बेटा भी टी वी पर नज़रें गड़ा देता है .
ब्रेक में माँ को किचन का कोई काम ध्यान आ जाता है और वो उठ कर चली जाती है।
प्रोग्राम ख़त्म होने पर बेटा थोड़े से शंका भरे स्वर में पूछता है ," अब सुनोगी ?"
"हाँ किचन में चलें, खाना लगाने की तैयारी करते हुए बता देना "
"ओके" कहते बेटा किचन में आकर पुनः उत्साह में बात शुरू करता है ," आज एक फ्रेंड के साथ एक छोटे से रेस्टोरेंट में गया था , हमारी बगल वाली टेबल पर एक आदमी अकेला बैठा था . तभी छह लोगो का एक बड़ा सा ग्रुप आया रेस्टोरेंट वालो ने हमसे रिक्वेस्ट किया कि उन अकेले बैठे आदमी की टेबल पर चले जाएँ। इनके लिए टेबल खाली कर दें .हमें अच्छा नहीं लगा, फिर भी हम चले गए। वहां बैठे उस आदमी से इंट्रो हुआ, उसने बताया वो अमुक कंपनी ( एक मल्टी नेशनल ) में काम करता है। बहुत फ्रेंडली था, थोड़ी देर बातें की फिर वो अपनी सैंडविच ख़त्म कर चला गया। थोड़ी देर बाद हमने भी अपना सूप ख़त्म किया और जब वेटर से बिल लाने को कहा तो वेटर ने बोला "आप दोनों का बिल तो उस व्यक्ति ने चुका दिया है . हमें बड़ा अजीब लगा फिर हम भागते हुए होटल से बाहर आये तो देखा वो अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट करके जा रहा था . हमने उनसे थैंक्स कहा और ये भी कहा, 'ऐसा क्यूँ किया आपने ?'
वे हँसते हुए कहने लगे ,"कोई बात नहीं मैं अक्सर यहाँ आता हूँ अगली बार आप हमारा बिल दे देना, हम मिलते रहेंगे ." उसने फिर से गर्मजोशी से हाथ मिलाया और चला गया . तुरंत मैंने और मेरे फ्रेंड ने उसका नाम गूगल किया तो पता चला वो तो बिग शॉट है। अपने डिपार्टमेंट का हेड है "
अब एक बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनी के एक डिपार्टमेंट के हेड ने एक स्टूडेंट से इतनी आत्मीयता से बात की , बेटा इस बात से रोमांचित था। पर माँ उसके रोमांच पर ठंढा पानी डालने के लिए ग्लास ही नहीं पूरा जग लिए बैठी थी।
"तुम्हे कैसे पता वह आदमी सच बोल रहा है , कहीं उसने अपने डिपार्टमेंट के हेड का नाम ले लिया होगा "
" माँ , नेट पर उसके प्रोफाइल के साथ उसकी तस्वीर भी थी, ये वही आदमी था " बेटा जोर देकर कहता है .
"तो फिर वह बाइक पर क्यूँ सवार था ,उसे तो किसी फैंसी कार में होना चाहिए था ?"
"वो फैंसी बाइक ही थी, पता है वो बाइक कितने की आती है? पंद्रह लाख की "
माँ ने खुद को घिरता हुआ पाकर दूसरा पॉइंट ढूंढ लिया "वो इतने छोटे रेस्टोरेंट में क्यूँ आया था ?"
"इस रेस्टोरेंट का चिकन सूप और सैंडविच बहुत मशहूर है, दूर दूर से लोग आते हैं, हो सकता है वो अपने स्टूडेंट डेज़ से यहाँ आता हो ,पता है कितने बड़े बड़े लोग कैसी कैसी जगहों पर अपने टेस्ट का खाने के लिए जाते हैं? पढ़ा था मैंने मुकेश अम्बानी, सलमान खान वगैरह कहाँ जाते हैं ,पर जाने दो नहीं बताऊंगा वरना फिर कुछ सवाल शुरू हो जाएगा। कुछ कहना ही बेकार है " और बेटा मुहं फुला कर चला गया।
अब वो माँ इस रूठे बेटे को कैसे मनाये :):)
{अब पढ़कर ये मत कहियेगा कि रश्मि रविजा तो कुछ भी लिखती है . PD का कहना है, मेरा ब्लॉग है, मैं उसमे बस इतना लिखुं "आज मैंने एक ग्लास पानी पिया " तो :):) }