Friday, June 11, 2021

जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं, पुष्पा भारती जी

 


जिसका भी हिंदी साहित्य से बचपन या किशोर वय में नाता जुड़ा ,उसके लिए उस उम्र में 'गुनाहों का देवता' पढ़ना पहले प्यार में भीगने की मानिंद रहा। 'धर्मयुग' के माध्यम से भी धर्मवीर भारती और पुष्पा भारती जी बहुत आत्मीय से लगते थे।

जब मैं कई वर्षों बाद पुनः साहित्य की दुनिया से जुड़ी और मुंबई में हर महीने होने वाले साहित्यिक आयोजन 'चौपाल' में पुष्पा भारती जी से मिली तो उन्हें निर्निमेष निहारती रह गई। अस्सी वर्षीया पुष्पा जी ने बहुत सुंदर सा आधुनिक डिज़ाइन वाला सलवार कुर्ता पहन रखा था।उनके लंबे नाखूनों पर चमकती हुई नेलपॉलिश लगी हुई थी। घुंघराले बाल गुंथी चोटी से छिटक चेहरे पर छा गए थे। होठों पर उन्मुक्त हंसी थी और आवाज में खनक। उन्होंने चौपाल में बड़े रोचक अंदाज में निराला से जुड़ा अपना संस्मरण सुनाया था और कनुप्रिया से कविता पढ़ी थी। उनकी खनकदार आवाज में उम्र का कोई स्पर्श नहीं था।

पुष्पा भारती का जन्म 11 जून 1935 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुआ था।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए. पुष्पा जी ने कुछ समय तक कोलकाता में अध्यापन भी किया।
धर्मवीर भारती से विवाह के बाद मुंबई आईं और मुक्ताराजे के छद्म नाम से लेखन की शुरुआत की।
पुष्पा भारती ने विश्व प्रसिद्ध लेखकों और कलाकारों के निजी प्रेम प्रसंगों पर आधारित उनकी निजी प्रेम गाथाएं लिखीं। वेंकटरामन, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर समेत तमाम विशिष्ट व्यक्तियों के साक्षात्कार लिए।
राजस्थान शिक्षा विभाग के आग्रह पर 'एक दुनिया बच्चों की' का संपादन किया। लंबे समय तक बाच चित्र निर्माण संस्था (सीएफएसआई) से जुड़ी रहीं।उनकी अनेक किताबें छप चुकी हैं।

पुष्पा जी स्वभाव से भी बहुत बेबाक हैं।चौपाल में ही ग़ज़ल गायक राजकुमार रिज़वी उनसे मिलने आये।मैं पुष्पा जी के पास ही बैठी हुई थी। उन्होंने रिज़वी साहब को नहीं पहचाना।परिचय देने पर हठात बोलीं, "अरे! आप तो कितने हैंडसम हुआ करते थे।" 🙂 रिज़वी साहब झेंप गए।अब उनके बाल चले गए थे पर फिर पुष्पा जी ने देर तक उनसे आत्मीय बातचीत की और उन दिनों को याद किया जब भारती जी के सान्निध्य में उनके घर की महफिलों में राजकुमार रिज़वी गज़लें गाया करते थे।
बाद के दिनों में पुष्पा जी से कई आयोजनों में मिली और एक बार उनके घर जाने का मौका भी मिला। धर्मवीर भारती जी का घर तो किसी हिंदी वाले के लिए तीर्थ समान ही है। पुष्पा जी एक लंबा सा सुंदर कुर्ता और पलाज़ो पहने, हमारे इंतज़ार में ही थी। घर की साज सज्जा इतनी खूबसूरत और व्यवस्थित थी कि यकीन करना मुश्किल था,पुष्पा जी अकेली रहती हैं।किताबों से सजी आलमारी के साथ, जगह जगह गुलदस्ते और छोटे छोटे प्लांट्स रखे हुए थे। दीवारों पर भारती जी और पुष्पा जी की आत्मीय तस्वीरें थीं। पुष्पा जी का एक नाती उनके साथ रहता है।उस वक्त वह जेट एयरवेज में था और अक्सर घर से बाहर ही रहता था। नाती ने हमलोगों को नमस्ते कहा और हमलोगों के लिए ट्रे में रख, ग्लास में पानी लेकर आया। फिर घर से जाते वक्त भी हमलोगों को बाय कहकर गया,जिसकी आवश्यकता नहीं थी पर यह पुष्पा जी के दिए संस्कार थे।वरना मुम्बई में पले-बढ़े एक आधुनिक युवा से कोई ऐसी अपेक्षा भी नहीं रखता ।

हमारे पूछने पर कि आपको कुछ अकेलापन लगता होगा। उन्होंने कहा, "कैसा अकेलापन ? मैं तो पूरे समय भारती जी की उपस्थिति महसूस करती हूँ। उनसे बातें करती रहती हूँ। मुझे वे अपने आस-पास ही दिखते हैं।" उन्होंने भारती जी से जुड़े कई संस्मरण सुनाए पर उनकी अनुमति के बिना यहाँ लिखना उचित न होगा।
पुष्पा जी ने हमारे लिए नाश्ता मंगा कर रखा था और वे चाय बनाने के लिए किचन की तरफ मुड़ीं। उन्होंने पार्ट टाइम हेल्पर ही रखी है।बाकी समय वे खुद मैनेज करती हैं। (इसी वजह से इतना व्यवस्थित घर देख मैं हैरान थी। हर चीज़ अपने जगह-ठिकाने पर थी )।मैं उन्हें चाय कैसे बनाने देती ? पुष्पा जी ने चाय-चीनी-दूध की जगह बताई,सुंदर कप प्लेट निकाल कर दिए।मैं चाय बनाते हुए एक पुलक से भर रही थी। आठवीं में पढ़ी, जिनकी लिखी चंदर-सुधा की कथा से ही प्रेम की अनिभूति, पीड़ा,विछोह से परिचय हुआ था।आज उन्ही रचयिता के किचन में खड़ी थी। उनके कमरे-गलियारे-स्टडी में घूमते हुए अहसास हो रहा था,भारती जी भी इसी फर्श पर चलते होंगे,इसी कुर्सी पर बैठते होंगे। मानो हमें उनकी पदचाप सुनाई दे रही हो ।
पुष्पा जी की अनुमति से दीवार पर लगी कुछ तस्वीरों की तस्वीर ली। हमें बातचीत करते चार घण्टे गुजर गए थे।घर भी वापस लौटना था और पुष्पा जी थक न गईं हों,ये चिंता भी हो रही थी। पर पुष्पा जी ने कहा,' वे चार घण्टे और बात कर सकती हैं।बिल्कुल तरोताजा महसूस कर रहीं हैं।'❤️
पुष्पा भारती जी यूँ ही तरोताजा बनी रहें,उनकी उन्मुक्त हंसी और दमदार आवाज़ कायम रहे।पुष्पा जी को जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं !!💐💐















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