गुरुवार, 10 अक्तूबर 2013

लेखा-जोखा चार बरस का

कई ब्लॉग्स पर साइड बार में लेबल लगा देखती हूँ , अच्छा लगता है देख, सारा लेखा-जोखा रहता है  वहां, किस विषय पर कितना लिखा गया . उन पोस्ट्स तक पहुंचना भी आसान  .जब भी नज़र पड़ती है ,  सोचती हूँ , 'हां ! मुझे भी ऐसा करना है ' पर मुझे लिखने के सिवा सारे काम सरदर्द लगते हैं . या कहूँ, परम आलसी हूँ इन सबमे , कई बार मित्रों ने कोई कहानी पढ़ कर कहा है , "इसे फलां पत्रिका में भेज दीजिये ." और मैंने उस वक्त तो हामी भर दी ...पर फिर टलता ही गया .उस वक़्त मुझे pdf file बनानी  भी नहीं आती थी, एक बार एक  कवि मित्र ने अपनी सदाशयता दिखाते हुए उस कहानी  की pdf file बना कर भी भेज दी ,उस प्रतिष्ठित पत्रिका की इमेल आई डी के साथ ..पर हमारा कल भेजने का प्लान कभी आज में तब्दील नहीं हो पाया .( अभी बच्चे होते तो इस बात के लिए कितनी डांट सुन जाते और मैं जैसे शान से बता रही हूँ ,नहीं...बता नहीं रही  ये बस loud thinking ...जैसा है :). पहले ही स्वीकार चुकी हूँ, ब्लॉग्स पर लिख लिख कर सोचती हूँ  ) . वजह, बस वही बुरी आदत.... सब कुछ समेटने के चक्कर में कुछ न कुछ या शायद बहुत कुछ तो फिसल ही जाता है , हाथों से :(

खैर आज का दिन तो उदासी का नहीं , क्यूंकि पिछले 21 सितम्बर को , ब्लॉगजगत में प्रवेश किये मुझे चार साल हो गए. और ये भूमिका इस लिए लिखी कि लेबल लगाने में तो थोडा वक़्त लगेगा (अगर मैं उस कार्य की शुरुआत करूँ ) .पर तीव्र इच्छा थी कि इन चार सालों में क्या क्या लिख डाला है, ज़रा एक बार बही खाता उलट-पुलट तो लूँ .और ये इतनी  मेहनत वाला काम कर ही डाला (ढेर सारे ब्रेक लेकर ) . देखकर आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी भी हुई और थोडा संतोष भी ...चाहे और काम में किये हों पर कागज़ काले करने में कोई कोताही नहीं की .

 

कहानी - 10
उपन्यासिका या लम्बी कहानी - 9 (17,14,14,4,3,2,2,2 ) किस्तों वाली .
कविता -9
सामजिक आलेख - 63
संस्मरण -- 86
स्त्री सम्बन्धी आलेख -31
बच्चों सम्बन्धी आलेख -- 15
खेल सम्बन्धी -- 11
फिल्म सम्बन्धी -- 21
 

इन सबके अलावा, कुछ व्यंग्य ,अखबारों में पढ़ी किसी खबर से सम्बंधित पोस्ट्स , परिचर्चाएं, अतिथि पोस्ट , नाटक और किताबो से सम्बंधित पोस्ट, ..इत्यादि हैं.

पर साथ में यह भी सच है कि हर वर्ष पोस्ट्स की संख्या कम होती जा रही है . (यहाँ हम यह कह कर निकल सकते हैं कि अब लिखने में quality  आ गयी है, इसलिए  quantity पर असर पड़ा है. जबकि सच ये है कि हम सुधरने वालों में से नहीं हैं, जैसी पहली दूसरी तीसरी लिखी थी, आज चार सौ पोस्ट लिखने के बाद भी ,कुछ बदलाव नहीं आया (ऐसा हम नहीं ज़माना कहता है.. ज़माना अर्थात हमारे पाठक. अब हमारे लिए तो वही ज़माना यानि हमारे संसार हैं ) .


अब चार सौ पोस्ट से याद आया ,पिछले साल तीसरी सालगिरह वाली पोस्ट लिखी थी तो  राजन और अविनाश चन्द्र   ने ध्यान दिलाया  कि तीन साल में तीन सौ से ऊपर पोस्ट लिख ली यानि हर साल, एक सेंचुरी . इस बार तो अपेक्षाकृत कम लिखा है, इसलिए सेंचुरी की उम्मीद तो नहीं थी . पर 'मन का पाखी' के 116 पोस्ट्स और इस ब्लॉग के  286  मिलकर 400 का आंकडा पार कर ही गए.. वो अलग बात है कि कुछ एक्स्ट्रा रन तो ओवरथ्रो की वजह से मिले हैं. यानि अब कहानी  दोनों ब्लॉग पर पोस्ट करना शुरू कर दिया है .पर हम तो स्कोर बोर्ड यानी डैशबोर्ड जो दिखाएगा ,वही देख ,खुश  होने वाले हैं (आज के जमाने में खुश होने का मौक़ा इतना कम जो मिलता है, जहां मौक़ा मिले, झट  से खुश हो लिया जाए :)}


अब ब्लॉगजगत के विषय में सबका कहना है कि लोग अब कम लिख रहे हैं , फेसबुक पर ज्यादा सक्रिय  हो गए हैं. इसमें कोई शक नहीं कि रौनक कुछ कम तो हुई है , पर वैसा ही जैसे किसी महल्ले के पुराने लोग महल्ला छोड़ कहीं और बसेरा बना लेते हैं, कभी-कभी अपने पुराने महल्ले में भी झाँक लेते हैं .पर उसी महल्ले में नए लोग आयेंगे, उनकी लेखनी से गुलज़ार होगी वह जगह.


एक बार बोधिसत्व जी के यहाँ, युनुस खान, प्रमोद सिंह, अनिल जन्मेजय, जैसे हमसे काफी पहले के ब्लॉगर्स इकट्ठे हुए थे. वे लोग चर्चा कर रहे थे ,'अब ब्लॉगजगत में वो मजा नहीं आता, सारे पुराने लोग चले गए ' जबकि मेरे लिए उस वक़्त ब्लॉगजगत में काफी हलचल रहती थी. और जिनलोगो का जिक्र वे लोग कर रहे थे, उन्हें तो हमने पढ़ा भी नहीं था .


फेसबुक पर सक्रिय तो मैं भी हूँ, पर फेसबुक किसी घटना ,किसी विषय का जिक्र करने,फोटो शेयर करने  तक ही सीमित है. घटना का विश्लेषण तो ब्लॉग पर ही किया जा सकता है. और मुझ जैसे लोगों को जिन्हें लम्बी पोस्ट लिखने की आदत है ,ब्लॉगजगत का ही सहारा है . हाँ, टिप्पणियों पर फर्क पड़ा है पर यहाँ हमें चुप ही रहना चाहिए. मैं खुद ही ज्यादा ब्लॉग्स नहीं पढ़ पाती और टिप्पणियाँ भी नहीं कर पाती . सॉरी दोस्तों :(


दोस्तों से ध्यान आया , कुछ बड़े  अच्छे दोस्त दिए हैं ब्लॉगजगत ने . कुछ तो मुझसे आधी उम्र के हैं, मेरे बच्चों से कुछ ही साल बड़े . पर बड़ी गंभीरता से मेरा लिखा पढ़ते हैं और अपनी बेबाक राय भी देते हैं. अब ब्लॉग के जरिये ही वे दोस्त बने वरना इन उम्र वालों से मेरा परिचय बस "हलो आंटी...हाउ आर यू ' से ज्यादा नहीं  होता . उनसे विमर्श , उनकी दुनिया में झाँकने  का अवसर भी प्रदान करता  है, जो मेरे लेखन को समृद्ध ही करता है.  और कई बार लोग मेरे ब्लॉग  का परिचय यह कह कर भी देते हैं , "युवा मानसिकता वाले इस ब्लॉग को ज्यादा पसंद करते हैं " .अब यह बात जिस भी अर्थ में कही जाती हो, हम तो इसे कॉम्प्लीमेंट की तरह लेते हैं. :)

कुछ ऐसे भी  पाठक हैं जो पिछले चार साल से मुझे लगातार बहुत ध्यान से पढ़ रहे हैं {कुछ तो पहली पोस्ट से ,उनके धैर्य को सलाम :)}...और अपने विचार भी रख रहे हैं . बड़ा वाला थैंक्यू आप सबका.

उन सबका भी बहुत बहुत शुक्रिया  जो मेरे ब्लॉग पे आते रहे, जाते रहे..कभी कभी आते रहे.. नहीं भी आते रहे :)....सफ़र तो चलता रहेगा भले ही लिखने की रफ़्तार धीमी  हो जाए, अगले साल सेंचुरी न बने पर की बोर्ड का साथ तो नहीं छूटने वाला ....अब खुद ही कह देते हैं...आमीन !!
:)
 
(ब्लॉग की पहली , दूसरी , तीसरी  सालगिरह पर भी बाकायदा पोस्ट लिख रखी है )

54 टिप्‍पणियां:

  1. बधाई ...आपके ब्लॉग को नियमित पढ़ रहे हैं, यूँ ही अपने विचार हम सबके साथ बाँटती रहें , शुभकामनायें

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    1. आप नियमित पढ़ रही हैं तभी तो हमें नियमित लिखने की प्रेरणा मिल रही है .
      शुक्रिया मोनिका

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार - 11/10/2013 को माँ तुम हमेशा याद आती हो .... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः33 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  3. जय हो ... :)

    यह सफर यूं ही चलता रहे यही दुआ है !

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  4. आपकी कहानी मन की पाखी बीच से पढ़नी प्रारम्भ की थी, पूरी पढ़ नहीं पाये है। ४ वर्ष की बहुत बहुत बधाई।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया प्रवीण जी ,
      'मन का पाखी' मेरे ब्लॉग का नाम है, जहां सिर्फ कहानियां पोस्ट करती हूँ . आप शायद "आयम स्टिल वेटिंग फॉर यू ,शची " की बता कर रहे हैं. आपने कहा था कि "पूरी नहीं पढ़ पाया हूँ, उसकी pdf file भेज दें ,पढ़कर समीक्षा लिखना चाहता हूँ "..अब याद नहीं मैंने भेजी या नहीं वैसे ब्लॉग पर तो है ही ...पर समझ सकती हूँ ,दिन के चौबीस घंटे में क्या क्या करे कोई...कुछ छूट ही जाता है .

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  5. खूब खूब बधाईयाँ। … बस ऐसे ही लिखती रहो और हम पढ़ते रहें। ।

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  6. बधाई हो रश्मि....................
    आपका लेखन बेहद प्राभावशाली और रोचक होता है.....
    और हर तरह का आप लिखती हैं...आंकड़े बता रहे हैं....सो डबल बधाई....
    ढेर सारी शुभकामनाएं रचनात्मक भविष्य के लिए.
    नाम ले ले कर दोस्तों का शुक्रिया करती तो उम्मीद है कि हमारा ज़िक्र भी होता :-)

    सस्नेह
    अनु

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    1. नाम, अब ले लेते हैं उसमे क्या :) बल्कि दो दो बार ले लेते हैं .
      बहुत बहुत शुक्रिया अनु ...अ बिग थैंक्यू अनुलता :)
      इतने भारी भरकम शब्द मेरे सादा से लेखन के लिए...हम्म...सोचना पड़ेगा

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    2. :-) सोचो मत..............वरना लेखों की क्वालिटी बिगड़ जायेगी !!!!
      you rock!!!!

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    3. हा हा तुमने सही पकड़ा ...बिना सोचे लिखना ही सही है..वरना सोच कर क्वालिटी बिगड़ने का ख़तरा कौन मोल ले...बचा लिया बहन ..वरना हम तो बस सोचने ही वाले थे :)

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  7. नियमित लेखन की बधाई एवं शुभकामनायें ।

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  8. बधाई रश्मि ,
    कहानियाँ नहीं पढ़ पाता हूँ , लेख अधिकतर पढता रहा हूँ , आप अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब हैं . .
    शुभकामनायें !

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    1. शुक्रिया सतीश जी,
      हम तो बस लिख जाते हैं वो तो आपके जैसे पाठक..रचनाओं में यह सब देख लेते हैं.

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  9. जिन्दाबाद...बधाई...आपकी लेखनी के तो हम शुरु से कायल हैं..लिखते रहें. शुभकामनाएँ. :)

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  10. एक किताब भी आपकी बननी थी...उस परियोजना का क्या हुआ?

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    1. जब 'परियोजना ' शब्द आ जाएगा तो फिर क्या होना है...काम कर रही हूँ उस किताब पर (कछुए की रफ़्तार से ):(

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  11. कुछ बंदे अपनी ही लिखा पढ़ी के चार्टेड अकाउंटेंट बने फिरते हैं , लगता है उनकी लत आपको भी लग गई ? हम मानते हैं कि आप अच्छा लिखती हैं सो दुआयें ये कि लिखिये अनगिनत / असीमित और आपको इतनी सी भी फुरसत ना मिले कि आप अपना लिखा खुद गिन सकें ! शुभ दिवस !

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    1. उन बन्दों का तो पता नहीं , आजकल ज्यादा ब्लॉग नहीं पढ़ पाती, इसलिए पता नहीं और लोगों ने भी ये गिनती का काम किया हो तो....पर मेरा मन था ,ये देखने का ...और जो बात मन में हो उसे तो ब्लॉग पर बिखरना ही है .

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    2. और इतने दिनों बाद अपने ब्लॉग पर आपकी आमद भली लगी...विशेष शुक्रिया :)

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  12. बहुत मुबारक हो …
    अक्सर सहमत , कभी असहमत होते हुए भी तुम्हे पढना अच्छा लगता है।

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    1. हूं ... बड़ा दुलार छलक रहा है दोनों सखियों के दरम्यान :)

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    2. शुक्रिया वाणी
      ये असहमति लेखन में हमेशा सहायक ही होती है ...इस से कभी परहेज मत करना .

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    3. नज़र मत लगाइए ,अली जी
      अपनों की नज़र जल्दी लगती है :)

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    4. ना ना ! हमारी तरफ से दुआयें / शुभेच्छायें ही जानिये :)

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  13. नियमित लेखन की बधाई एवं शुभकामनाएँ .
    नई पोस्ट : मंदारं शिखरं दृष्ट्वा
    नई पोस्ट : प्रिय प्रवासी बिसरा गया
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ .

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  14. समय निकालिए कभी दुसरे ब्लॉग का भी सैर कर लीजिये | नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं |
    लेटेस्ट पोस्ट नव दुर्गा

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  15. खुशी हुई। ये साहित्यिक सफर यूं ही जारी रहे!

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  16. बहुत बढिया जी बहुत ही बढिया । ये सफ़र चार से चालीस सालों तक और उसके बाद तक भी यूं ही अनवरत चलता रहे । बहुत बहुत शुभकामनाएं आपको

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    1. अजय जी कुछ ज्यादा नहीं हो गया :)
      बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  17. कभी कभी आते रहे...


    मेरी गि‍नती इन्‍हें में है

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    1. कोई नहीं..कभी कभी ही सही...आते तो रहे .:)
      शुक्रिया काजल जी

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  18. पिछले काफी समय से आपको नियमित पढता हूं ... ओर आपकी लेकनि का कायल भी हूं ...
    आपकी उपलब्धियों पे बधाई ... ४ साल पूरे होने पे बधाई ...

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    1. आप नियमित पाठकों में से हैं दिगंबर जी ..और अपने विचार भी जरूर रखते हैं...विशेष शुक्रिया आपका .

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  19. संयोगवश, फ़ेसबुक पर "व्यक्ति जिन्हे आप जान सकते हैं" मे आपकी तस्वीर देखी, प्र्फ़िले देखें का कौतूहल हुआ, बस देखते रहे बहुत देर तक। दो बचपन की सहेलियों के बड़े हो गए बच्चों की पोस्ट, अमिताभ बच्चन रेखा से संबन्धित पोस्ट, मेरे छोटे सुपुत्र उवाच ,"सोने का भी कहीं कोई टाइम होता है ? बेटे अपूर्व के रक्तदान से संबन्धित, बस यहाँ आने से नहाई रोक पाये, पूरा आलेख पढ़ा यहाँ, आपकी लेखन शैली मन को भा गयी, लिंक save कर लिया है, कहानियाँ पढ़ने का शौक है, जरूर पढ़ूँगी, जब जब फुर्सत मिलेगी।

    बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें,

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  20. रश्मि जी सबसे पहले तो एक और शतक के लिए बधाई।साथ ही गूगल को भी धन्यवाद क्योंकि हम सभी का आपस में परिचय तो वही करवा रहा है।एक साल का तो पता ही नहीं चला कब बीत गया ।खैर जहाँ तक बात लेखा जोखा देखने की तो ये काम आप चाहे करें न करें पर पाठक हमेशा करते रहते हैं।मुझे बहुत बाद में पता चला कि आप कहानियों के अलावा भी इतना कुछ लिखती हैं।और ये तो बहुत ही बाद में पता चला कि आपने फिल्मों पर भी इतना कुछ लिखा है जो कि मुझे बहुत पसंद है।पता नहीं क्यों हिंदी में इस विषय पर बहुत कम लिखा जाता है।पर जो भी हो जहाँ लेखन पर जबरदस्ती बोद्धिक लबादा ओढाने की कोशिश न की गई हो वह मुझ जैसे पाठक को आकर्षित करता है।वहाँ खुद को भी कुछ कह पाने से रोकना बहुत मुश्किल होता है।कई दिन हुए जब आपकी पोस्ट पर एक फिल्म समीक्षा पढ रहा था जिसमें कश्मीर के हालातों का जिक्र था।ब्लॉगिंग तभी तो अच्छा माध्यम है कभी का भी लिखा पाठक कभी भी पढ सकता है और उस पर अपनी राय भी दे सकता है।मेरा भी मन किया टिप्पणी करने को पर लगा उस पोस्ट पर एक पाठक वह बात कह चुके हैं।
    बहरहाल भविष्य के लिए आपको हार्दिक शुभकामनाएँ !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया राजन .
      आप जैसे पाठक किसी भी ब्लॉग के लिए indispensable हैं ...अब और क्या कहूँ .
      बस पढ़ते रहिये तो हम भी लिखते रहेंगे .

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  21. चार साल नियमित लिखते रहने के लिये बधाई! शुभकामनायें।

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  22. बाप रे ! चार साल बीत गए ?
    ऐसा लगता है जैसे अभी चार हफ्ते ही हुए हैं.। ख़ैर तुम्हारे लेखन की अब मैं क्या तारीफ़ करूँ सब तो कर ही चुके हैं, फिर भी इतना ज़रूर कहूँगी समीक्षा हो या कहानी या फिर उपन्यासिका, मुक्त होकर बिंदास लिखती हो और वो शानदार हो जाता है.। बस ऐसे ही लिखती रहो हम गाहे-ब-गाहे पढ़ते रहेंगे (जब जब भी फुर्सत मिलेगी, तुझे तो पता ही है मेरे दिन-रात का लेखा-जोखा ) :):)

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    1. बिलकुल पता है ,अदा...तुम्हारे दिन रात का लेखा-जोखा... तुम्हारा एक पैर कनाडा में , दूसरा रांची में तो तीसरा...अरे तीसरा पैर तो होता ही नहीं :P...फिर से अगला पैर भुवनेश्वर में रहता है...इस पर भी समय निकालकर हमारी पोस्ट पढ़ लेती हो, कैसे शुक्रिया अदा करें अदा का :)

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  23. वाह... बधाई... आप तो सचिन की तरह शतक दर शतक जड़े जा रहे हो....
    यह बात सही है रश्मि जी कि विस्तार से लिखने के लिए ब्लॉग ही अच्छा प्लेटफार्म है... फेसबुक तो जैसा अपने बताया उसके लिए ही ज्यादा मुफ़ीद है.

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    1. शुक्रिया लोकेन्द्र जी,
      ना.. सचिन तो अकेले हैं...यहाँ बहुत सारे लोगों ने शतक जड़ रखे होंगे..:)

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  24. टिप्‍पणियां, दुहरा कर पढ़ा, आनंददायक.

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