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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

मिस्र की क्रांति की आग को क्या 'आसमा महफूज़' के वीडियो ने चिंगारी दिखाई??

आज सारी दुनिया की नज़रें मिस्र में चल रहे आन्दोलन पर लगी हुई है. टी.वी. हो या अखबार, वहाँ के पल-पल बदलते हालात की खबर को प्रमुखता से स्थान दे रहे हैं. ऐसे में 'मुंबई मिरर' में छपी एक अलग सी खबर ने ध्यान खींचा. 'आसमा  महफूज़ ' के विषय में छपी इस खबर ने चौंकाया भी, अभिभूत भी किया..और गौरवान्वित भी. कि 'जहाँ चाह वहाँ  राह'...'मजबूत इरादे, आंधी का रुख भी बदल  सकते हैं'..जैसी उक्तियाँ सिर्फ उक्तियाँ नहीं हैं...कवि दुष्यंत ने यूँ ही नहीं कह दिया...
."कौन  कहता है आसमान में सूराख नहीं हो सकता,
 एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो"

जरूरत सिर्फ एक पत्थर उछालने के दृढ संकल्प  की है...


मिस्र में जनाक्रोश की जड़ें बहुत गहरी है और इसके अनेक कारण है जिसे
अशोक कुमार पाण्डेय  ने जनपक्ष पर विस्तार से लिखा है.

पर लोगो के मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि..इस  क्रान्ति की आग को क्या छब्बीस वर्षीय
'आसमा महफूज'  के इस वीडियो ने चिंगारी दिखाई. आसमा महफूज़ ने 6 अप्रैल 2010 को सामान विचार के साथियों के साथ मिलकर ,'हुस्नी  मुबारक' के शासन के विरुद्ध एक मुहिम चलाई और "यूथ मूवमेंट' की स्थापना की . 18 जनवरी 2011 को उन्होंने बिलकुल जैसे ह्रदय के अंतरतम कोने से एक बहुत ही ओजस्वी अपील,अपने देशवासियों से की और उसे रेकॉर्ड करके  इंटरनेट पर अपलोड कर दिया.

उन्होंने इस वीडियो में कहा.है....." चार मिस्रवासियों ने आत्मदाह किया...इस आशा में कि शायद ट्यूनीशिया  की तरह उनके देश में भी क्रान्ति आए और उन्हें...स्वतंत्रता, न्याय और इज्ज़त की ज़िन्दगी मिले. आज उनमे से एक की  मृत्यु हो गयी. और लोगो की प्रतिक्रिया है कि, "अल्लाह  उन्हें इस पाप के लिए माफ़ करे...उसने व्यर्थ ही आत्महत्या की"

क्या लोगो में जरा भी संवेदना नहीं बची है...मैने नेट पर  लिख कर पोस्ट कर दिया ," मैं एक लड़की हूँ. और मैं आज 'तहरीर स्क्वायर' पर जाकर एक बैनर लेकर अकेली खड़ी रहूंगी . तब शायद लोगो की संवेदना जागे.

मैने अपना फोन नंबर भी लिख दिया था कि शायद लोग मुझसे कॉन्टैक्ट करें और साथ देने आएँ. पर केवल तीन लोग आए और तीन गाड़ियों में पुलिस भर कर आई. कुछ किराए के मवाली भी हमें डराने आए. वे पुलिस  ऑफिसर्स हमें समझाने लगे, कि जिन लोगो ने आत्मदाह कि वे लोग मनोरोगी थे."

नेशनल मिडिया के लिए तो जो भी विरोध करे वो मनोरोगी है.पर अगर वे मनोरोगी थे तो पार्लियामेंट बिल्डिंग में क्यूँ आत्मदाह किया.??

मैं ये वीडियो सिर्फ एक सिंपल मैसेज देने के लिए बना रही हूँ कि हमलोग २५ जनवरी को तहरीर स्क्वायर जाएंगे और अपना विरोध दर्ज करेंगे. हमलोग अपने मौलिक अधिकार की मांग करेंगे . राजनितिक अधिकार  नहीं सिर्फ, मानवीय अधिकारों की. ये सरकार...राष्ट्रपति...सुरक्षा बल... सब भ्रष्टाचारी हैं.

जिनलोगो ने आत्मदाह किए वे मृत्यु से नहीं  डरते थे बल्कि अपनी सुरक्षा बल से डरते थे. क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं? क्या आप भी सुरक्षा बल  से डरते हैं? क्या आप भी आत्मदाह  करेंगे? या फिर आपको पता ही नहीं कि आप क्या करें.

मैं अकेली २५ जनवरी को 'तहरीर स्क्वायर' जा रही हूँ और गली-गली में पर्चे बाटूंगी. मैं आत्मदाह नहीं करुँगी.अगर सिक्युरिटी फ़ोर्स मुझे जलाना चाहे बेशक जलाए .लेकिन मैं चुप नहीं बैठूंगी.अगर आप एक सच्चे मर्द हैं तो मेरे साथ आइये.

कौन कहता है,औरतो को आगे नहीं बढ़ना चाहिए, क्यूँकि  उनकी पिटाई हो सकती है और ये शर्म की बात है...अगर ऐसा है  तो उन्हें शर्म आनी चाहिए जो पिटाई करें. अगर आप में खुद के लिए थोड़ी भी इज्जत और मर्दानगी है तो  मेरे साथ आइये.

लोग कहते हैं, मुट्ठी भर लोग क्या कर लेंगे? जो भी ये कहता है , मैं कहती हूँ..हम मुट्ठीभर हैं  हैं..आपकी वजह से. क्यूंकि आप हमारे साथ नहीं. आप  भी राष्ट्रपति और सुरक्षा सैनिक की तरह ही राष्ट्रद्रोही है. जो सड़कों पर अपने ही देश के नागरिको को पीटते हैं. आपके आने से फर्क पड़ेगा. हमारे साथ आइये.

अपने पड़ोसी, दोस्त, सहकर्मियों,सब से बात कीजिए और उन्हें अपने साथ आने के लिए तैयार कीजिए. उन्हें तहरीर स्क्वायर आने की जरूरत नहीं है. वे कहीं भी जा सकते हैं और 'हम आज़ाद हैं' के नारे लगा सकते हैं." सिर्फ घर में बैठ कर और न्यूज़ और फेसबुक पर हमारी गतिविधियाँ फॉलो करना शर्म की बात है.

अगर आप में सचमुच मर्दानगी है तो सडकों पर आइये मेरी सुरक्षा के लिए...मुझ जैसी कई लड़कियों की सुरक्षा के लिए. अगर आप घर में चुपचाप बैठे रहंगे और हमें कुछ हो गया तो हमारे  दोषी आप होंगे. हमारी रक्षा नहीं करने के लिए ,अपने देश के प्रति भी आप अपराधी होंगे.

गलियों में... सडकों पर जाइए...sms भेजिए... नेट पर पोस्ट कीजिए ...लोगो में जागरूकता लाइए. अपने परिवार..अपने दोस्त.....अपनी बिल्डिंग....अपनी कॉलोनी के लोगो को बताइए एक व्यक्ति अगर  पांच या दस लोगो को बताए फिर वो और दस लोगो को...तो क्रान्ति आने में देर नहीं लगेगी.
 

आत्मदाह करने से अच्छा है,कुछ सकारात्मक करें, जो बदलाव लाएगा...एक बड़ा बदलाव.
कभी ना कहें...कि "कोई आशा नहीं..जैसे ही यह कहा जाता  है..आशा वैसे ही गायब  हो जाती है" ( Never say there's no hope Hope  disappears only  when you say there's no hope )  जबतक आपलोग हमलोगों के साथ रहेंगे तब तक आशा बनी रहेगी

सरकार से मत डरिए सिर्फ अल्लाह  से डरिए...कुरान में भी कहा गया है,"अल्लाह तब तक किसी के हालात नहीं बदलते ,जबतक वह खुद अपनी हालात बदलने की कोशिश नहीं करता.

ये मत सोचिये कि आप सुरक्षित रहेंगे. कोई भी  सुरक्षित नहीं होगा.हमारे साथ आइये और अपने अधिकार...मेरे अधिकार..अपने परिवार के अधिकार की मांग करिए"
 

मैं २५ जनवरी को तहरीर स्क्वायर जा रही हूँ. और कहूँगी.. NO TO 

THIS CORRUPTION.... NO TO THIS  REGIME  

 

और छब्बीस जनवरी से  आन्दोलन शुरू हो गया....लाखों लोग सड़क पर 

उतर आए....आन्दोलन ने व्यापक रूप ले लिया है और अभी तक जारी है.

 
वह वीडियो इस लिंक पर देखी जा सकती है
http://www.youtube.com/watch?v=A8lYkrgKZWg

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