अभी संस्मरण श्रृंखला में ' रश्मि प्रभा ' जी की माता जी के मधुर संस्मरण पोस्ट करना बाकी है. पर आज 'टाइम्स ऑफ इण्डिया 'में एक इतनी अलग सी खबर पढ़ी कि बांटने का मन हो आया.
अहमदाबाद से चालीस किलोमीटर की दूरी पर 'झूलासन ' नामक एक गाँव स्थित है. यह गाँव अंतिरक्ष यात्री 'सुनीता विलियम्स' के पिताजी का पैतृक गाँव है . इस गाँव की एक खासियत है. यहाँ पर एक मंदिर है और शायद यह एक अकेला हिन्दू मंदिर है, जिसमें मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है.
कहा जाता है कि २५० वर्ष पहले 'डोला ' नाम की एक मुस्लिम महिला ने उपद्रियों से अपने गाँव को बचाने के लिए उनसे बहुत ही वीरतापूर्वक लड़ाई की और अपने गाँव की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी. उनका शरीर एक फूल में परिवर्तित हो गया और उस फूल के उपर ही इस मंदिर का निर्माण किया गया.
अभी हाल में ही इस गाँव के अमीर निवासियों ने इस मंदिर को और भी भव्य बनाने के लिए चार करोड़ रुपये की राशि इकट्ठा की है. ' झूलासन केलवानी मंडल' के प्रेसिडेंट 'रजनीश वाघेला ' का कहना है, "यह सच है कि यह मंदिर एक मुस्लिम महिला की याद में बना है .इस मंदिर में कोई मूर्ति या कोई तस्वीर नहीं है. एक पत्थर पर एक यंत्र (शायद ताबीज़ ) रखा है और उसके ऊपर एक साड़ी ओढ़ा दी गयी है .और उसी की पूजा की जाती है
इस मंदिर को 'डॉलर माता' का मंदिर भी कहा जाता है .क्यूंकि ७००० की जनसंख्या वाले इस गाँव के १५०० निवासी अब अमेरिका के नागरिक हैं.
सुनीता विलियम्स जब अन्तरिक्ष यात्रा पर गयीं तो उनकी सुरक्षित वापसी के लिए इस मंदिर में एक अखंड ज्योति जलाई गयी जो चार महीने तक लगातार जलती रही.
धर्म के नाम पर कितनी राजनीति होती है... कितनी बहसें ..कितने मनमुटाव और यहाँ एक गाँव में सीधे-सच्चे मन वाले लोगों ने बिना किसी का धर्म देखे ,उसके कर्मों को सराहा है . उसकी वीरता के लिए उसके बलिदान को याद करते हुए उसकी याद में एक मंदिर ही बना लिया है और अपनी कृतज्ञता उसकी पूजा करके व्यक्त करते हैं
(साभार टाइम्स ऑफ इण्डिया )
कहा जाता है कि २५० वर्ष पहले 'डोला ' नाम की एक मुस्लिम महिला ने उपद्रियों से अपने गाँव को बचाने के लिए उनसे बहुत ही वीरतापूर्वक लड़ाई की और अपने गाँव की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी. उनका शरीर एक फूल में परिवर्तित हो गया और उस फूल के उपर ही इस मंदिर का निर्माण किया गया.
अभी हाल में ही इस गाँव के अमीर निवासियों ने इस मंदिर को और भी भव्य बनाने के लिए चार करोड़ रुपये की राशि इकट्ठा की है. ' झूलासन केलवानी मंडल' के प्रेसिडेंट 'रजनीश वाघेला ' का कहना है, "यह सच है कि यह मंदिर एक मुस्लिम महिला की याद में बना है .इस मंदिर में कोई मूर्ति या कोई तस्वीर नहीं है. एक पत्थर पर एक यंत्र (शायद ताबीज़ ) रखा है और उसके ऊपर एक साड़ी ओढ़ा दी गयी है .और उसी की पूजा की जाती है
इस मंदिर को 'डॉलर माता' का मंदिर भी कहा जाता है .क्यूंकि ७००० की जनसंख्या वाले इस गाँव के १५०० निवासी अब अमेरिका के नागरिक हैं.
सुनीता विलियम्स जब अन्तरिक्ष यात्रा पर गयीं तो उनकी सुरक्षित वापसी के लिए इस मंदिर में एक अखंड ज्योति जलाई गयी जो चार महीने तक लगातार जलती रही.
धर्म के नाम पर कितनी राजनीति होती है... कितनी बहसें ..कितने मनमुटाव और यहाँ एक गाँव में सीधे-सच्चे मन वाले लोगों ने बिना किसी का धर्म देखे ,उसके कर्मों को सराहा है . उसकी वीरता के लिए उसके बलिदान को याद करते हुए उसकी याद में एक मंदिर ही बना लिया है और अपनी कृतज्ञता उसकी पूजा करके व्यक्त करते हैं
(साभार टाइम्स ऑफ इण्डिया )
