छोटी छोटी बातें क्या महत्व रखती हैं??...हर कोई कहता है..ये तो छोटी बात है,ध्यान मत दो...इतनी छोटी बातें दिल पे लोगे तो कैसे चलेगा...छोटी बातें इग्नोर करनी चाहिए...ये तो बहुत छोटी बात थी...पर क्या ऐसा सचमुच होता है?? ये छोटी बातें अपने आप में इतनी महत्वपूर्ण हो उठती हैं कि सारा वजूद ही घेर लेती हैं.और बड़ी बातों का महत्त्व खो जाता है.सारा ध्यान उस छोटी बात पर ही केन्द्रित हो जाता है और मुख्य बात गौण हो जाती है.
जैसे कोई बड़ा सा सुन्दर भवन हो, पर उसका एक कोना टूटा हुआ हो. उस भवन की सुन्दरता पर किसी का ध्यान नहीं जायेगा पर वह टूटा हुआ कोना हर किसी को नज़र आएगा. एक बार मेरी एक सहेली ने एक समारोह में मैजेंटा कलर की सुन्दर साड़ी पहनी थी,मैचिंग इयर रिंग्स,बैंगल्स,नेकलेस,यहाँ तक कि पर्स और चप्पल भी मैचिंग.पर जल्दबाजी में उसने बिंदी लाल रंग की लगा रखी थी,जो समारोह की तेज रौशनी में और भी स्पष्ट हो उठा. जो भी महिला उस से मिलती, उनकी नज़र बिंदी पर ही चली जाती.और टोक देती.वह हताश होकर कुर्सी पर बैठ गयी..'किसी को साडी,इयर रिंग्स ,बैंगल्स नज़र नहीं आ रहें.' पर ऐसा नहीं था, वह छोटी सी बिंदी,उसके पूरे गेट-उप को इतना इम्परफेक्ट कर रही थी,कि सबका ध्यान उस पर ही चला जा रहा था.
एक बार मुकेश अम्बानी,एक बड़ा सा प्रोजेक्ट ,डिस्कस करने गए. करोड़ों रुपये और बहुत सारा समय लगने वाला था.पर उनका ध्यान गया, एक छोटी सी जगह पर,जहाँ exhaust fan नहीं लगा था. उन्होंने लगाने के निर्देश दिए.छः महीने बाद वे निरिक्षण करने गए, सारे अधिकारी बहुत खुश ,प्रोजेक्ट बहुत अच्छा चल रहा है..तारीफ़ मिलेगी.पर उन्होंने आते ही उस exhaust fan के बारे में पूछा ,जो कि नहीं लगा था फिर सारे बड़े काम अर्थहीन हो उठे.
इक छोटी सी गलती, कैसे ट्रेन दुर्घटना,विमान दुर्घटना की वजह बन हज़ारों निर्दोष जान ले लेती है,इसकी चर्चा ही बेकार है. बड़े बड़े राजाध्यक्षों के भी छोटे से निर्णय इतिहास की धारा ही बदल डालते हैं यूँ ही नहीं कहते, "लम्हों ने खता की सदियों ने सज़ा पायी"
हमारे ब्लॉग जगत का ही उदहारण ले लें, हर दिल अज़ीज़ महफूज़ मियां,सबसे दोस्ती का हाथ बढाते हैं. कोई इगो नहीं रखते.पर दो तीन महीने पर कभी कभी कमेन्ट में ऐसा बडबोलापन कर जाते हैं जो उनकी सारी अच्छाइयों को ढक लेता है और हमेशा के लिए लोगों को उनके कमेंट्स ही याद रह जाते हैं (लेखन के विषय में भी अपनी पसंद हो सकती है,पर यहाँ बड़ा लेखक कौन है?...अधिकाँश लोग,एक जैसा ही लिखते हैं पर महफूज़ अली को लोगों की नापसंदगी अपने कमेन्ट की वजह से झेलनी पड़ती है, पोस्ट पर 8 नापसंद के चटके इसकी गवाही देते हैं.)
एक शब्द आजकल ब्लॉग जगत में बहुत उछल रहा है,'सेलेक्टिव नैतिकता'.एक सहेली है,हर विवादस्पद मुद्दों पर पोस्ट लिखती है,खुल कर बोलती है,विरोध करती है .सिर्फ एकाध जगह उसने अपने दोस्त के खिलाफ विरोध नहीं जताया.(यह भी वजह हो सकती है,कि उसने देख लिया था एक दूसरे दोस्त ने कड़ा विरोध जताया था,इसलिए चुप रह गयी होगी कि अब, सब एक साथ क्यूँ पीछे पड़ जाएँ) पर उसे सेलेक्टिव नैतिकता' के तमगे से नवाज़ दिया गया.और गाहे -बगाहे उसपर तंज कसे जाते हैं.
इसलिए इन छोटी छोटी बातों को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए.ये ही बातें हैं ,जो किसी भी व्यक्तित्व को सम्पूर्ण व्यक्तित्व बनाने में सक्षम होती हैं.. ज़िन्दगी में हम कितने बड़े फैसले लेते हैं?? पढाई, कैरियर नौकरी,शादी,बच्चे, बच्चों की पढ़ाई(कैरियर ,शादी का ऑप्शन अब उनलोगों ने छोड़ा नहीं :) ) बस.....कुलमिलाकर दस फैसले भी नहीं. पर छोटे छोटे फैसले हमें रोज लेने होते हैं जो हमारी ज़िन्दगी की गति निर्धारित करती है और हम इसे नोटिस भी नहीं करते. ये छोटी छोटी बातें ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं.
जैसे छोटी बातें,नकारात्मक पक्ष उभारती है वैसे ही छोटी छोटी बातें ही व्यक्तित्व का सकारात्मक पहलू भी उजागर करती हैं. बड़े लोगों से ही शुरुआत करते हैं. इंदिरा गाँधी के लन्दन यात्रा के दौरान राजीव गाँधी ; सोनिया गाँधी को उनसे मिलाने ले गए. सिर्फ मित्र कह कर ही परिचय दिया. सामान्य बातचीत हुई. वहाँ से सोनिया गांधी को एक पार्टी में जाना था .जब वे विदा लेकर जाने को मुड़ीं तो इंदिरा गाँधी ने उन्हें रोका और कहा कि "तुम्हारी स्कर्ट की हेमिंग थोड़ी सी खुल गयी है,इस तरह पार्टी में जाना ठीक नहीं " और एक छोटे से डब्बे में से सूई धागा निकाला और नीचे बैठकर उनके स्कर्ट की तुरपन ठीक कर दी .बस उनके इसी gesture ने सोनिया गाँधी के दिल में हमेशा के लिए जगह बना ली. और उन्हें ये आभास भी हो गया कि इंदिरा गाँधी इस रिश्ते को नकारेंगी नहीं
एक बार मैं ,टी.वी.पर शाहरूख खान,दीपिका,फराह खान वगैरह का इंटरव्यू देख रही थी. दीपिका ,फरहा का स्वागत करने को उठीं और उनकी शर्ट थोड़ी सी ऊपर खिसक गयी थी,शाहरूख खान ने पीछे से दीपिका के बिना पता चले उसे खींच कर ठीक कर दिया.पर यह बात हम सब सहेलियों ने नोटिस की और दूसरे दिन बातों के दौरान ,उस इंटरव्यू में किसने क्या कहा कुछ याद नहीं था शाहरुख़ खान का ये gesture सबको याद रहा और सब सिर्फ उसकी बातें ही कर रहें थे.जबकि उसके बडबोलेपन, उसके एटीच्यूड के सब बड़े आलोचक हैं.
एक फ्रेंड है उसने लव मैरिज की है.बताती है ,शादी के पहले वे दोनों ऑफिस के बाद मिलते और उसके पति(जो उस समय बॉयफ्रेंड था ) उसके हाथों से छोटा सा छोटा बैग या समान तुरन उस से ले लेते.और उनकी इसी बात ने उसे सबसे ज्यादा आकृष्ट किया.और उसे विश्वास हो गया कि वह ज़िन्दगी भर उसका ख़याल रखेगा. लड़के चाहे सीखे सिखाये मैनर्स...कुर्सी आगे खींच देना, आगे बढ़कर दरवाजा खोल देना, हज़ारो मिस यू के sms या कार्ड, गिफ्ट या फिर उधार की शेरो शायरी..का कितना भी उपयोग कर लें.पर अनजाने में की गयी ये छोटी सी हरकत,लड़कियों के दिल में जगह बना लेती है.
एक कजिन है वह भी कभी नहीं भूलता कि उसकी गर्लफ्रेंड ने सुबह सुबह उसे फोन करके याद दिलाया था कि "अपनी माँ को विश किया या नहीं,आज उनका बर्थडे है" उसने बातों बातों में कभी बताया था और उसकी गर्लफ्रेंड ने यह बात याद रखी थी.यह बात उसे इतने गहरे तक छू गयी कि 'कमिटमेंट' से डरनेवाले लड़के ने शादी का निर्णय लेने में देर नहीं की.
अपनी कही कोई बात, कोई हरकत हम बहुत ही हल्केपन से लेते हैं. इन छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते जो हमारी ज़िन्दगी पर गहरा प्रभाव डालती हैं.और जो लोग हर छोटी बात का ध्यान रखते हैं वे, ज़िन्दगी में सफल और महान बन जाते हैं.कोई भी एक दिन में सफलता की सीढियां तय नहीं कर लेता.इन छोटी छोटी गलतियों को सुधारते हुए ही आगे बढ़ता जाता है.
किसी की तरफ मुक्सुरा कर देखना. उसकी बात ध्यान से सुनना, मदद का हाथ बढ़ाना, दो बोल तारीफ के कहना ये सब छोटी बातें हैं पर इनके सकारात्मक परिणाम बहुत बड़े होते हैं. जो ज़िन्दगी का सफ़र आसान बना देते हैं.
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