
हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म "जूली एन जूलिया 'का रिव्यू पढ़ा तो तय कर लिया यह फिल्म तो हर हाल में देखनी ही है. पर वही बेटे के दसवीं के बोर्ड ने हर राह पर तालेबंदी कर रखी थी.उसकी परीक्षा ख़त्म हुई और मैंने अपने तमाम व्यस्तताओं को धता बताकर इसे देखने का समय निकाल ही लिया. आखिर आपलोगों के साथ बांटना भी तो था :)
जूली एन जूलिया दो सच्ची कहानियों पर आधारित है.एक जूलिया चाइल्ड द्वारा लिखित "My life in France " और दूसरी जुडिथ पोवेल द्वारा लिखित Juli and Juliya ' ये दोनों ही किताबें उनके संस्मरणों पर आधारित हैं. Nora Ephron ने अपने शानदार निर्देशन में बिलकुल सच्चाई से उनकी ज़िन्दगी को फ़िल्मी कैनवास पर उतारने की कोशिश की है.,Meryl Streep और Amy Admas ने बहुत सधा हुआ अभिनय किया है
२००२ में २९ वर्षीय जूली ,एक पत्रिका में अपनी सब एडिटर की नौकरी छोड़, अपने पति के साथ उसके ऑफिस के पास एक छोटे से फ़्लैट में शिफ्ट हो जाती है.वह एक कॉल सेंटर में काम करने लगती है, पर अनजान जगह,एक छोटा सा फ़्लैट और दिन भर लोगों की समस्याओं से जूझना,ये सब मिलकर उसे बहुत परेशान कर देते हैं. उसे खाना बनाने का बहुत शौक है और वह रोज एक नयी रेसिपी ट्राई करके अपनी थकान उसमे भुलाने की कोशिश करती है.
एक बार वह अपनी पुरानी सहेलियों के साथ लंच पर जाती है.वे सब अपने अपने क्षेत्रों में काफी सफल हैं. वे सब एक अभिनेत्री के ब्लॉग की चर्चा करती हैं.जूली, घर आकर अपने पति को बताती है, कि वह उस अभिनेत्री से कहीं ज्यादा अच्छा लिख सकती है.
"हाँ, क्यूंकि तुम एक लेखिका हो " उसका पति कहता है.
"एक ऐसी लेखिका जिसका नॉवेल नहीं छपा है. जबतक नॉवेल छपे नहीं उसे लेखिका नहीं कह सकते."
"तो फिर, तुम भी अपना एक ब्लॉग बना लो और उसमे लिखो"
"पर लिखूं क्या"
"हम्म इस जगह के बारे में कि तुम्हे ये कितना पसंद है"
"यह जगह मुझे नहीं पसंद"
"अपने जॉब के बारे में लिखो"
"और किसी ऑफिस वाले ने पढ़ लिया तो मुझे नौकरी से निकाल देंगे.मैं कुछ ऐसा लिखना चाहती हूँ कि जिससे मुझे ख़ुशी मिले और मैं अपनी दिन भर की परेशानी भूल जाऊं. जैसी ख़ुशी मुझे नए नए व्यंजन बनाने में मिलती है"
"तो अपने खाना बनाने के अनुभव के बारे में लिखो"
और जूली तय करती है कि वह अपनी प्रिय लेखिका 'जूलिया चाईल्ड' की किताब से रोज कुछ रेसिपी ट्राई करेगी और उसके अनुभव के बारे में अपने ब्लॉग में लिखेगी.वह एक डेड लाईन रखती है.३६५ दिन में ५२४ रेसिपी.
शुरुआत में वह अपने पोस्ट के अंत में लिखा करती है. Are you listening? Whoever you are...या फिर is there anybody ??somebody??anyone ?? वह अपने पति से कहती है कि ऐसा लग रहा है मैं यह सब लिख कर शून्य में भेज रही हूँ.
जूली की माँ भी उसे फोन पर डांटती है कि वह क्यूँ अपना समय बर्बाद कर रही है. कोई उसे नहीं पढता"
"लोग पढेंगे माँ "जूली कहती है.
दस दिन बाद उसे एक कमेन्ट मिलता है. वह खुश हो जाती है. पर वह उसकी माँ का कमेन्ट था और यही लिख था कि 'क्यूँ अपना समय बर्बाद कर रही है'.
एक महीने के बाद उसे १२ कमेन्ट मिलते हैं.वह अपने पति को खुश होकर बताती है कि वह इनमे से किसी को जानती तक नहीं. दो महीने के बाद उसके ऑफिस में कदम रखते ही उसकी सहेली बताती है. उसके लौब्स्टर वाली पोस्ट पर उसे ५३ कमेंट्स मिले हैं.वह ख़ुशी से झूम उठती है.
फिल्म में जूलिया चाइल्ड की कहानी भी साथ साथ चलती है कि कैसे १९४९ में जूलिया ४० साल की उम्र में अपने पति के साथ फ्रांस आई और उसने समय काटने के लिए एडवांस्ड कुकिंग कोर्स ज्वाइन किया.क्लास में सब पुरुष थे और किसी ना किसी होटल में शेफ थे.वे सब जूलिया को हिकारत से देखते थे क्यूंकि जूलिया उनकी तरह तेज़ी से प्याज नहीं काट पाती थी. जूलिया ने घर आकर करीब दस किलो प्याज काटकर अभ्यास किया. और अगले दिन क्लास में सबसे फुर्ती से प्याज काट कर रख दिए. इसी तरह वह हर कार्य में मेहनत करती और क्लास की सबसे तेज़ और मेहनती छात्रा बन गयी.
एक बार एक पार्टी में जूलिया को दो महिलायें मिलती हैं.जो अंग्रेजी में फ्रेंच व्यंजनों की एक किताब लिख रही थीं.उनके निमंत्रण पर जूलिया भी उनके साथ हो गयी. पर प्रकाशक किताब छापने से मना कर देते हैं कि यह बहुत बड़ी है.फिर जूलिया अपने दम पर सारे व्यंजनों को नया रूप देकर, पका कर,चख कर ..उनकी रेसिपी लिख डालती है. इसमें उसे ८ वर्ष लग जाते हैं.एक दो जगह से रिजेक्ट होने के बाद यह किताब Masterin the Art of French Cooking के नाम से छपती है. आज तक इसके ४९ एडिशन छप चुके हैं.
इधर जूलिया का ब्लॉग पोपुलर होने लगा है. एक अखबार के रिपोर्टर ने उसके ब्लॉग के बारे में लिखना चाहा . जूलिया उसे खाने पर बुलाती है और यह सब अपने ब्लॉग में लिख देती है. वह एक बहुत ही कठिन रेसिपी बनाती है.जिसे पकाने में ढाई घंटे लगते हैं.वह टाइमर लगा कर सो जाती है और वह व्यंजन जल जाता है. दूसरे दिन वह ऑफिस में फ़ोन कर देती है कि तबियत ख़राब है और फिर से वह व्यंजन बनाती है. लेकिन बारिश की वजह से वह रिपोर्टर नहीं आता. ये सारी बातें वह ब्लॉग में लिख देती है. दूसरे दिन उसके बॉस ने उसे बुलाकर जबाब तलब करते हैं क्यूंकि उसके ब्लॉग में वे सारी असलियत पढ़ चुके थे. अब उसके ऑफिस के लोग थोड़ा उस से डरने लगे थे कि क्या पता वह उनकी बातें जाकर ब्लॉग में लिख देगी.
इस बीच कई दुखद क्षण भी आए. जब उसकी तबियत काफी खराब हुई...फिर भी पति के मना करने के बावजूद उसने पोस्ट लिखी,यह सोच कि उसके पाठक निराश हो जाएंगे.एक बार एक व्यंजन खराब हो जाने पर बहुत हिस्टिरिकल भी हो गयी. उसका पति उसे हर तरह से सहयोग करता था. पर उस दिन नाराज़ हो गया कि उसका सारा ध्यान सिर्फ ब्लॉग में रहता है.और घर छोड़कर अपने ऑफिस में रहने चला गया.पर जाते जाते कह गया कि ये सब वह अपने ब्लॉग में मत लिख देना.
जूली सारी बातें तो नहीं लिखती,पर ये लिखती है कि वह बहुत दुखी है .एक अच्छा इंसान नहीं बन पा रही. उसकी आदर्श जूलिया कभी कोई व्यंजन बिगड़ जाने पर इस तरह का व्यवहार नहीं करती. अपने पति का बहुत ध्यान रखती.उसका पति ये सब पढ़कर वापस आ जाता है.
उसका पति ऑफिस से फोन करता है कि जूलिया का ब्लॉग नेट पर पढ़े जाने वाला तीसरा सबसे लोकप्रिय ब्लॉग है. एक दिन न्यूयार्क टाइम्स का एक रिपोर्टर उसका इंटरव्यू लेता है और वह पहले पेज पर प्रकाशित होता है.जूलिया ट्रेन में जा रही है और बगल में बैठे आदमी को अपने ऊपर लिख लेख पढ़ते देखती है. बाज़ार में प्लेटफ़ॉर्म पे कई जगह वह लोगों को वो लेख पढ़ते देखती है.
जब घर आती है तो उसके फ़ोन के आंसरिंग मशीन पर ६५ मैसेज पड़े होते हैं. पत्रिकाओं , अखबारों और ,पब्लिशिंग हाउस से उसे लिखने के ऑफर मिल रहें थे.इस बीच उसकी माँ का भी फोन था कि पडोसी, रिश्तेदार दोस्त सबलोग उसे फोन पर बधाई दे रहें हैं और वह बहुत खुश है.
४ दिन बाकी है ३६५ दिन पूरे होने में. और अपन कमिटमेंट पूरा कर जूली अपने दोस्तों को पार्टी देती है और सबके सामने कहती है कि "अपने पति एरिक के सहयोग के बिना वह यह सब नहीं कर पाती और ग्लास उठा कर टोस्ट करते हुए, वही शब्द दुहराती है जो कभी जूलिया के पति ने जूलिया को कहे थे,"You are butter to my bread
You are life to my breath "
फिल्म में दोनों पुरुषों का किरदार बहुत ही पॉजिटिव है. दोनों अपनी पत्नी को पूरा सहयोग देते हैं और वे जब भी निराश,हताश होती हैं तो उनका अपने में विश्वास जगाते हैं और उत्साह बढाते हुए कहते हैं कि वह अपने मकसद में जरूर कामयाब होंगी.
आशा है आपलोगों को फिल्म अच्छी लगी होगी.:)

