कुछ ही महीने पहले उन्होंने रायपुर के DPS स्कूल में अंग्रेजी शिक्षिका के रूप में ज्वाइन किया है. कल ही फेसबुक पर उनकी फोटो डा. कलाम के साथ देखी और उनसे आग्रह कर डाला कि 'प्लीज़ प्लीज़...इस मुलाक़ात का ब्यौरा वे लिख कर मुझे भेजें.' इसे मैं अतिथि पोस्ट के रूप में प्रकाशित करना चाहती हूँ. और घोर आश्चर्य बिना एक ड्रम मक्खन लगाए जरा सी मनुहार से वे मान गयीं. उनके शब्दों में ही पूरा विवरण.
अतिथि पोस्ट : ममता कुमार
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| क्रीम साड़ी में भाभी |
लेकिन डॉक्टर कलाम ने मेरी पूरी सोच ही बदल दी। एक तो वो काफी समय पर आये,(भारतीय समय को ध्यान मे रखते हुए) और आकर काफी लोगो से व्यक्तिगत रूप से मिले।हम सारी टीचर्स red carpet के एक तरफ़ पंक्तिबद्ध खडी थीं । थोडी थोडी दूर पर रुक कर डा. कलाम सब से कुछ न कुछ बात कर रहे थे। मुझसे उन्होने पूछा "Are you a great teacher ?"अपनी क्लास मे मै बच्चो को कई बार डपट लगाती हूँ कि साधारण प्रश्न का भी वे उत्तर नहीं देते ।लेकिन उस समय मुझे भी कुछ नही सूझा । जब मेरे बगल से 'संकरी' (सह-शिक्षिका ) ने कहा "trying to be " तब जाकर कुछ समझ मे आया। डा. कलाम को शायद उत्तर मुझसे ही चाहिए था।वह् मुझे देखकर फिर बोले "hmmmm ?"
मैने कह दिया "Trying to be with the guidance of our seniors "{after all ,Principal वही खड़े थे :)) फिर उन्होने एक ग्रीक टीचर की कहानी सुनायी ,सॉरी ,नाम मुझे याद नही क्योकि तब भी मुझे समझ नही आया था।आखिर डा. कलाम भी तो हमारे अन्य दक्षिण भारतीय वासियों की तरह अपने खास accent मे english बोलते हैं। उन्होने कहा "There was a great greek teacher ....................He said once ,"give me a child for seven years ,after that no God no devil can change him ,....that is the confidence that you have ." इतना कह कर God bless you कह कर वह आगे बढ़ गए .जाने के बाद भी एक सुखद एहसास बाकी रहा क्योंकि उनका एक ख़ास अंदाज है ,वो लोगो से इस अंदाज में बात करते है जैसे वह इंसान उनके लिए कितना ख़ास है. इसी तरह हम सब पर अपना जादू बिखेरते हुए वे स्टेज पर चले गए,वहां पर वैसे तो हर चीज को वे बहुत gracefully लेते रहे पर यह बहुत स्पष्ट था कि वे बच्चों से interact करने में ज्यादा interested हैं.और जब उनकी स्पीच का समय आया तो पूछिये मत.......इतनी energy इतना commitment शायद ही आज तक किसी में देखा हो मैंने. Posh English schools से लेकर economically weaker section के बच्चों तक को involve करके सबको ऐसा एहसास दिलाया जैसे वे ख़ास उसी इंसान से बाते कर रहे हैं. हम सब की तालियाँ बंद होती उसके पहले ही वे वहां से निकल गए ,अगला कार्यक्रम मेडिकल कॉलेज में होना था जिसका समय हो चला था .
बस मेरी तरफ से इतना ही ,मैं कोई writer तो हूँ नहीं कि इस incident को खूबसूरत शब्दों के लिफाफे में डालकर आपके सामने रखूँ बस जो हुआ वही लिख दिया.
--- ममता कुमार
(पिछली पोस्ट पर एक बेकार की बहस ने सारा ज़ायका बिगाड़ दिया और मैं कुछ भी नहीं लिख पायी...ऐसे में भाभी की भेजी ये पोस्ट एक खुशनुमा झोंके की तरह लगी....शुक्रिया भाभी :)
एकाध दिन में अगली पोस्ट लिखती हूँ.)
