अक्सर देखने में आता है, कि लोग कहते हैं 'नई पीढ़ी नहीं जानती प्रेम किस चिड़िया का नाम है, 'प्रेम' को एक टाइम-पास या खेल की तरह लेती है', 'अपने वायदे पर कायम नहीं रहती वगैरह..वगैरह.पर कई बार मुझे लगता है, नई पीढ़ी (30 तक की आयु के ) ज्यादा ईमानदार है. उसकी कथनी और करनी में ज्यादा फर्क नहीं है. कम से कम महानगरों में तो देखा है कि जब प्रेम किया तो उसे निभाते हैं.और अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेने की अपनी शक्ति भर पूरा प्रयास करते हैं.
कई उदाहरण देखे हैं, एक युवक ने छः साल तक इंतज़ार करने के बाद,अपने माता-पिता की अनुमति से ही शादी की. एक ने चार साल, इंतज़ार किया. एक मेरा करीबी ही है,बारहवीं से उसका प्रेम चल रहा है आज दोनों नौकरी में आ गए हैं पर लड़की के माता-पिता को मनाने की कोशिश जारी है. एक मित्र दुबई में है,लड़की भारत में,दोनों के परिवार नहीं तैयार पर दोनों ही प्रयासरत हैं उन्हें मनाने को.
जबकि पुरानी पीढ़ी (45,50 से ऊपर ) प्रेम करने में पीछे नहीं रही पर जब शादी का वक़्त आता था तो श्रवण कुमार, बन माता-पिता की इच्छा से विवाह कर लेते थे.
एक मेरी परिचिता हैं, एक प्रतिष्ठित स्कूल में अध्यापिका हैं. कभी कभी 3 महीने तक हमारी सिर्फ हाय-हलो ही होती है और कभी
मिलते हैं तो 3 घंटे में भी हमारी बातें ख़त्म नहीं होती. हाल में ही वे मेरे घर आई थीं और अपने बेटे की शादी की जो बातें बताईं , सुन मैं आवाक रह गयी, आज के युग में, मुंबई जैसे महानगर में, एक क्रिश्चन लड़का ऐसा हो सकता है??
एलेक्स एक गोरा-चिट्टा,लम्बा बहुत ही हैंडसम लड़का है. इंजिनियर है. एक मल्टीनेशनल कम्पनी में कार्यरत है. नौकरी लगने के छः महीने बाद ही उसने अपने माता-पिता को बताया कि वो नेट पर किसी लड़की से मिला है और शादी करना चाहता है. लड़की मंग्लोरियन क्रिश्चन है और ये लोग गोवन क्रिश्चन हैं.( इनमे भी बहुत जातिवाद है.) पैरेंट्स ने बिलकुल मना कर दिया. लड़की उनकी जाति की भी नहीं थी और बहुत ही साधारण शक्ल सूरत की और सामान्य परिवार से थी. चर्च में रोज ही, एलेक्स के लिए बहुत अच्छे रिश्ते आ रहें थे. पर वो अपनी जिद पर अड़ा रहा.
आखिरकार ,पिता ने कहा हम तुम्हारी शादी में एक पैसा भी खर्च नहीं करेंगे और उस से शादी की तो किसी भी घर मे नहीं घुसने देंगे. (उनके इसी कालोनी में एक पैतृक आवास और २ फ्लैट्स हैं ) एलेक्स ने चर्च में शादी, एक क्लब में रिसेप्शन, सबका इंतज़ाम खुद से किया. ऑफिस के पास ही किराए का घर लिया और माता-पिता को शादी में शामिल हो, आशीर्वाद देने का आग्रह किया. जिसे समाज का ख़याल कर, ये लोग मान गए.
शादी हो गयी. हमलोग भी शामिल हुए ,पर अंदर की बातें हमें क्या पता? एलेक्स वहीँ से अपने नए घर में चला गया .लेकिन हर शनिवार ,अपने पैरेंट्स को मनाने आता. माँ तो मान गयी थीं पर पिता दृढ थे. उस से बात भी नहीं करते. छः महीने बाद क्रिसमस आया . इनलोगों में यह मान्यता है कि क्रिसमस वाले सप्ताह में अगर कोई भी आ जाए तो उसके लिए दरवाजे बंद नहीं करते. चाहे वह आपका कितना भी बड़ा दुश्मन हो, उसका सत्कार करते हैं. एलेक्स ने फोन किया, वह क्रिसमस के एक दिन पहले अपनी पत्नी के साथ आ रहा है. पर माँ ने मना कर दिया कि "pls dont spoil our Christmas" मैं यह सुन इतनी आहत हुई.."ऐसा भी कोई दिन आ सकता है जब अपने बच्चे के आने से त्योहार खराब हो जाये ?? बच्चे का घर आना ही एक त्योहार नहीं?''. पर उनकी भी पता नहीं क्या मजबूरियाँ रही हों. शायद पति का मूड देख मना कर दिया हो.कि वे फिर 'मिडनाईट मास' में भी नहीं जाएंगे.पर उसने कहा 'ठीक है पर क्रिसमस के दिन लंच पर पत्नी के साथ आऊंगा '.
अब माँ ने पति की बड़ी बहन ,बड़े भाई को फोन कर समझाने को कहा. उनलोगों के समझाने पर कि 'यह आखिरी मौका है. अगर आज भी तुमने अच्छा सुलूक नहीं किया तो फिर हमेशा के लिए बेटा खो दोगे' .पति ने कुछ कहा नहीं पर अपने कमरे से बाहर नहीं निकले. लंच के बाद एलेक्स, उनके पास जाकर बैठा रहा. बता रही थीं कि 'वो आंसुओं से रो रहा था' पर पता नहीं पिता का दिल किस पत्थर का हो गया था कि पिघल ही नहीं रहा था. फिर एक घंटे बाद अपनी पत्नी को लेकर गया. दोनों उनके पास खड़े, हाथ जोड़े, घंटों उन्हें मनाते रहें और माफ़ी मांगते रहें.तब जाकर पिता, पिघले.आज एलेक्स एक प्यारी सी 4 महीने की बच्ची का पिता है और हर इतवार पत्नी के साथ ,माँ के पास आता है.
वे बता रही थीं कि देखो मैने कितनी मुश्किल से अपने बच्चों को क्रेच में डालकर नौकरी की. और आज मेरी बहू ने नौकरी छोड़ दी है और इतने बड़े घर ,गाड़ी का सुख उठा रही है.यह भी बताया कि जब एलेक्स नौकरी के इंटरव्यू के लिए गया तो उस बोर्ड के एक मेंबर का बेटा उनकी स्कूल में पढता था और वे उसकी क्लास टीचर भी थीं. एलेक्स को नौकरी मिलने में यह पहचान भी काम आई.
उसका कैम्पस सेलेक्शन हो गया था पर उसने यूनिवर्सिटी में टॉप किया तो दूसरी कंपनियों से बड़े पैकेज
के ऑफर मिलने लगे, फिर पिता ने एक लेटर ड्राफ्ट करके दिया कि इतनी सैलरी देंगे तभी वो पुरानी कंपनी में काम करेगा. पर हमने उसका एक पैसा नहीं जाना. जब वे यह सब बता रही थीं तो मुझे लग रहा था कि ये एक बड़े स्कूल की कोई टीचर मेरे सामने बैठी हैं या किसी गाँव की कोई अनपढ़ औरत.
हो सकता है ये उनके क्षणिक विचार हों. पर उनके मन में यह मलाल तो है कि हमने बेटे के लिए इतना किया और बेटे ने अपनी पसंद की लड़की से शादी कर ली जो आज उसके घर पर राज कर रही है. ऐसे वे सचमुच बहुत अच्छी हैं, बहुत सारे सोशल वर्क करती हैं, हमेशा किसी की मदद को तैयार रहती हैं. बहू की भी बार बार तारीफ़ की कि 'बहुत अच्छी है, नाज़-नखरे नहीं हैं,सिंपल सी है, घर अच्छे से संभाल लिया है...बस मेरे हैंडसम बेटे की टक्कर की नहीं है.
पर आज तक, दुनिया की कोई लड़की, किसी माँ को, अपने बेटे के लायक लगी है?? :) :)
(चित्र गूगल से और नाम काल्पनिक है)
( इस से बिलकुल उलट, बीस साल पहले की एक शादी का जिक्र अगली पोस्ट में )
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