अपनी एक कहानी में मैने जिक्र किया था कि कैसे , छोटे शहरों से आकर महानगरो में बसे लोग ,अपने बच्चों के ऊपर ज्यादा ही प्रतिबन्ध लगाते हैं , और जैसे उन्हें एक जिद सी होती है लोगो को दिखाने की कि मेरे बच्चों को महानगर की हवा छू भी नहीं गयी है...वे बहुत ही आज्ञाकारी हैं ..और हमारी इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं करते. कुछ ऐसा ही उदाहरण हाल में ही देखने को मिला. और यह मेरी पिछली पोस्ट से भी सम्बंधित है...जैसे कि माता-पिता, ने फिल्मो में काम करने की इजाज़त तो दे दी..पर यह अंकुश हैं कि हर तरह के रोल नहीं करने हैं. इसी तरह ,आजकल लड़कियों को उच्च -शिक्षा की... मनपसंद नौकरी की...यहाँ तक कि प्रेम विवाह तक की इजाज़त है पर शर्त ये है कि प्रेम अपनी ही जाति के युवक से करो...हाल में ही पढ़ी शरद कोकास जी की कविता की ये पंक्तियाँ याद हो आयीं,
अपने आसपास
उसने बुन लिया है जाल संस्कारों का
उसने मनाही दी है अपने बारे में सोचने की
जंगल में बहने वाली हवा
एक अच्छे दोस्त की तरह
मेरे कानों में फुसफुसाते हुए गुज़र जाती है
दोस्त ! प्रेम के लिये वर्ग दृष्टि ज़रूरी है
बस फर्क ये है कि यहाँ जंगल की हवा फुसफुसाती नहीं बल्कि अभिभावक स्पष्ट शब्दों में बरज देते हैं.
मेरी एक परिचिता हैं. सहेली भी कह सकती हूँ परन्तु हमारी मुलाक़ात बहुत ही कम होती है. साल में मुश्किल से 3,4 अवसर आते होंगे,जब हम मिल बैठ कर बातें करे. मुंबई में नौकरी वाली स्त्रियाँ सुबह 8 बजे घर से निकलती हैं और शाम 7,8 के पहले घर नहीं लौट पातीं. छुट्टी का दिन,सबके लिए परिवार का दिन होता है और नौकरी वाली महिलाओं के सैकड़ों काम राह तक रहें होते हैं. लिहाजा आते-जाते मिल लिए तो बस रास्ते में ही दो मिनट बात हो जाती है,बस . एक दिन उन्होंने कहा कि वे घर पर आएँगी, उन्हें कुछ जरूरी बात करनी है.
मुझे अपने आस-पास की घटनाओं के बारे में लिखते देख,किसी ने कहा था आपने लोगों के घर में hidden camera लगवा रखा है क्या ? ऐसा तो नहीं है पर शायद कहानियाँ खुद मुझे ढूँढती हुईं, मुझ तक पहुँच जाती हैं. :)
मिसेज़ जेनिफर (कल्पित नाम) का बेटा एक प्रतिष्ठित विमान सेवा में काम करता है. वहाँ एक एयरहोस्टेस से उसका अफेयर हुआ. एयरहोस्टेस उत्तर-भारत की है. उसके पिता कर्नल हैं. उन्होंने इस सम्बन्ध पर कड़ी आपत्ति जताई और बेटे को जान से मारने की धमकी दे डाली. जेनिफर ने तीन साल पहले ही अपने पति को खोया है. घर में सिर्फ वो और उनका बेटा है, बेटी की शादी हो चुकी है. वो भी मुंबई में ही थोड़ी दूरी पे रहती है. जेनिफर मुझसे पूछ रही थी, टी.वी. अखबार में तो पढ़ती रहती हैं पर "क्या सचमुच, यू.पी. में 'ऑनर किलिंग' प्रचलन में है और उनके बेटे को खतरा है? " मैं उनके सामने तो सीधी बैठी थी पर अंदर ही अंदर मेरा सर शर्म से झुका जा रहा था. किस बिना पर मैं उन्हें ये आश्वाशन दूँ कि नहीं घबराने की कोई बात नहीं, उत्तर-भारत में ये सब नहीं होता. वो लड़के के साथ-साथ लड़की के लिए भी चिंतित थीं. वो कई बार उनके घर आ चुकी थी और उन्हें पसंद भी थी. मैने पूछा,"आपको कोई आपत्ति नहीं?" तो कहने लगीं कि उनकी भी इच्छा तो थी कि कैथोलिक लड़की ही बहू बन कर घर आए पर अगर उनके बेटे को ये लड़की पसंद है तो उन्हें भी पसंद है,आखिर ज़िन्दगी, उन दोनों को साथ गुजारनी है.
उन्होंने कई बार लड़की के पिता से बात करनी चाही.लड़के ने मिलना चाहा पर वे लोंग बात करने को भी तैयार नहीं. अपनी ही बेटी को टॉर्चर करने लगे और उसकी नौकरी छुडवा उसे अपने नेटिव प्लेस पर भेजने को आमादा हो गए. विमान-सेवा में भी बात कर दोनों की ड्यूटी का समय बदलवा दिया ताकि दोनों मिल ना सकें .आखिर लड़की ने कहा कि ,' इस लड़के से रिश्ता तोड़ लिया है" फिर भी उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया और उसे कहीं भी आने-जाने की मनाही कर दी. सिर्फ जो कार पिक-अप करने आती, उस से एयरपोर्ट जाती और फिर घर वापस. उसकी माँ रोज आलमारी में उसका एक-एक कपड़ा उठा चेक करती थी की कहीं उसने 'सेल फोन' ,छुपा कर तो नहीं रखा. पर आज के बच्चे 'तू डाल-डाल तो मैं पात-पात'... लड़के ने उसे किसी के हाथो 'सेल फोन' भिजवाया जिसे वह अपने जूते में छुपा कर रखती थी और सिर्फ घर से एयरपोर्ट के रास्ते में उनसे बात करती थी....ये सब बताने के साथ-साथ व्यग्रता से वे मुझसे पूछतीं, "सचमुच पढ़े-लिखे लोग तो ऑनर किलिंग नहीं करते,ना ...मेरे बेटे को तो कुछ नहीं होगा."
मैने किसी तरह उन्हें अस्श्वस्त किया कि ," नहीं.. ऐसा कुछ नहीं होगा" पर मैं सोच रही थी, आज के युग में भी लड़की, "लंदन, पेरिस, अमेरिका जा सकती है पर अपनी मर्जी से शादी नहीं कर सकती."
बीच-बीच में वे बाहर मिल जातीं ,बताती रहतीं..एक इतवार को उन्होंने बताया ,"सबकुछ वैसा ही है..पर लड़की के पैरेंट्स को विश्वास हो गया है कि वो अब उनके बेटे से नहीं मिलती.और इसीलिए उनलोगों ने उसे एक सहेली के बर्थडे में जाने की इजाज़त दे दी और वो उनलोगों से मिलने आज उनके घर पर आई थी. वे , दोनों की कोर्ट मैरेज करवाने की सोच रही थीं. और पहली बार मुझे पता चला कि 'क्रिश्चियन लोगो के लिए कोर्ट मैरेज के कुछ अलग कानून हैं' .
दूसरे दिन सोमवार की दोपहर यूँ ही मैने खिड़की से देखा, जेनिफर की बेटी परेशान सी अपनी छोटी सी बच्ची को लेकर धूप में खड़ी थी. . पूछने पर बताया कि माँ के ऑफिस से आने का इंतज़ार कर रही है .मैने अपने घर पर बुला लिया तब उसने बताया कि कल वो लड़की यहाँ आई थी,यह बात उसकी बेस्ट फ्रेंड ने उसके माता-पिता को बता दी. और वे लोंग उसपर बहुत नाराज़ हुए. उसकी नौकरी छुडवा उसे गाँव भेज रहें थे.तो उसने बहुत रो-धो कर अंतिम बार एक फ्लाईट पर जाने की इजाज़त मांगी और एयरपोर्ट से सीधा लड़के के पास आई है. दोनों उसके घर के इलाके के पुलिस स्टेशन में गए हैं ताकि कहीं 'अपहरण का इलज़ाम ना लगा दें ' थोड़ी देर बाद हैरान-परेशान सी माँ भी आ गयीं. बेटी ने हँसते हुए ही पर विद्रूपता से कहा, "उसके माता-पिता को अपने समाज में बदनामी का डर था कि सब हसेंगे कि लड़की ने कैथोलिक लड़के से शादी कर ली...अब क्या कहेंगे जब सब हसेंगे , लड़की घर से भाग गयी"
इन दोनों की कोर्ट मैरेज हो गयी...दस दिनों तक अपना फ़्लैट छोड़, ये लोग,रिश्तेदारों के घर रहें..."हमलोगों को भी नज़र रखने को कहा था कि कोई हमारे बारे में पूछने तो नहीं आता" वाचमैन को सख्त ताकीद थी, 'किसी अनजान को कुछ नहीं बताने की ' पर सब ठीक रहा . जेनिफर ने बड़े शौक से मेरे साथ जाकर मंगलसूत्र ख़रीदा कि "आखिर आपलोगों के धर्म में मंगलसूत्र का महत्त्व है , लड़की को कोई अफ़सोस ना हो" उसके माता-पिता ने कोई अवांछित कदम तो नहीं उठाया पर बेटी के अकाउंट से उसके अब तक के कमाए चार लाख रुपये निकाल लिए .
