Sunday, August 29, 2010

एक ओणममय पोस्ट

पूकलम (रंगोली)

पिछले कुछ वर्षों से पूरे केरल की तरह हमें भी 'ओणम ' का उसी उत्साह से इंतज़ार रहता है क्यूंकि उस दिन मेरी सहेली 'राजी मेनन ' ओणासद्य' (ओणम का भोज) के लिए हमें, अपने घर बुलाती है. उसके घर के बाहर सुन्दर रंगोली सजी होती है और हमें जमीन पर बैठ, केले के पत्ते पर तरह तरह के व्यंजन परोसे जाते है. शुरू शुरू में बड़े मजेदार किस्से हुए. मैं हर व्यंजन का नाम पूछती और दूसरे ही पल भूल जाती. इतने वर्षों बाद भी बस, 'अवियल' 'साम्भर' 'रसम' ,पायसम और 'पापड़म' के सिवा कुछ याद नहीं. बच्चे जब छोटे थे, उनकी हरकतों पर सब हँसते रहते. छोटा बेटा अपूर्व, जमीन पर बैठ..पूरा शरीर उठा केले के पत्ते पर झुकता और फिर वापस बैठ जाता. पूरे खाने के दौरान उसकी उठक-बैठक चलती रहती. और सब अपना खाना छोड़ उसे देख हँसते रहते. बड़े बेटे अंकुर को जब राजी ने, चावल पर साम्भर डालने के लिए कहा, "मेक अ वेल"...तो वह अबूझ सा देखता रहा, "वेयर...हाउ"
तीन तरह के पायसम, तस्वीर में मिसिंग हैं.
फिर राजी ने अपने बेटे के पत्ते की तरफ इशारा किया, "लाइक आदित्य" और तब वह समझा...ओह्ह!! चावल के बीच में गड्ढा सा बनाना है, साम्भर के लिए. तब से अबतक, साम्भर परसने के पहले मजाक में सब एक दूसरे को कहते हैं.."मेक अ वेल"

ओणम पर परोसी जाने वाली चीज़ों की भी एक निश्चित जगह होती है. और खाने का तरीका भी. सबसे पहले थोड़े से चावल को दाल और घी के साथ खाया जाता है,उसके बाद साम्भर और दूसरे व्यंजनों की बारी आती है. केले के पत्ते बिछाने के तरीके भी, ख़ुशी में और गम में अलग अलग से होते हैं. एक अलग सी बात देखने को मिली. उत्तर भारतीयों में जबतक पूरी पंगत ना खा ले, नहीं उठते. और केरल में जूठे हाथ बिलकुल नहीं बैठते. चाहे किसी बुजुर्ग ने अपना खाना ना ख़त्म किया हो..आपको हाथ धोने उठ जाना पड़ेगा. जूठे हाथ बैठना बुरा माना जाता है.

पता नहीं क्या बात थी..अब याद भी नहीं :)

इस साल की ओणम कुछ ख़ास थी क्यूंकि हमारे ग्रुप की एक सहेली, इंदिरा शेट्टी ने सुनहरे बोर्डर वाली क्रीम कलर की ,एक जैसी केरल की पांच पारंपरिक साड़ियाँ हम सहेलियों को गिफ्ट की थी और ओणम के दिन पहनने का आग्रह किया था. कुछ ऐसा संयोग बना कि इंदिरा और वैशाली उस दिन हमारे साथ नहीं आ सकीं. इंदिरा को मैंगलोर जाना पड़ा और वैशाली को अपने भाई के एंगेजमेंट में. पर तंगम रोड्रिक्स, राजी अय्यर और मैने कुछ और सहेलियों के साथ बहुत एन्जॉय किया. तंगम, कैथोलिक है पर सारे हिन्दू त्योहार में बड़े शौक से शामिल होती है..सुबह सुबह वो ही गाड़ी लेकर हमारे लिए गजरे लाने गयी.

आकाशवाणी वालों को भी पता नहीं क्या इन्ट्यूशन हो गया, उनलोगों ने पिछली बार की तरह इस बार भी ओणम पर एक वार्त्ता का भार मेरे सर पर ही डाल दिया...इंदिरा और राजी ने मलयालम शब्दों के सही उच्चारण सिखाने में बहुत मेहनत की (वो अलग बात है कि जब रेडिओ पर सुना तो सर पीट लिया....कई शब्द मैं गलत बोल गयी :) पर भली हैं बिचारी...हिंदी बोलते बोलते अचानक मलयालम में स्विच करने की मजबूरी को समझ कर माफ़ कर दिया )...आप भी सुनिए..

और ये ऑडियो पोस्ट करने में , विवेक रस्तोगी जी और महफूज़ ने बहुत सहायता की. उनकी सहायता से ही कामयाबी मिली. गोनी भर के शुक्रिया आप दोनों को :)




  


राजी (अय्यर), तंगम , राज़ी  (मेनन) के साथ,


राजी,तंगम, सीमा, राज़ी, मैं
कैल्विन, अपूर्व,आदित्य,(बेचारे कैल्विन को चम्मच चाहिए )
कितने मगन हैं सब खाने में

सहेलियों ने नया नाम दिया,'रश्मिम रविजम '

47 comments:

Vivek Rastogi said...

इतने सारे व्यंजन एक साथ देखकर मन ललचा गया। त्यौहार जब आते हैं तो कितने व्यंजन खाने को मिलते हैं वाकई ।

आप सहेलियाँ एक जैसी साड़ी में अच्छी लग रही हैं।

और ओणम पर इतनी सारी जानकारी आपकी वार्ता से मिली पहली बार ।

नाम अच्छा लगा "रश्मिम रविजम" :)

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

रेश्मी चेच्ची!! ओणासम्सगल!! इतना सारा व्यंजन देखकर बहुत कुछ याद आ गया...एगो पोस्ट लिखना बाकी है अभी...ओणम तो राजा बाहुबलि के आगमन के खुसी का त्यौहार है,समझ में नहीं आता कि इसको हिंदू या कैथलिक या मर्थमा से जोड़कर कहे देखा जाता है..
अच्छा लगा...

P.N. Subramanian said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति. कमेंटरी तो जानदार रही.

VICHAAR SHOONYA said...

ओह बेहतरीन ...मेरा मतलब सब कुछ...पुलकम, व्यंजनम, साडिम, सहेलिम और 'रश्मिम रविजम'....

'अदा' said...

अई अई यो...
रश्मि रविजम, आपुडिया
कितना थोदम थोदम काना काती....
कितन सुनदरम सुनदरम साडी पहनती....
कितना मधुरम मधुरम बोलती....
मेरे को बी ये साडी मांगता.....
लाजवाब है, बेमिसाल है...कमाल है...
बहुत अच्छा लगा सबकुछ...

ashish said...

अब इतने सारे व्यंजन देखकर तो भूख लग आई और मै रावण के देश में , होटल के कमरे मै बैठकर, चित्रों को देखने के सिवा और क्या कर सकता हूँ.वैसे आडियो सुनकर अच्छा लगा ,पूकलम याद रखूँगा , और केरला स्पेशल साड़ी में आपको देखकर वसुधैव कुटुम्बकम , यथार्थ जैसा लग रहा है.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

इसीलिये ओणम को केरल का प्रेम और भारत का अभिमान कहते हैं..... सुन्दर वाचन शैली और शुद्ध स्वराघातों से पूर्ण वार्ता सुन के आनंदित हुए हम
बालिके..... कितना अद्भुत है, हमारा देश और परिवेश! अलग-अलग संस्कृतियों के लोग जब एक दूसरे के त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं, तो
कितना अच्छा लगता है.
केरल के व्यंजनों में मुझे भी अवियल, पायसम और रसम के नाम ही याद हैं :) तुम्हारे साथ अब तमाम नाम अभी तो याद कर ही लिये हैं :) भोजन करने के तरीके पर खूब अच्छी जानकारी दी. तस्वीरें तो सुन्दर हैं ही. तुम तो एकदम केरेलियन लग रही हो... सुन्दर वेशभूषा...बढिया पोस्ट.

बी एस पाबला said...

रश्मिम रविजम

ऑडियो तो घर जा कर सुन पाउँगा, वैसे भोजन देख लालच आ रहा

त्योहारों का मजा ही कुछ और होता है

rashmi ravija said...

@अदा
ऐसी साड़ी लिए तुमको इण्डिया आना मांगता....अब इसी बहाने एक चक्कर लगा लो :)

rashmi ravija said...

@ वंदना
अब जब रेडिओ वाली ने सर्टिफिकेट दे दिया फिर क्या बात है...शुक्रिया मैडम :)
पर लगता है मुझे unedited version सी डी में डाल कर दे दिया...पॉज़ हैं कई जगह..:( मैने भी पोस्ट करने के बाद ही सुना :(

indu puri said...

रश्मिम रविजम ! नमस्कारम
ओणम की खुशी मे एक सदी ऍम बी मांगता.कितना क्युटम क्युटम(ही हा) लगती सब. साउथ का काना बी मेरा पूरा फेमिली लाइक करता.
इस बार केरल घूमने का अम सबको.तुमको और तुमारा आर्टिकल को उदर याद करेगा अम.
प्यार

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
कल (30/8/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

Sadhana Vaid said...

आपका संस्मरण बहुत ही रोचक और मधुर लगा ! अपने बचपन के दिन याद आ गए जब मैं भी अपनी विभिन्न प्रदेशों की कई सहेलियों के साथ हर पर्व का आनंद इसी तरह से उठाया करती थी ! अब कल स्वदेश लौटना है ! भारत आकर ही ब्लॉग को समय दे पाऊँगी ! तस्वीरों ने हर पकवान का स्वाद बरबस याद दिला दिया ! केले के पत्तों पर खाने का यह अनुभव बहुत मनभावन होता है मेरे लिये भी ! बहुत आनंद आया आपका आलेख पढ़ कर ! बधाई एवं शुभकामनाएं !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह ..मज़ा आ गया इस संस्मरण को पढ़ कर और रिकॉर्डिंग सुन कर ....रश्मिम रविजम नाम भी बहुत बढ़िया है ....एक सी साड़ियों में गज़ब ढा रही हो सब ...और भोजन ...वाह क्या कहने ..देख कर ही आनन्द आ गया ..

ali said...

मिलजुलकर त्यौहार मनाते हुए दिखना बेहद सुखद लगता है ! हम एक दूसरे को बेहतर जान सकते हैं ! करीब आ सकते हैं ! केले के पत्ते पर पहली बार खाते हुए मैं भी हक्का बक्का था :)

प्रवीण पाण्डेय said...

आनन्द आ गया पढ़कर, देखकर व सुनकर। मन ललचा गया व्यन्जन देख कर। केल्विन जी को चम्मच दे दी जाये। आपका नाम ठीक ही रखा है।

डॉ टी एस दराल said...

ओणम के बारे में अच्छी जानकारियां प्राप्त हुई ।
ज़मीन पर बैठकर पत्तल में खाने का दृश्य देखकर बचपन याद आ गया ।
लेकिन चम्मच की कमी तो हमें भी खलती है ।
बढ़िया रही कमेंट्री ।

शोभना चौरे said...

वाह जी आप तो छ गये जी बहुत ही रंगीली पोस्ट ओणम की |अप्पम नहीं खाया क्या ?
और अदाजी से कहना मेरे पास तो ऐसी ही साड़ी है" हाँ नहीं तो "
बहुत सुन्दर जानकारी से परिपूर्ण पोस्ट |वार्ता कैसे सुनु ?

दीपक 'मशाल' said...

रोचक, ज्ञानवर्धक और बेहतरीन पोस्ट रही दीदिम.. :) और मुझे तो पता ही नहीं चला कौन सा शब्द आपने गलत बोला.. :)

राज भाटिय़ा said...

ओणम की सभी को बधाई, लेख बहुत पसंद आया ओर आप की आवाज मै कमेंट्री भी सब को भाई,लेकिन आप ने लिखा नही की खुशी ओर गम मै खाने के लिये केले के पते केसे रखते है, ओर कुछ खाने के नियम भी बताती, क्योकि शायद अगले साल हम केरला घुमने आये, कहां यह तो पता नही यह हमारे टुर वाला ही बतायेगा, हम ने यहां केरला को चित्रो मै देखा बहुत पसंद आया, किस मोसम मै केरल मै आना चाहिये यह जरुर लिखे, धन्यवाद

सतीश पंचम said...

अई अई यो.....क्या नाम जी......रश्मिम रविजम्.........वाह वाह :)

बढियम् रिपोर्टिंगम् :)

बी एस पाबला said...

अब सुना है ऑडियो। बढ़िया है विवरण। बस नाईनटीन सिक्सटीन वन खटक गया :-)

Divya said...

.
स्वादिष्ट भोजन वाली अति सुन्दर पोस्ट ।
.

ankit narayan said...

भाई वह मान गए आपको...
हर चीज़ का बहुत ही सटीक और सजीव वर्णन..

Sanjeet Tripathi said...

रश्मिम रविजम wah wah... kya dhansu naam diyaa gaya hai aapko, abse aapko apan isi naam se yaad rakhenge aur sambodhit bhi karenge ji.

kele ke patte par aaj tak 2 bar khaaya hai lekin jis tarike se aap kah rahi hain ki iski bhi ek bakayda vidhi hoti hai uske baare me to no idea....

Audio file mere is firefox me to sun ne ka option dikh hi nahi raha ji, ab subah dekhta hu ki IE me agar sun sakun to... muaafi

वाणी गीत said...

सुन्दर रंगोली , सुन्दर भोजनं , सुन्दर 'रश्मिम रविजम '....
ओणम के त्यौहार की बहुत सुन्दर सौगात मिली तुम्हे और तुमने इसे सबके साथ बांटा भी इतने ही सुन्दर तरीके से ...
दक्षिण भारतीय खाने का स्वाद केले के पत्ते पर ही आता है ...
सुन्दर पोस्ट ...!

रेखा श्रीवास्तव said...

rashmim jee,

थोड़ी देर के लिए मलयाली बनाना अच्छा लगा . विस्तार से वर्णन तो और भी अच्छा लगा. ओणम देखा नहीं है लेकिन ओणम वालों की संस्कृति से काफी परिचित हूँ, पिछले ४ सालों से उनके साथ काम करने से ये सब देखा है. इन सब चीजों का अपना अलग ही मजा होता है.

Udan Tashtari said...

ऑडियो से मिली जानकारी बहुत बढ़िया रही. अच्छा लगा सभी सहेलियों को एक परिधान में देख और खाना!!!!!यमी यमी..मेरी कमजोरी...लालच लग गई. :)

अशोक बजाज said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
धन्यवाद !

सारिका सक्सेना said...

रश्मि दी आपकी आवाज़ और वार्ता दोनों बहुत अच्छी लगीं. और एक सी साड़ियों में आप और आपकी सहेलियां भी.

महफूज़ अली said...

ऑडियो तो मैंने ३ ३ बार सुना है.... आपकी अवाज़ में बहुत अच्छा है.... सुनाने का तरीका तो लाजवाब है.... पोस्ट बहुत ही नौलेजैबल और इन्फोरमैटिव है ..... मैं लेट इसलिए हो गया क्यूंकि मुझे कल अचानक से गोरखपुर निकलना पड़ गया था.... सुबह ही वापस भी आया हूँ....

रश्मि प्रभा... said...

munh me paani aa gaya

संगीता पुरी said...

चित्र और ऑडियो से सजी एक उत्‍तम पोस्‍ट .. ओणम के बारे में इतनी अच्‍छी तरह से जानकारी पहली बार मिली !!

डॉ महेश सिन्हा said...

सुंदर प्रस्तुति

ओशो रजनीश said...

बहुत ही अच्छा लगा इस त्यौहार के बारे में जानकर ...... ऑडियो अभी सुना नहीं है .....लेकिन सुनेंगे जरुर

कुछ लिखा है, शायद आपको पसंद आये --
(क्या आप को पता है की आपका अगला जन्म कहा होगा ?)
http://oshotheone.blogspot.com

दिगम्बर नासवा said...

वाह .. सुंदर चित्रों से सजी पोस्ट ... ओनम की आपको बहुत बहुत बधाई ... हमारे दुबई में तो ये ख़ास मनाया जाता है अधिक तर दक्षिण भारतीय लोगों हैं यहाँ पर ...

Rajendra Swarnkar said...

रश्मिम रविजम जी
बहुत अच्छी ध्वनि आ रही है उच्चारण में …
र श् मि म् … र वि ज म् … !
… और , आपकी ख़ूबसूरत आवाज़ में ओणम संबंधी आलेख सोने पर सुहागा है ।
पूरी पोस्ट शानदार है ! बेमिसाल है !
बधाई बधाई बधाई
आप छांटलें कौनसी बधाई किस बात के लिए है !!
शुभकामनाओं सहित …

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Divya said...

.
चित्र में सबसे सुन्दर आप ही लग रही हैं।
[ smiles ]
.

rashmi ravija said...

नहीं दिव्या...मेरी सहेलियाँ ज्यादा ख़ूबसूरत हैं...और सिर्फ फोटो में ही नहीं....सामने से भी...They are gorgeous
और उनकी दिल की खूबसूरती तक तो पहुँच पाना भी मुश्किल..:)

चन्द्र कुमार सोनी said...

happy onam.
देश की संस्कृति और त्योहारों पर जो ख़तरा मंडरा रहा हैं, और लोगबाग (खासकर युवा पीढ़ी)त्योहारों से दूर होती जा रही हैं, उससे मैं चिंतित हूँ.
आपके ब्लॉग-पोस्ट को पढ़कर मेरी चिंता कम हुई हैं.
बहुत-बहुत धन्यवाद.
happy onam.
WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

shikha varshney said...

अई अई यो रश्मिम! कितना सुन्दर पोस्ट लगाया तुम ..और कितना अच्छा बोला जी ..हमकू तो समझ नई आता कि तुमकू देखे ,ये खाना देखे ,कि तुम्हारा आवाज़ सुने जी

vaishali said...

wowww n yummm really missed out this yr....n so well described rashmi aisa laga jaisi mai bhi wahi thi...anywys will dfntly join n wont miss nxt yr tab aapke paas aur bhi hoga likhne...

शरद कोकास said...

अय्यो रश्मि अम्मा ..अति सुन्दर ।

अरुणेश मिश्र said...

उत्कृष्ट वर्णन ।

abhi said...

अरे दी क्या बात है, आपकी कमेंटरी तो कितनी अच्छी है :)
और तस्वीरें बहुत सुन्दर..
सारे व्यंजन भी बड़े अच्छे दिख रहे हैं...खाने का दिल कर रहा है :)
और मुझे तो बहुत कम मालूम था ओणम के बारे में..बहुत सी जानकारियां मिली

Deepak Shukla said...

रश्मि जी...
कल जमाष्ट्मी में कुछ व्यस्त हो गया और फिर बाद में नेट कट गया.... लोग कहते हैं "देर आयद दुरुस्त आयद"...जाने "दुरुस्त आयद" है की नहीं पर "देर" जरूर है....आशा है आप इसे क्षमा करेंगी....

में जिस विभाग में सेवारत हूँ उसमे केरल के लोगों का प्रतिशत ज्यादा है...और तकरीबन हर जगह राधा-कृष्ण के मंदिर के साथ अयप्पा स्वामी का भी मंदिर होता है....ओणम हमारे यहाँ होली दीवाली की तरह मनाया जाता है और उसमे सद्या-भोज का अपना ही एक मजा है....वो चाहे पायसम हो या अवियल....केरल की हर डिश को हम उतने ही चाव से खाते हैं जितना ईद में सिवायीं और होली में गुजिया को खाते हैं... हमारे यहाँ ये गोल्डेन किनारी की क्रीम रंग की सारियां पहने मलयाली युवतियों का नृत्य "तिरुवादिरा" की छटा भी निराली होती है...(आपने देखा ये नृत्य).....कुल मिला कर जिस किसी ने ओणम को नज़दीक से देखा है वो अवश्य इस से अभिभूत होगा....

सुन्दर पोस्ट....सुन्दर चित्र...

दीपक...

सतीश सक्सेना said...

हमें तो यह पोस्ट अधिक मजेदार लगी ! बिलकुल केरालाईट रश्मिम रविजम ! शुभकामनायें !