Wednesday, December 29, 2010

गोवा की रंगीनियाँ क्रिसमस में

राजेश,शशि, नवनीत,निखिल और मैं
मैने अपनी रेल यात्रा के  संस्मरण कई बार लिखे हैं....मेरी विदाउट रिजर्वेशन और विदाउट  टिकट वाली  यात्रा संस्मरण पढ़, समीर जी ने टिप्पणी भी की थी."अब कुछ और बचा हो जैसे रेल की छत पर बैठ कर यात्रा करना आदि तो वो भी सुना ही डालो लगे हाथ. :) "
ऐसी नौबत तो खैर नहीं आई, कभी ...(और अब क्या आएगी )

पर कई बार कार,बस, और प्लेन की यात्रा भी किन्ही ना किन्ही वजह से यादगार बन गयी है...एक बार इन्ही दिनों  मैं गोवा में थी...हर साल ये दिन जरूर याद आ जाते हैं. मुंबई से पास होने की वजह से कई बार गोवा जाना हुआ है.(वैसे राज़ ये है कि Three men in my house को यही destination ज्यादा पसंद है...एकदम इन्फोर्मल सा वातावरण , shorts में काम चल जाता है ....ज्यादा कपड़े नहीं  पहनने पड़ते..और समंदर का आकर्षण तो है ही )

वंदना अवस्थी दुबे ,प्रवीण पाण्डेय जी और भी कई लोगो के संस्मरण पढ़े हैं,गोवा से सम्बंधित.

 पर मेरी सलाह है किसी को गोवा जाना हो तो क्रिसमस के आस-पास ही प्लान करे. मौसम खुशनुमा होता है. सैलानियों की चहल -पहल होती है और हवाओं में ही एक रवानगी होती है. मेरी सबसे यादगार गोवा-यात्रा क्रिसमस के दौरान वाली  ही है.

इसलिए भी कि बस की यात्रा भी बहुत रोमांचक रही...एक सीमा तक भयावह भी.


हमलोग तीन परिवार ने स्लीपर  बस से गोवा जाने का प्लान किया. स्लीपर बस में ट्रेन की तरह  ऊपर वाली सीट गिरा दें तो दोनों तरफ की सीट मिलकर एक बड़ा सा चौरस बेड बन जाता है. साइड बर्थ भी था ट्रेन की तरह ही. सफ़र बहुत मजे में कट रहा था. सब लोग... बिहारी,मराठी, और बंगाली व्यंजनों  का आनंद लेते हुए...कभी कार्ड खेलते तो कभी अन्त्याक्षरी जमती. बच्चे भी अपने ग्रुप में मगन थे. बिलकुल पिकनिक जैसा  माहौल. ग्यारह के करीब  हमलोग सोने गए.

मैने अपने लिए साइड बर्थ चुनी {औरत त्याग की मूरत....:( } .लेकिन ये पता नहीं था ट्रेन और बस की साइड बर्थ में इतना फर्क है. बस, तेज रफ़्तार से घाटियों के बीच से गुजर रही थी..बार-बार टर्न लेती और मुझे लगता...मैं, अब गिरी की तब गिरी .नींद आनी तो दूर, पलकें तक नहीं झपक रही थी. पास वाले हैंडल  को जोर से पकड़ रखा था कि कहीं गिर ना जाऊं. वरना पूरी यात्रा में मेरा मजाक बनता रहता. वैसे ही हिचकोले खाते रास्ता तय हो रहा  था...और अचानक अजीब सी गड़गडाहट सी आवाज़ हुई बस के इंजिन से...और तेजी से किनारे की तरफ जाती बस अचानक रुक गयी. सबलोग इस आवाज़ से जाग गए. ड्राइवर ने बताया कुछ खराबी आ गयी है और किसी तरह उसने बस रोकी है. जब हमारे ग्रुप के पुरुषों ने उतर कर देखा तो पाया,बस का सामने वाला एक पहिया रास्ते के बिलकुल किनारे था और नीचे गहरी खाई थी. बस, कुछ इंचो से नीचे लुढ़कने से बची थी .


रात के दो बज रहे थे. सुबह होने में काफी वक्त था. उस पर से निखिल वैद्य ने नीचे उतर कर देखा और कहा कि 'बस' एक पीपल के पेड़ के नीचे रुकी हुई है. और आज अमावस्या है. पीपल के पेड़ पर भूत रहते हैं. शशि और रेखा की हालत तो वैसे ही  खराब  हो गयी. वो तो मुझे भूत से डर नहीं लगता,वरना खिड़की के पास मेरा ही बेड था. अचानक पीछे से एक गाड़ी बस से  कुछ इंच की दूरी  से निकली. तब सबका ध्यान गया कि हमारी 'बस', पतली सी सड़क पर तिरछी होकर रुकी थी. और उसकी हेडलाईट,टेल-लाईट  सब खराब हो चुके थे . अगर अँधेरे में  किसी दूसरी गाड़ी से पीछे से जरा सा भी धक्का लगता तो बस  गहरी खाई में चली जाती. इन पुरुषों को एक उपाय सूझा. इनलोगों  ने हमारे पर्स से छोटा आईना लिया और बस के पीछे जाकर खड़े हो गए. जहाँ किसी गाड़ी की आवाज़ आती ये लोग शीशा चमकाते,दूसरी गाड़ी की हेडलाईट पड़ते ही शीशा चमक उठता और उन्हें हमारी बस का पता चल जाता. पूरी रात,नवनीत (मेरे पतिदेव) ,निखिल और राजेश, और बस के ड्राइवर,कंडक्टर भी बारी-बारी से शीशा चमकाते रहे.


सुबह हुई तो देखा,हमलोग बीच जंगल में हैं. काफी दूर एक छोटी सी चाय की दुकान मिली. वहाँ  हमलोगों ने उनलोगों से बहुत ही महंगे दामो में पानी खरीद कर एक-एक ग्लास पानी से किसी तरह ब्रश किया और चाय पी. वैसे वे बेचारे भी काफी दूर से पानी ढो कर लाते थे. .बच्चों की तो मस्ती शुरू हो गयी,...वे वहीँ धमाचौकड़ी  मचाने लगे.. कभी पेड़ पर चढ़ते..कभी पत्थरों के पीछे छुपते. हमलोगों को गोवा पहुँचने  की टेंशन के साथ ,बच्चो पर भी ध्यान रखना पड़ रहा था.


पीछे से आती गाड़ियों से लिफ्ट माँगने का सिलिसला शुरू हुआ. बाकी लोग तो दो-दो ,तीन-तीन के ग्रुप में थे. उन्हें आनेवाली गाड़ियों में जगह मिल गयी.पर हमारा बारह लोगो का ग्रुप था. इतनी जगह तो किसी भी गाड़ी में नहीं थी.फिर कंडक्टर को पैसे देकर आगे भेजा...और उस से कोई सुमो या मिनी बस  किराए पर लाने को कहा गया. तब तक गाड़ी के  इंतज़ार में हम भी जंगल में मंगल मनाते रहे.


एक बार गाड़ी आ जाने पर शाम तक हमलोग गोवा पहुँच गए. होटल  की बुकिंग तो पहले से ही कर रखी थी. इतनी थकान के बावजूद, हमलोग फ्रेश होकर तुरंत ही बीच की तरफ निकल लिए.

क्रिसमस में गोवा की रौनक देखते  ही बनती है .हर घर के बाहर रंग-बिरंगी बत्तियों की झालर, और बड़ा सा स्टार लगा हुआ  था.वहाँ  की हवा में ही कुछ ऐसी उमंग और ऐसा उछाह था कि कुछ ही घंटो बाद पूरे ग्रुप ने एकमत से निश्चय किया कि क्रिसमस ही नहीं न्यू इयर भी गोवा में ही मनाएंगे .  इन दिनों विदेशी सैलानियों का हुजूम भी गोवा का रुख करता है. हालांकि यह भी पढ़ा कहीं कि गोवा आना सबसे सस्ता पड़ता है उन्हें, इसीलिए वहाँ के निम्न और मध्य वर्ग गोवा का रूख करते हैं.

वहाँ देखा ,हर होटल के सामने एक शेड बना एक्स्ट्रा चेयर्स लगा कर होटल का एक्सटेंशन कर दिया गया था. ऐसी ही एक जगह ,एक विदेशी महिला को  चाय के ग्लास में 'पाव' डुबो कर खाते देखा. चारो तरफ ,म्युज़िक बजता रहता है...और लोग सड़को पर ही डांस करने लगते हैं. कई विदेशी महिलाएँ अकेली भी आई थीं. और लोकल लड़के उनके लिए गाइड का काम कर रहे थे. देखा मैने, वे उनके साथ ही समंदर में जातीं, होटल में साथ बैठ खाना भी खातीं. रेत पर बियर की बॉटल भी शेयर करतीं. कुछ भी एन्जॉय करने को एक साथी तो होना ही चाहिए,चाहे वो अजनबी...गोअन गाइड ही क्यूँ ना हो.


बियर तो गोवा में शायद पानी की तरह बहती है. मेल-फिमेल का कोई विभेद  नहीं. किसी पुरुष ने एक बियर ऑर्डर की नहीं कि वेटर दो ग्लास लेकर हाज़िर हो जायेगा.एक कपल शायद हनीमून के लिए  आया था. लड़की अपने  पीले रंग के  सिंथेटिक सूट और दो लम्बी चोटियों में लगे लाल मोटे रबर-बैंड के साथ लगता था, किसी यू.पी या बिहार के गाँव से सीधी उठ  कर आ गयी थी.पर जिस आत्मविश्वास के साथ वो बियर सिप कर रही थी,वो मुझे हैरान कर दे रहा था.


गोवा की प्राकृतिक सुन्दरता के बारे में तो इतना लिखा जा चुका है कि नया क्या लिखूं...हाँ, वहाँ एक बहुत ही सुन्दर जलप्रपात है "दूधसागर" वहाँ
  बहुत कम लोग जाते हैं. पर उस जलप्रपात तक पहुँचने कि यात्रा बहुत ही रोमांचक है....आधी दूरी तक एक वाहन ...फिर उसके बाद खुली हुई जीप और फिर  पैदल ही काफी दूरी तय करनी पड़ती है......जिसमे लकड़ी के पुल भी पार करने होते हैं. झरने के आनंद से ज्यादा उस यात्रा का आनंद  उठाने के लिए  जाना चाहिए.

क्रिसमस के दौरान रिवर क्रूज़ की रौनक भी थोड़ी सी ज्यादा थी. मांडवी नदी पर तैरता छोटा सा जहाज , रंग बिरंगी रोशनी में नहाया हुआ था और डेक पर बड़े, बूढे,बच्चे सब तेज संगीत पर थिरक रहे थे. सैंटा क्लॉज़ का ड्रेस पहने व्यक्ति किसी को बैठने ही नही दे रहा था. हमारे ग्रुप पर कुछ ख़ास ही मेहरबान था.और ग्रुप के बाकी सबलोग मुझपर मेहरबान थे. वो दिन ही कुछ ऐसा था. मेरे बर्थडे पर मुझे क्वीन या प्रिंसेस की तरह फील करवा आराम से बैठे रहने देना चाहिए था.पर  जरा सा सबकी  नज़र बचा कर  सांस लेने बैठती  ..और कोई ना कोई उठा ही देता .
 
बर्थडे का जिक्र आ  ही गया. सोचा था लास्ट  इयर की सरप्राइज़ पर तो पोस्ट लिख ही डाली  थी. उसके पहले मिले  सरप्राईज्स पर भी एक पोस्ट लिखी थी. इस बार ब्लॉग पर जिक्र नहीं करुँगी {रहेगा ही क्या, नया करने को ...:)} पर कुछ नई और मजेदार बातें हो ही गईं. एक तो बेटे ने अपने फेसबुक का स्टेटस  लगा दिया, " टुडे इज माइ मॉम्स बर्थडे " और उसके छः सौ फ्रेंड्स में से छुट्टियों में ज्यादातर ऑनलाइन रहते हैं.....दिन भर उसका फोन ,FB के अपडेट्स से टुनटुनाता   रहा, . मेरे फोन ने भी अच्छी संगत दी.:)

कुछ फोन कॉल्स  ने भी चौंका दिया. सुदूर कश्मीर की घाटियों और सात समंदर पार से ब्लॉगर मित्र के कॉल्स ,एक्स्पेक्ट नहीं किए  थे . ब्लॉग, इमेल, फेसबुक, एस.एम.एस से तो बधाइयां मिली हीं...अब जिन्हें नहीं पता था. ये पोस्ट पढ़ कर दे डालेंगे :). ऐसे ही थोड़े ना कहते हैं..
.ये दिल मांगे मोर 

पर मजेदार रहा..मेरी फ्रेंड्स का गिफ्ट. उनलोगों ने मुझे एक किलो प्याज ,गिफ्ट किया. अब इस पर   हंसू या रोऊँ..समझ में नहीं आया...(रोना तो पड़ेगा ही छीलते हुए )


दरअसल कुछ ही दिनों पहले ऐसे ही, मैने फोन पर थोड़ी शान बघारी,"पता है, मैं प्याज डालकर सब्जी बना रही हूँ"
"कितनी रिच हो ना..".राजी मेनन का जबाब था
"और क्या... हम नॉर्थ इंडियंस तो बिना प्याज के कुछ भी नहीं बनाते."..थोड़ा और रौब जमाया

और इनलोगों ने मुझे प्याज गिफ्ट करना तय कर लिया. मैने कहा था, गिफ्ट करते हुए फोटो भी लूंगी और ब्लॉग पर लिख दूंगी...वे और खुश हो गयीं..."हाँ, सब सोचेंगे .... कितना थॉटफुल  गिफ्ट दिया है,हमने" .पर गप-शप में फोटो लेना  ही भूल गयी...हाँ , प्याज की फोटो जरूर ले ली :) आधा किलो प्याज पहले से ही पड़ा था घर में यानि कि डेढ़ किलो प्याज मेरे घर में हैं....Thanx friends for making me feel like a queen :)


आप सबो का नव वर्ष ,हर्षोल्लास से भरा मंगलमय हो..नव-वर्ष की असीम शुभकामनाएं 

61 comments:

डॉ टी एस दराल said...

जंगल में मंगल का अनुभव बड़ा भयावह रहा ।
एक बार हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ था , पंजाब में ।
सच गोवा की खूबसूरती देखते ही बनती है ।
डेढ़ किलो प्याज़ --कहीं आप पर होर्डिंग का आरोप न लग जाए जी । :)

ajit gupta said...

जंन्‍मदिनांक क्‍या है यह तो बताया ही नहीं। चलिए जन्‍मदिन की शुभकामनाएं। गोवा का आनन्‍द इस बार भी लीजिए।

abhi said...

"औरत त्याग की मूरत....:( " और ".मैं, अब गिरी की तब गिरी ." तक तो जबरदस्त हंसी आ रही थी...फिर एकाएक बस गिरते गिरते बची सुन के सारी हंसी उड़ गयी...

वैसे दीदी गोवा में बीअर पानी की तरह मिलता है ये बात बहुत लोगों से सुन चूका हूँ.....और गोवा की बडाई भी कई से सुनने को मिला है...मुझे भी जाना है गोवा लेकिन कब पता नहीं :(

और हाँ...
प्याज वाली बात मस्त थी :D

abhi said...

"Thanx friends for making me feel like a queen :)"

-ये लाईन बहुत प्यारा लगा :) कारण भी है कुछ :)

Rangnath Singh said...

आपको नववर्ष की शुभकामनाएं :-)

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

मज़ा आ गया संस्मरण पढकर... लगा बस की तरह हँसी के हिचकोले खा रहा हूँ... गोवा परमैंने भी एक फोटो फ़ीचर लिखा था... ख़ैर यह जगह है ही ऐसी कि जितना लिखें उसमें समा ही नहीं सकता..
और अंत में तो आपकी पोस्ट पर आँखों में आँसू भर आए!!

anshumala said...

रश्मि जी

जन्मदिन की देर से ही सही बधाई आज ले लीजिये और नए साल की बधाई अग्रिम ले लीजिये |

गोवा के क्या कहने सच में बहुत खुबसूरत जगह है |

रेखा श्रीवास्तव said...

रोमांचक अनुभव रहा गोवा की सैर का. इतना प्याज मिलने पर मुझे ईर्ष्या हो रही है . जन्मदिन की एक बार फिर से बधाई.

मनोज कुमार said...

अद्भुत।

आपकी लेखनी .. गोवा की तरह .. अद्भुत!!

हम तब गए थे गोआ जब एक हादसे के बाद दूसरा जन्म मिला था और जिस दिन ट्रेन पकड़ी थी उस दिन ही माथे का स्टिच खुला था।

.... पर समुद्र के किनारे बैठ अपने दोस्तों के ब्च्चों को सम्भालने का सात दिनों के प्रवास में इतना पुण्य कमाया कि दुबारा जा नहीं पाया।

स्वर्ग .... लोग कहते हैं कि कश्मीर है, पर मुझे तो लगा कि उस दौड़ में गोवा कहीं बहुत आगे है।

सिर्फ़ बर्फ़ को छोड़ दें तो हर तरह के पर्यटन का आनंद मिल जाता है ... गोवा में।

बियर तो नहीं फ़ेणी का सुना था। एक बोतल भी (दावात के साइज का) लाया था जो ड्राइंग रूम की शोभा बढाते-बढाते अपनी मौत मर गया।

.... अरे रे रे ... मैं तो अपना ही संस्मरण लिखने लग गया ... गोवा का बखान पढो तो यह छूत तो लग ही जाती है ...!

मनोज कुमार said...

ओह संस्मरण मेरा स्वीकृति के बाद ... इंतज़ार

प्रवीण पाण्डेय said...

अहा, आप भी घूम आयीं, वृत्तान्त पढ़ मजा आ गया, पर बस का इस तरह फँस जाना दिल हिला गया। लहरों ने पूरा मजा दिया होगा।

मनोज कुमार said...

प्याज के बारे में तो लिखा ही नहीं ...!

अब इतनी क़ीमती उपहार से नवाज़ा है दोस्तों ने तो उसे सम्भाल कर रखिएगा ...मेरी तरह ड्राइंग रूम में नहीं, छुपा कर रखिएगा ... सुना है कि उसके घर में होने का पता लगने से इनकम टैक्स वाले रेड मार देते हैं ....!!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

रश्मि जी, आईने लेकर खड़े होने वाला आईडिया शेयर करने के लिए शुक्रिया, ऐसी स्थिति में किसी के भी काम आ सकता है...
और रही बात पोस्ट की, हर रंग से सजी है.
आने वाले नए साल की शुभकामनाएं.

rashmi ravija said...

@मनोज जी,
"... अरे रे रे ... मैं तो अपना ही संस्मरण लिखने लग गया ... गोवा का बखान पढो तो यह छूत तो लग ही जाती है ...!"

बस देर किस बात की...वैसे भी "दूसरा जन्म'.....'माथे का स्टिच' का उल्लेख बता रहा है कुछ तो गहरा है..शेयर कर डालिए हम सब से..इन्तजार रहेगा.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

कितनी एडवेन्चेरस यात्राएं हैं तुम्हारे खाते में!!! खतरनाक यात्राएं बाद में कहानियां बन जाती हैं, जिन्हे सुनने-सुनाने का एक अलग ही सुख है.
गोआ का यह जल-प्रपात तो हमने देखा ही नहीं.
और प्याज़...... :):):)
कई रंगों से सजी सुन्दर पोस्ट है ये.

फ़िरदौस ख़ान said...

जन्‍मदिन की शुभकामनाएं...

बहुत सुन्दर संस्मरण है...

राज भाटिय़ा said...

जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई जी, यात्रा तो बिलकुल ब्म्बे तो गोवा जेसी लगी फ़र्क बस इतना हे की आप को डाकू नही मिले:) धन्यवाद

सतीश पंचम said...

भोत ही राप्चिक संस्मरण है जी।

इतना कि लगभग आठ दस किलो प्याज इस संस्मरण पर वारे जा सकते हैं, ज्यादा लगे तो वापस कर दिजिएगा :)

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ साथ नये साल की भी शुभकामनाएं।

बी एस पाबला said...

जिज्ञासु साथियों के लिए यहाँ बताया गया है कि रश्मि जी का जनमदिन कब है

बी एस पाबला said...

बस यात्रा का बड़ा रोमांचक विवरण दिया है आपने मुस्कुराना चौंकना एक साथ ही हो गया

हम भी गए थे गोवा, यादें ताज़ा हो गईं

वाणी गीत said...

वाकई तुम्हारी हर यात्रा रोमांचक बन जाती है ...
गोवा है ही इतनी खूबसूरत जगह ...
जन्मदिन का सरप्राईज भी खूब रहा ...

संजय भास्कर said...

जन्‍मदिन की शुभकामनाएं।
आपको और आपके परिवार को मेरी और से नव वर्ष की बहुत शुभकामनाये ......

Sunil Kumar said...

गोवा सच में बहुत खुबसूरत जगह है |
जन्‍मदिन की शुभकामनाएं।

ललित शर्मा said...

रश्मि जी जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

गोवा यात्रा का सुंदर चित्रण किया है आपने। यूँ ही होती रहे यात्राएं और लगते रहे मेले।

शुभकामनाएं

rashmi ravija said...

@पाबला जी,
आपके गोवा वाले संस्मरण पढ़े हैं....सतीश पंचम जी से शब्द उधार लूँ तो एकदम राप्चिक संस्मरण हैं रियल राप्चिक :)

ब्लॉग पर मिली शुभकामनाओं से अर्थ आपके जन्मदिन वाले ब्लॉग का ही था. आप बहुत ही नेक कार्य कर रहे हैं...इतने अनजान लोगों से शुभकामनाएं पाकर सबके जीवन की कठिनाइयां दूर नहीं तो कम जरूर हो जायेगी...शुक्रिया

अरुण चन्द्र रॉय said...

रश्मि जी हम भी कई बार गोवा हो आये हैं.. एक बार दस लोगों का ग्रुप था.. कोलवा बीच पर गोवा टूरिस्म के होटल में ठहरे थे.. एक शाम पास के एक रेस्तरा में डिनर के लिए.. मेरा एक प्लास्टिक का फोल्डर छूट गया.. उस फोल्डर में गोवा से मुंबई का सेकेण्ड ए सी का दस लोगो का टिकट.. मुंबई से दिल्ली की दस लोगो की फ्लाईट की टिकट थी... और थे कोई डेढ़ हज़ार रूपये... रात को तीन बजे याद आया कि कहीं कुछ छूट गया.. तभी भागा उस रेस्तरा.. वहां लोगो को उठाया.. नहीं मिला. फिर एक वेटर ने कहा कि साहब यदि यहाँ छूटा होगा तो मिल जायेगा.. मैनेज़र साहब सुबह आठ बजे आयेंगे तब आना... फिर नींद कहाँ आयी... आठ बजे पहुंचा तो मैनेज़र मुझे दूर से देखते हुए मुस्कुरा उठा.. उसकी वह मुस्कान मुझे आज भी याद है गोवा की तरह.. ऐसी ईमानदारी देश के किसी अन्य भाग में नहीं है... आपका यात्रा संस्मरण बेहद रोमांचक है.. जन्म दिन की हार्दिक शुभकामना... प्याज़ का उपहार प्रकरण बढ़िया व्यंग्य है सिस्टम पर ..

rashmi ravija said...

@अरुण जी,
कुछ ऐसी ही घटना वंदना अवस्थी के साथ हुई थी,जिसका उल्लेख उसने अपनी पोस्ट में लिखा है

"सामान गाड़ी में लादा और हम भी साथ में लद लिये. गाड़ी ओल्ड-गोआ से होती हुई पणजी में प्रविष्ठ हुई , जहां से हमारा घर दस मिनट की दूरी पर था, तभी हमें याद आया कि हम अपना पर्स, जिसमें पांच हज़ार रुपये, मेरे सारे एटीएम कार्ड्स, पैन-कार्ड, पत्रकार संघ का आई कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र, घर की सारी चाबियां, पूरे लगेज की चाबियां साथ में वापसी के टिकट और मेरे सोने के दो कंगन थे, स्टेशन के बगीचे की फ़ेंस पर ही छोड़ आये हैं :(
ज़हूर भाई ने बिना कुछ कहे, गाड़ी मोड़ी और हम वापस स्टेशन चल दिये.
हमारी गाड़ी ने जैसे ही स्टेशन में प्रवेश किया, हमारे उतरने के पहले ही, वहां टैक्सी स्टैंड पर खड़े टैक्सी ड्राइवर आवाज़ दे के कहने लगे,
" मैम आपका पर्स यहां छूट गया था, हमने अन्दर जमा करवा दिया है."
दो-तीन टैक्सी-ड्राइवर हमारे साथ अन्दर गये, और स्टेशन मास्टर व्यंक्टेश को बताया कि हमारा ही पर्स उन्होंने जमा करवाया है, तब एक एप्लीकेशन लेने के बाद पर्स हमें दे दिया गया, हमने देखा, पूरा सामान ज्यों का त्यों था. विकी नाम के जिस टैक्सी ड्राइवर को पर्स मिला, उसने कहा कि
"मैने पहले पर्स खोल के देखा, कि यदि कोई फोन नम्बर मिल जाये तो हम खबर कर दें, लेकिन जब नम्बर नहीं मिला तो हमने जमा कर दिया"

पूरी पोस्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है
http://wwwvandanablog.blogspot.com/2010/05/blog-post_24.html

दीपक 'मशाल' said...

Poora padh liya di.. mujhe badhaai diziye.. :D

Mukesh Kumar Sinha said...

beer ki dariya bahti hui sun li.......aapne kitnee li ye nahi bataya..:)


aajkal pyaj ka value to sir chadd kar bol raha hai mam!!

aap khushkismat ho jo pyaj mil gaya gift me...:)

happy new year.......

rashmi ravija said...

@janaab Mukesh Kumar Sinha

agar lee hoti to bata hi diya hota....Goa me beer ki dariya bahti jaroor hai..par sabka us dariya me dubki lagana...goa jaane ki shart nahi hai..

Itna aapko maloom hona chaahiye...

Arvind Mishra said...

हौलनाक वाकया -मगर अंत भला सो सब भला ..
रही बात गोवा पर्यटन की तो निसंदेह भारत के सुन्दरतम पर्यटनों स्थलों में से यह एक है ,
गोवा के दर्जन भर समुद्र तट ,बिखरा नैसर्गिक और मानव सौन्दर्य ,फेनी का पहला स्वाद पहली बार तो किसी भी पर्यटक को रोमांचित कर देता है -हम तीन बार हो आये मगर बार बार जाने का मन है .
कोई सप्ताह भर का कार्यक्रम बनाये तब सभी तटों का अवलोकन हो पायेगा ....
यहं भी कुछ डूज और डोंट हैं -कभी चर्चा होगी !

राजेश उत्‍साही said...

अब तक गोवा जाने का संयोग नहीं बना। पर जब जाएंगे तो आपकी पोस्‍ट की बातें याद आएंगी ही।

shikha varshney said...

गोवा ,जन्म दिन और प्याज ..सब कुछ नायाब.

वीना said...

बहुत रोमांचक अनुभव रहा। नव वर्ष की बधाई...

Sadhana Vaid said...

बहुत ही शानदार बहुरंगी सस्मरण ! इसमें गद्य विधा के सभी रस समाहित हुए से लगते हैं ! यात्रा का विवरण किसी थ्रिलर फिल्म के रोमांच से ज़रा भी कम नहीं ! गोअया का सौंदर्य निश्चित रूप से बाहर आकर्षक है ! रिवर क्रूज का आनंद कोई आसानी से नहीं भुला सकता ! हर उम्र के लोगों को छोटे छोटे ग्रुप्स में बाँट कर वे लोग सबको थिरकने के लिये आमंत्रित करते हैं और डांस करवा लेते हैं ! आपने बहुत कुछ मधुर याद दिला दिया ! प्याज वाले नायाब तोहफे के लिये आपकी मित्र मंडली की सदाशयता के हम भी दिल से कायल हो गये ! वाकई आपकी सहेलियां बहुत थौटफुल हैं ! साभार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार करें !

रवि धवन said...

मस्त पोस्ट है। एक पूरा वीडियो बन सकता है इस पर।
और प्याज के महंगे होने का कारण भी अब हमें समझ आ रहा है। आपके बर्थडे पर साजिश के तहत सारे प्याज खरीद लिए गए।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

रश्मि,गोअन कल्चर की खासियत है ईमानदारी. मेरा देवर गोआ में पोस्टेड था, तब मेरी देवरानी एक चाट के ठेले पर अपना मंहगा मोबाइल छोड़ आई, घर आ के मोबाइल की याद आई. दूसरे दिन जब वे उस चाट वाले के पास पहुंचे, तो इनके कुछ बोलने के पहले ही उसने मोबाइल निकाल के दिया, और बोला कि आप इसे कल यहां छोड़ गये थे,मैने अपने लड़के को दौड़ाया लेकिन आपकी गाड़ी आगे चली गई थी.
ये है गोआ.

अन्तर सोहिल said...

रोचक संस्मरण
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें

प्रणाम

mamta said...

You made me nostalgic.....we have had a few most amazing vacations in Goa...the place has a real charm.......good post!!

Dorothy said...

अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.

आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.

शुभम जैन said...

di der se hi sahi janam din ki dher sari shubhkamnaye...goa vritant padh kar bahut ahccha laga...aur aapki saheliyan to bahut mazedar hai...sahi gift mila aapko... :D

nutan dashak k aagman per hardik shubhkamnaye...

अविनाश वाचस्पति said...

मतलब गोवा से पहले
मंगल के दिन जंगल
या जंगल में मंगल
इस्‍मत जी से नहीं मिलीं
मिलतीं तो मज़ा दूना होता
दूना हुआ तो चौगुना
और चौगुना हुआ तो ...
अब इस टिप्‍पणी को
शब्‍दों से क्‍यों भर दूं
प्‍याजो की जवानी
आनंद ही आनंद है गोवा में
एक हिन्‍दी ब्‍लॉगर पसंद है

खुशदीप सहगल said...

सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है,
यह हमारी आकाशगंगा है,
सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं,
कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी,
आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है,
किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह,
मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे,
आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं,
मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर,
उनमें से एक है पृथ्वी,
जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में,
इन्हीं में एक है महान सभ्यता,
भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए,
मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव,
भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव,
एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण,
नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार,
शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय,
यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
-डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

नववर्ष आपको बहुत बहुत शुभ हो...

जय हिंद...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

नये साल की अनन्त शुभकामनाएं. इसी तरह अपनी लेखनी से हमें मालामाल करती रहो.

Sanjeev said...

Hai Goa.. Goa.., Sunkar mera bhi dil Goa Goa ho gaya. Kab jaoonga Goa. Goa is really a very very Khoobsurat place for picnic. Goa ki khoobsurati ka kya kehna. Birthday gift me pyaz.. aha kya baat hai. par photo mat show kijiye warna government black marketing me aapko giraftar kar legi.
Aap itni sundarta se kaise likh leti hai. Itna sundar bayan karna. Suban allah........

रश्मि प्रभा... said...

main to bus me iska dhyaan rakhungi... aur koi mujhe bhi pyaaz gift kare... lakh lakh aashirwaad dungi

वन्दना said...

2 बार पढने की कोशिश की मगर हमेशा अधूरा रह गया सो सोचा जब पोस्ट चर्चा मे लूँगी तभी इत्मिनान से पढूँगी।
अब देर से ही सही…………जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें…………अरे बेबी नये वर्ष मे प्रवेश को कर लिया है ना।

आपकी अति उत्तम रचना कल के साप्ताहिक चर्चा मंच पर सुशोभित हो रही है । कल (3-1-20211) के चर्चा मंच पर आकर अपने विचारों से अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.uchcharan.com

H P SHARMA said...

आप का लेखन दिन प्रतिदिन ऐसे ही सशक्त होता रहे.

इस्मत ज़ैदी said...

रश्मि जी ,
आप कब आई थीं गोवा ??????
शायद तब हम एक दूसरे का नाम भी नहीं जानते थे लेकिन अब जानते हैं ,है न ??????
गोवा वाक़ई बहुत ईमानदार और ख़ूबसूरत जगह है
लेकिन आप ने जो रास्ते का हाल सुनाया वो पढ़ के मुझे अपनी पुणे -गोवा यात्रा याद आ गई ,
इस सुंदर और रोचक पोस्ट के लिए बधाई स्वीकार करें

ali said...

पीपल वाले भूत ने कोशिश तो बहुत की लेकिन क्रिसमस पार्टी में शामिल होने से रोक नहीं पाया आप सबको ! बस वाला घटनाक्रम काफी खतरनाक लगा !
यूपी बिहार की लड़की धडल्ले से बियर पी रही थी , हे ईश्वर :) वैसे वहां गए थे तो फेनी भी लेनी थी :)

शोभना चौरे said...

जन्म दिन मुबारक ,प्याज मुबारक |कितनी खुशनसीब है जो प्याज उपहार में मिले है वरना कांच के कटोरों का सेट कहाँ तक सम्भाले ?
गोवा वृतांत पढ़कर आनन्द अ गया |
मुझे धार्मिक जगहे पसंद है तो मेरे बेटे कहते है आपको गोवा अच्छा नहीं लगेगा \

rashmi ravija said...

@शोभना जी,
गोवा में बहुत सारे मंदिर और चर्च भी हैं...लता मंगेशकर (या शायद मंगेशकर परिवार ) द्वारा बनवाया बहुत ही भव्य मंदिर भी है. मैने उन सबके विषय में नहीं लिखा...क्यूंकि गोवा भ्रमण पर बहुत सारी पोस्ट आ चुकी हैं.
आपको गोवा भी बहुत पसंद आएगा...आप जरूर जाइए.

rashmi ravija said...

@इस्मत जी,
कई बार गोवा जा चुकी हूँ...पर अब जब भी आऊँगी..आपसे मिलना पक्का रहा :)

Er. सत्यम शिवम said...

बहुत ही सुंदर............
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए...
*काव्य- कल्पना*:- दर्पण से परिचय
*गद्य-सर्जना*:-जीवन की परिभाषा…..( आत्मदर्शन)

दिगम्बर नासवा said...

बस की हिचकोलों की तरह आपका मजेदार संस्मरण भी दिमाग़ में हिलता रहा ... एक बार जम्मू से कटरा जाते हुवे हमें भी ऐसा अनुभव हुवा था ... पर वो दिन का समय था .... गोवा में बीच तो सुने थे आपने जलप्राताप का सुंदर चित्र लगाया है ...
जनम दिल और नव वर्ष की आपको बहुत बहुत बधाई ... Vaise pyaaj ka asar Dubai tak bhi pahunch gaya hai ...

Rahul Singh said...

जहां जाइएगा हमें (प्‍याज) पाइएगा.

रचना दीक्षित said...

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ साथ नये साल की भी शुभकामनाएं।बहुत कुछ नया सीखा और समझ लिया इस पोस्ट से जैसे जब घर से बाहर निकलें पर्स में तो शीशा जरुर रखें. न जाने कब कहाँ कैसे किसके काम आ जाये.और हाँ मेरे पास भी प्याज़ है.... जरा बच के... हाँ.....

अविनाश said...

प्‍याजो की जवानी के मजे सभी लूटें
चाहते हैं किसी से न छूटें

अभिषेक मिश्र said...

सरस और रोचक यात्रा विवरण. बर्थडे गिफ्ट तो लाजवाब था. पिछले वर्ष तो गोवा यात्रा पताल सी गई, आगे जाने कब अवसर मिले. जन्मदिन की विलंबित शुभकामनाएँ.

स्वाति said...

rochak post...

P.N. Subramanian said...

आप के बस के सफ़र की दास्ताँ पढ़कर हमें भी रोमांच हो आया.