Thursday, March 25, 2010

क्यूँ मुश्किल है,पुरुष ब्लॉगर पर फिल्म बनाना

(सभी पुरुष ब्लॉगर्स से क्षमायाचना सहित ,यह केवल एक निर्मल हास्य है )

अपनी जुली न जूलिया की पोस्ट का लिंक जब मैंने buzz पर  डाला तो अविनाश जी और प्रवीण जी के ये कमेंट्स मिले
अविनाश वाचस्पति - एक ऐसी फिल्‍म भी बतलाएं जिसमें नायक को हिन्‍दी ब्‍लॉगर दिखलाएं
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - अविनाश जी की जिज्ञासा को हमारा भी वोट !

 और मन यह सोचने पर मजबूर हो गया कि अगर सचमुच हिंदी पुरुष ब्लोगर पर फिल्म बनायी जाये तो??. और मेरी  कल्पना के घोड़े दौड़ने लगे.वैसे भी  अब दौड़ते घोड़ों की पहुँच बस कल्पना तक ही रह गयी है..रेसकोर्स में भी तो अच्छी नस्ल वाले घोड़े ही दौड़ते हैं. बाकी सब तो कल्पना में ही दौड़ कर शौक पूरा कर लेते हैं.


खैर  तो कल्पना कीजिये कि ये एक पुरुष ब्लोगर पर बनी फिल्म है. उसे ब्लॉग के बारे में अखबार से या अपने मित्र से पता चलता  है.घर आता  है,लैपटॉप खोलता है. ब्लॉग बना डालता है. पत्नी बच्चों को डांटती  है, पापा काम कर रहें हैं शोर मत करो. और पत्नी,बच्चे सब दूसरे कमरे में चले जाते हैं.

सुबह भी वे अपना लैपटॉप खोलते हैं. चाय वही आ जाती है. ब्रेकफास्ट वहीँ आ जाता है. तैयार होकर ऑफिस जाते हैं. वहाँ जब थोड़े खाली हों,अपना ब्लॉग खोल लिया.या किसी मीटिंग में गए, बोरिंग लगी तो मोबाईल पर कोई पोस्ट खोल ली.
ऑफिस से आए वही रूटीन, चाय, नाश्ता, खाना ,ब्लॉग्गिंग . लीजिये फिल्म ख़त्म. कोई रोचक मोड़, जद्दोजहद, परेशानी, उल्लास  टेंशन हुई?? नहीं. तो फिल्म ४ मिनट की तो नहीं बन सकती .हाँ  पुरुष ब्लोगर कहेंगे ,महिलाओं को क्या पता, हमें कितनी टेंशन होती है. ई.एम. आई. भरना है, इतने सारे बिल भरने हैं..हम यह सब सोचते रहते हैं अब इस सोच को तो परदे पर प्रदर्शित नहीं कर सकते ना. अब ब्लॉग्गिंग पर फिल्म है तो...हीरो हीरोइन को ड्रीम सिक्वेंस में बगीचे में ...बारिश में गाना गाते भी तो नहीं  दिखा सकते.

अब यही देखिये किसी हिंदी महिला ब्लॉगर पर बनी फिल्म. अगर वह गृहणी है तो बच्चों से ,देवर से या पति से उसे ब्लॉग के बारे में पता चलता है. बड़े उत्साह से जाती है. जरा हेल्प करो,ना...अभी रुको जरा ये काम कर लूँ.उनके लिए ,अच्छी चीज़ें खाने को बनाती है, किसी चीज़ की जरूरत हो दौड़ कर ला देती है. सौ  अहसान जताते हुए वे ब्लॉग बनाने में हेल्प करते हैं.

सुबह उठती है..जल्दी जल्दी बच्चों को स्कूल भेजती है. बीच में थोड़ा सा वक़्त मिले तो कंप्यूटर खोल लेती है. एक पोस्ट पढ़ी नहीं कि पतिदेव की आवाज़ आ गयी..चाय देना..चाय देकर आती है..कमेन्ट टाइप करती है कि कामवाली आ जाती है. उसे थोड़ा निर्देश दिया ..फिर आकर कमेन्ट पोस्ट कर, कंप्यूटर बंद कर दिया.

फिर घर के काम निबटा, पति को ऑफिस भेज .कम्प्यूटर पर आ जाती है. जबकि घर के सौ काम राह देख रहें होते हैं. कपड़े समेटना है,डस्टिंग करनी है.वगैरह  वगैरह. एक पोस्ट लिखी जा रही है. और एक नज़र घड़ी पर है. बच्चों को बस स्टॉप से लाना है. पोस्ट पूरा किया पब्लिश बटन प्रेस किया.और कंप्यूटर बंद. बच्चों को खाना खिलाया, उनकी बातें सुनी. बाकी काम समेटे . बच्चों को पढने बिठाया फिर वापस कंप्यूटर. अपनी पोस्ट पे कमेन्ट पढ़े...दूसरों की पोस्ट पढ़ी, कमेन्ट किए. बैकग्राउंड में बच्चों का झगडा, उनका बार बार कुछ पूछना क्यूंकि ममी कम्प्युटर पर है. बच्चों को तो undivided attention चाहिए. जानबूझकर पूछेंगे, जरा ये बता दो..जरा ये समझा दो. रोना धोना सब. बच्चे अगर थोड़े बड़े हैं  तो उन्हें भी उसी वक़्त कम्प्यूटर चाहिए क्यूंकि स्कूल का कोई प्रोजेक्ट तैयार करना है. इनके बीच ब्लॉग्गिंग चलती रहती है.


जो महिला ब्लोग्गेर्स ऑफिस जाती हैं. वे तो घर से ऑनलाइन  होने की सोच भी नहीं पातीं. कभी कभार कोई विशेष पोस्ट लिखनी हो तो देर रात गए जागना होता है. पर दूसरे दिन सुबह उठकर ऑफिस जाने के पहले काम ख़त्म करने की चिंता हर घड़ी माथे पर सवार. ऑफिस से भी पुरुषों की तरह वे बेख़ौफ़ ऑनलाइन नहीं हो पातीं. कलीग्स या जूनियर थोड़ी कटाक्ष  कर ही जाते हैं. बीच में लंच टाइम में एक पोस्ट लिख कर डाल  दी. और उस पर मिले कमेन्ट दूसरे दिन लंच टाईम पर पढ़े .दूसरों की पोस्ट पढने और कमेन्ट करने का वक़्त तो मिल ही नहीं पाता.

इन सबके साथ, रिश्तेदारों का आगमन, बच्चों की बीमारी, डॉक्टर का चक्कर, बच्चों का बर्थडे ,तीज-त्योहार, घर मे पार्टियों की तैयारी, रिश्तेदारों के सैकड़ों फोन और उलाहने, जब से ब्लॉग्गिंग शुरू किया है,तुम्हारे पास तो टाइम ही नहीं.

तो इसलिए बनायी जाती है  महिला ब्लोगरों पर कोई फिल्म. क्यूंकि इतने सारे रंग हैं उनके जीवन में.जिन्हें फ़िल्मी कैनवास पर बखूबी उतरा जा सकता है.

72 comments:

  1. वाह रश्मि जी
    --------
    अच्छा लिखा आपने...
    और अच्छी चुटकी भी ले ली...
    अब तो जी हमें भी
    निर्मल, दुर्बल, सबल, तरल, गरल, विरल, अनल, प्रबल...हर तरह के हास्य पर गंभीरता से विचार करना होगा जी...
    बधाई

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  2. अच्छा किया कि आपने पहले ही माफ़ी मांग ली. चलिए हम देकर आपकी इच्छा को पूरा भी किये देते हैं, पर साथियों यह अपमान ही नहीं...... घोर अपमान है.
    बस यही दिन देखना रह गया था.
    हमने तो छोड़ दिया पर बाद के टिप्पणीकारों मत छोड़ना इन्हें.
    :)

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  3. हा हा हा ..क्या मस्त पोस्ट डाली है ....मजा आ गया ..और क्या सटीक रूपरेखा खींची है..KUDOS TO YOU.

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  4. गोमल जी...प्लीज़ सॉरी पहले ही बोल दिया है....आप डराइये मत और उन्हें उकसाइए भी मत

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  5. सारी तारीफ अपनी
    सारी तालियां आपको
    सारी तमतमाहट हमको
    सारी प्रख्‍याति खुदको
    और फिर भी निर्मल
    हास्‍य तो हास्‍य तभी माना जाता है
    जब निर्मल और मलमल की तरह
    मखमली होता है, वही है यहां
    हां जी, वही सब तो है

    फिर माफी, सॉरी किससे
    किससे डर कर रश्मि जी
    गोमल जी से
    और गोमल जी एक सच कहूं
    अपमान उनका होता है
    जिनका सम्‍मान तो हो
    पहले सम्‍मानजनक कार्य तो कीजिए
    जब महिला ब्‍लॉगिंग कर रही हों तो
    एक कप गरमागर्म चाय पेश कीजिए
    बच्‍चों की आफत पूरी अपने सर लीजिए
    सारे फिल्‍म दर्शकों की संवेदना
    आपकी तरफ उमड़ घुमड़ कर
    कर जाएगी समूचा सराबोर
    फिर नहीं चाहेंगे सॉरी
    और

    पर पहले आरंभ तो कीजिए
    और पहले फिल्‍म के लिए
    सब मिलजुलकर एक फाइनेंसर
    तलाश कर लीजिए
    फिर निर्देशक आपको ही बनाएंगे

    और नायक .....
    यह रहस्‍य ही रहेगा
    इससे लंबा कमेंट
    चाहे कविता में ही हो
    कौन पढ़ेगा ?

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  6. रश्मि जी

    ये हुई ना बात ..आँखों के सामने चलचित्र सा घूम गया

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  7. वाह अविनाश जी ! इस पोस्ट पर आपकी टिपण्णी ने चार ,आठ,बारह.....चाँद लगा दिए..अब तो टोपी उतारनी ही पड़ेगी :) hats off to you..

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  8. वाह ...क्या रोचक कारण बताएं हैं महिला ब्लौगर पर फिल्म बनाने के लिए ....
    क्या बात है ...अभी तक उकसाए जाने वाले कमेंट्स से बची हुए हो ...
    लोगबाग टूर पर हैं ..या परीक्षाओं में व्यस्त हैं ..

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  9. रश्मि जी, यह हास्य नहीं एक गंभीर सच है। अल्पना मिश्र ने वागर्थ सम्मान के समय दिये गये वक्तव्य में इसे रेखांकित किया था। आपने यह एक अलग तरीके से ज़रूरी मुद्दा उठाया है। बधाई

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  10. हम बहुत ही ज्यादा परेशानी मे हू
    आधी दुनिया ( हम जैसे बेचारो की ) के खिलाफ़ ये एक साजिश है.

    दादागिरी कर रही है महिलाये ब्लोग जगत मे.
    आदमियो खुद को सुधारने का जमाना आ गया है.

    रश्मि जी आप महिलाओ पर कितनी भी बढिया फ़िलम बना लो उसे हिट हमारे ही सहयोग से कर सकोगी. आपको फ़िलम मे एक ठौ हीरो जिसे फ़िलम की कहानी मे विलन दिखाओगी एक टिकट मे दो खेल का मज़ा देगा.

    ऐसा लगता है पुरुष विमर्श की जरूरत आन पडी है.

    वैसे रश्मि जी क्यू हम गये बीते पुरुषो को हमारी असली औकात बताती हो. हम तो पहले से ही ऐसे ही है और उपर से आप भी सबको बता देती हो कि हम कैसे है.

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  11. क्या गजब व्यंग्य है रश्मि जी, बहुत खूब !!! और उस पर अविनाश जी की टिप्पणी ने सच में चार चाँद लगा दिया है.
    @अशोक जी, आपकी बात से सहमत हूँ. ये हास्य नहीं कड़वा सच है. इसीलिये मैं इसे सौ नम्बर देते हुये व्यंग्य की कैटेगरी में रख रही हूँ.

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  12. अशोक पाण्डेय जी ने तो डरा दिया इसे एक गम्भीर सच कहकर मै तो इसे हास्य ही समझ रहा था ।
    सही है किसी का दुख किसी के लिये हँसने का विषय बन जाता है ।
    वैसे रश्मि जी .इस प्लॉट को किसी हिन्दी फार्मूला फिल्म बनाने वाले को दे दिया जाये तो वह कुछ दो ढाई घंटे की फिल्म तो बना देगा ।
    मसलन नायक ब्लॉगिंग के चक्कर में नौकरी छोड़ देता है । फिर आर्थिक तंगी ..जैस तैसे इंटर्नेट के लिये पैसे जुटाता है फिर चोरी करता है ,मुकदमा.. लेकिन ऐन समय पर नायिका उसे बचा लेती है । फिर नायिका का उसके जीवन में प्रवेश । पत्नी के लिये दो सौत । ..फिर नायिका भी ब्लॉगिंग के चक्कर में । नायक से लड़ाई । त्रिकोणी संघर्श ।नायक द्वारा लैप्टोप फेंकना .. आत्महत्या का प्रयास । स्टोरी सार्वजनिक होना , ब्लॉगजगत मे विमर्ष आदि आदि .... आगे की स्टोरी हमारे विद्वान ब्लॉगर गढॆंगे..

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  13. बहुत सही. एकदम यही स्थिति है महिला ब्लॉगर्स की. और उस पर तुर्रा यह , कि भले ही वो देर रात को अपने ब्लॉग का काम शुरु करे, बच्चे के रिज़ल्ट में यदि कुछ कमी आ गई तो बस, पूरा दोष उसकी ब्लॉगिंग के सर..... अगली बार कम्प्यूटर खोलते समय भी अपराध बोध से ग्रस्त रहे....
    बढिया. शानदार. जानदार.

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  14. रुकिए रुकिए तनिक रुक जाईये ..इस फ़िल्लम का सीक्वेलवा बनाते हैं हम ...ऊ भी एक दम निर्मल , धवल, सफ़ल, ....हास्य ही होगा ....बस आज मुहूर्त शाट ओके हो ही गया समझिए ....

    कहां हो भाई लोगों ...यलगार का आगाज़ किया जाए ....

    अजय कुमार झा

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  15. @"यह केवल एक निर्मल हास्य है"
    No, i don't think so 'cos there is a lot of genuine anguish and absolute pain of female bloggers hidden in this post.

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  16. सही वाट लगाई है

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  17. हा हा हा,
    अभी एक फ़िल्म पुरी हुई ही नही
    झा जी सीक्वल भी बनाने चल दिए,

    फ़िल्म हिट होगी
    बहुत बढिया--गंभीर हास्य

    बधाई

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  18. बहुत सटीक बात कही है....बढ़िया पोस्ट है...और इस पर पुरुष ब्लोगर ही मन खोल कर लिखें तो बेहतर होगा....:):)

    सारे रंग तो स्त्रियों को दे दिए हैं अब पुरुष भी तो कुछ सफ़ेद काला करेंगे ना...:)

    मैं भी केवल सहज हास्य ही कर रही हूँ :):) कोई अन्यथा ना ले....

    मजेदार पोस्ट के लिए बधाई

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  19. वाह ...क्या रोचक कारण बताएं हैं महिला ब्लौगर पर फिल्म बनाने के लिए ....
    क्या बात है ...अभी तक उकसाए जाने वाले कमेंट्स से बची हुए हो ...

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  20. बहुत मजेदार पोस्‍ट .. और सटीक भी !!

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  21. मस्त पोस्ट…लेकिन इस महिला ब्लोगर फ़िल्म में हम कहीं नहीं दिखे…॥कहानी मे एक और कहानी डा्ली जाये…॥सास करे ब्लोगिंग और बहू घर संभाले…:) नो टेंशन…॥घर की शांती का अचूक फ़ार्मूला……;)

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  22. बहुत ही रोचक रही आपकी कल्पना की ये उड़ान...
    वैसे किसी भी फिल्म में खलनायक ना हो तो कहानी में ज्यादा मज़ा नहीं आता....
    इसलिए कहानी में ट्विस्ट देने के लिए खलनायक बहुत ज़रुरी है....अब ये खलनायक पोस्ट चोरी कर अपने नाम से पोस्ट करने वाला ब्लॉगर भी हो सकता है ...या किसी खास प्रिय ब्लॉगर के बारे में अंत में पता चले कि बेनामी बन वही नायिका को हड्काता भी था ...
    और भी बहुत कुछ सोचा जा सकता है ...

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  23. अरे अरे आप ने हीरोईन को तो बेचारी बना दिया... यह तो बडी बेइंसाफ़ी है जी

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  24. एकदम गलत बात दी.. महिला ब्लोगर की तकलीफें तो आपने लिख दीं.. लेकिन पुरुष ब्लोगर की तकलीफें सिर्फ कोई पुरुष ही लिख सकता है.. :P मुझे तो अधूरा लगा लेख. हाँ आपके लेखन की जरूर जितनी तारीफ़ की जाये कम है..

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  25. बहुत बढ़िया! इससे अच्छा उपहार और क्या होगा!

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  26. मजेदार है। जय हो!

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  27. अजय झा जी director बनेगे, सहगल साहेब produc करेंगे।
    भाटिया साहेब मेहमान बनेगे।

    आप को जो भी रोल अच्छा लगे मुझे दे दीजियेगा।

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  28. बिल्कुल सत्य जैसा ही लग रहा है अमूमन हर घर में यही हालत होती होगी,

    मजेदार

    चलो बेटा मम्मी काम कर रही है चलो अंदर घर में चलो, मम्मी कम्प्यूटर पर जरुरी काम कर रही है ऑफ़िस का :)

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  29. Bahut badhiya idea pahale to ham is baat ka swagat karate hai..film ban jarur bane kam se aur logo ko bhi blogars ki manodasha ka pata chale..

    gambheer hasya ke liye dhanywaad rashmi ji...bahut badhita likha aapne...

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  30. आपकी हर रचना सिक्स़र पर सिक्स़र लगाए जा रही है, क्या चित्रण है ! बहुत ही बढ़िया

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  31. फिल्म हिट हो जाएगी। बिल्कुल। कितना खूब विश्लेषण किया है आपने। रामगोपाल वर्मा को छोड़कर किसी को भी अपना विचार दे सकती हैं।

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  32. हाय रश्मि,
    बिलकुल शत प्रतिशत सही लिखा, लेकिन पुरुषों के साथ बड़ी ही बेइंसाफी की. अरे उनको भी लगता है की ये काम हम कर रहे हैं तो उसको भी lime lite मेंलाया जाए. अपने राम भुक्तभोगी हैं , तुम्हारे इसी सफर के एक राही हैं.
    लेकिन ब्लॉगर भाइयों को बुरा नहीं मानना चाहिए , आगे जो समय आ रहा है न, उसमें आप भी चर्चा के विषय होंगे. इन्तजार करिए जल्दी ही कोई ब्लॉगर इसके प्रतिपक्ष में सोच रहा होगा और फिर दूसरी फ़िल्म जरूर तैयार मिलेगी. वैसे रश्मि तुमने आगाज किया है अब आगे आगे देखिये होता हैक्या?

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  33. मज़ा आ गया रश्मि जी। बहुत ही सटीक लिखा है। एक रंग और भी बताते हैं महिला ब्लागर के जीवन का जो बस अभी ही हमारे जीवन में गुज़रा है। जब महिला ब्लागर के क्म्प्यूटर में वायरस आ जाता है तो पति से सुनने को मिलता है। "जरूर तुम्हारी वजह से ही वायरस घुसा है। दिन्भर पता नहीं कहां की हिन्दी साइट्स छानती रहती हो।" और फिर महिला हमारे जैसी संवेदनशील हो तो फैसला तक कर डालती है कि ठीक है अब कभी जायेंगे ही नहीं ब्लागिंग की गली। पर दो महीने में ही अपने फैसले को ऎक किनारे रखकर आ गये फिर वापस। वरना आभासी दुनिया के इन कच्चे पक्के पर सच्चे रंगो से अछूते रह जाते।

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  34. महिला ब्लागर बनाम पुरुष ब्लागर्…………………।बहुत ही दिलचस्प फ़िल्म रहेगी……………………॥एक बार बना ही दिजीये फिर देखिये कौन सी फ़िल्म देखने लोग ज्यादा जाते है…………………वैसे महिलाओ की स्थिति का बखुबी चित्रण किया है………………वैसे बेचारे बडे तिलमिला रहे होंगे……………………ये एक हास्य ही है बुरा नही मानियेगा।

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  35. हा हा सारिका जी, तो ये वजह थी...ब्लॉग्गिंग से दूर रहने की, और नुक्सान हमारा हो गया...आपके intelligent कमेन्ट नहीं मिल पाए, बहुत मिस किया :(..चलिए अच्छा हुआ गुस्सा थूक दिया...वो सब तो चलता ही रहता है..:)

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  36. वाह रश्मि जी वाह , क्या खूब पोस्ट लिखी है । लगता है कि जैसे मेरी ही आपबीती लिख दी है । इक मैं ही क्या समझ्ती हूं कि शायद हर वह महिला ब्लॉगर [ जो एक सफल गृहिणी भी है ] के साथ ब्लॉगिंग के वक्त ऎसा ही वाकया होता है ।
    आपकी फिल्म तो हिट है हिट ।

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  37. अच्छा है! फ़िल्म बने तो बताए ज़रुर!

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  38. चलिए दीपक जी ,पुरुष ब्लॉगर की तकलीफें आप ही लिख डालिए ,
    रश्मि जी ने तो हमारा मन मोह लिया

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  39. खोलते जाओ
    खौलते खौलते
    बोलते भी जाओ
    पोल सभी जो बंद हैं
    मौका आया है
    सब खोलते जाओ।

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  40. वाह रश्मिजी
    आनंद आ गया |कितनी मुश्किलों में महिला ब्लॉग लिखती है |
    उफ़ करना भी मना है ,वरना कहेगे -तुम्हे किसने कहा -ब्लॉग लिखो ?
    सीधे सीधे खाना बनाओ बच्चो को संभालो ,बड़ी आई ब्लागर बनने
    और दुनिया में काम कम है ?
    एक यही तो बचा था पुरुषो के वर्चस्व का ?यहाँ भी ??????????/

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  41. MY GOD
    Film ka to pata nahi........ye post jarur hit ho gayi......hahaha

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  42. ब्लॉगिंग एक बोरिंग एक्टिविटी है। इस पर फिल्म बनाना एक चैलेंज होगा - अगर उसमें जूतमपैजार जैसे तत्व न डाले जायें! :)

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  43. हास्य विषयन्तार्गत प्रस्तुति के रूप में उम्दा ...बधाई रश्मिजी ...

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  44. रश्मि जी, आपने तो फिल्‍म डायरेक्‍टर को मुफ्‍त में ही एक प्‍लाट दे दिया है। कहानी ऐसे व्‍यक्ति की होगी जो पत्रकारों को सताया है, पत्रकार उसके लिए समाचार पत्रों में उलजलूल छाप रहे हैं और ब्‍लागर अपने ब्‍लाग पर उनके खिलाफ। नायिका भी जुट जाएगी नायक के पक्ष में। धीरे-धीरे जनता भी जुटेगी और ब्‍लागर की शक्ति विजयी होगी। जय ब्‍लाग और जय ब्‍लागर।

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  45. main ise kiseee bhi tarah se haasya nahi kahoongee...bahut gambheerta ke saath kiya gaya vyangya hai ye....bahut badhiya ...sachchaai ko kholta hai ye aalekh..

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  46. हाहाहा, मजेदार!
    घुघूती बासूती

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  47. अरे ये तो मेरी कहानी है...
    छुट्टी के दिन तो ब्लॉग्गिंग कर ही नहीं सकते वो तो भला हो ऑफिस का कि कभी कुछ देख भी सकते हैं...
    एक बार गोदियाल जी ने कहा था कि आप बहुत रात तक जगती हिं आपके कमेन्ट कि timing से पता चलता है...अब पता चला क्यूँ ऐसा होता है...
    बहुत सही लिखा है रश्मि हमेशा कि तरह...
    बेजोड़...

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  48. कुछ सत्य तो है जरूर ...इसीलिये इत्ता सोचना पढ़ रहा है .....टिपियाने में !
    चलिए जल्दी ही पत्नी का भी ब्लॉग बनवाते हैं !
    पर टिप्पणियों की गारंटी कौन लेगा ?

    नहीं तो हमारी पत्नी .....अपने नारी स्वभाव के मुताबिक़ दोष तो हमें ही देंगी !
    कि हमारी सहेली के वो प्रोफाइल बदल बदल के इत्ता टिपियाते है ...आप तो बस एक्के बार में धड़ाम हो जाते हैं !

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  49. हाय!! काश कोई हमारी भी पीर समझता!!

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  50. sameer laal ji...hamne samjhee hai yah peer....yahan..http://shefalipande.blogspot.com/2010/03/blog-post.html.

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  51. Rasmi jee,blogging ek anuthi abhvikti hain vicharo kee, janha na koyee purush hain na koyee naree, old days has gone!! ab ghughat dal kar koyee nari kisee purush(pati) ka anusharan kyon kare..aj wo marg darshak hain purushon ke aur is jamane kee.
    sau purush bloggers per bhari
    eklauti blooger nari!!!

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  52. रश्मि बहना,
    तुम्हारी इस पोस्ट ने तो अनजाने में एक बहुत बढ़िया बिज़नेस का आइडिया दे दिया...ऐसा सर्विस सेंटर खोल लेते हैं जो आपकी तरफ से सभी पोस्ट पर जाकर कमेंट करे, आपके पास टाइम न हो तो आपके लिए पोस्ट भी लिख दे...क्या शुरू कर दूं ये बिजनेस...पाबला जी से सलाह लेता हूं...

    जय हिंद...

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  53. रश्मि जी सही कहा हो जाए इसी बात पर एक पाडकास्ट फिर पक्के में मुझे लेकर कोई न कोई प्रोड्यूसर डालर खर्च ही देगा. इसी लिए मैं पाडकास्टर बना हूँ...! मुझे मालूम है ब्लॉगर पुरुषों की दशा अब मुझ पे तो बन सकती हैं फिल्म. जबलपुर में ज़बरदस्त सिनेमाई-लोकेशंस हैं कोई भाई डालर खर्चे तो आ जाए इधर जी

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  54. सोचिये कि शॉट रेडी हो....लाईट, कैमरा सब तैयार हो और अचानक मेन 'ब्लॉगरेक्टर' कहे कि जब तक अपने इस शूटिंग की सूचना ब्लॉग पर न डाल ले, उसका मन बेचैन रहेगा...... वह सीन में जान नहीं डाल सकता....तब प्रोडयूसर मन मार कर कहेगा....जा भाई लिख मार जो तेरे मन में आवे ।

    तब ब्लॉगर एक पोस्ट लिखेगा.....मेरा शूटिंगाना अनुभव :)

    उधर जब तक ब्लॉगरेक्टर पोस्ट लिखेगा प्रोडयूसर अपने स्पॉट ब्वाय और लाईटमैन से कहेगा ....जाबे...उसके पोस्ट पे वो कुछ भी लिखे....साले, तू अच्छे से कमेंट करके आना....मस्त है, वाह वाह, बहूत खूब वगैरा लिख के आना तभी उसका मूड सही रहेगा और सीन में जान डाल सकेगा......अगर नहीं लिखा तो तेरा आज का पगार कट।

    जा जल्दी जा, वो देख ब्लॉगवाणी पे आ गया है.....जल्दी कर....अबे पढता क्या है....पोस्ट बिना पढे लिख ना वाह...वाह, बहूत खूब....देर हो रही है शूटिंग में :)

    मरता क्या

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  55. मरता क्या न करता....सपॉट ब्वॉय और लाईटमैन वगैरह कमेंट कर आए और धर ब्लॉगरेक्टर ने सीन में जान डालते हुए कहा -

    ओ मेरी गुलगश्त महबूबा....तेरा प्रोफाईल मेरे दिल पर चस्पा हो गया है ....

    एक मिनट...अबे ओ लाईटमैन ......कोई नया कमेंट आया क्या..देख तो :)

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  56. घोर आश्चर्य इतना विलम्ब क्यों कर हो गया!!! इतनी उम्दा तहरीर को आप पढ़ पा रहा हूँ.मैं बार बार कहता आ रहा हूँ..आपके लेखन की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी विविधता...और विषय को उसकी इयत्ता के साथ कह डालना.साथी अशोक से सहमत कि आपने जिस विडंबना की तरफ ध्यान दिलाया है हमें सोचने पर विवश करती है.इसे अपन महज़ व्यंग्य कह कर इतिश्री नहीं कर सकते.

    घोर आश्चर्य इतना विलम्ब क्यों कर हो गया!!! इतनी उम्दा तहरीर को आप पढ़ पाया हूँ.

    शहरोज़

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  57. ब्लोगर्स और ब्लॉग-जगत की कुछ विशेषताए शायद इस फिल्म की स्क्रिप्ट में सहायक हो की लिंक दे रहा हूँ:
    http://mansooralihashmi.blogspot.com/search/label/blogging
    http://mansooralihashmi.blogspot.com.search/label/blogging romance

    ब्लागियात-१०

    स्वयं के लिये:- [ पत्नी का प्रहार.........ब्लोगर्स होशियार!]

    लिखते-लिखते यह तुम को क्या सूझी,
    नुक्ता चीनी पे क्यों उतर आए?
    'हाश्मी' तुम शिकारी शब्दों के,
    खींचा-तानी पे क्यो उतर आए?


    सर को down करो है बंद server,
    रोक लो अब कलम मेरे दिलबर,
    कितने पन्ने स्याह कर डाले....
    अब ज़रूरत है आपकी घर पर.


    -जी , मैं {m}ही हूँ {h} , [किसी से न कहना]
    प्र

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  58. हा हा हा हा....एकदम सही चित्रण किया है आपने....एकदम सटीक...

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  59. बहुत मज़ा आया रश्मि जी. कठिन यथार्थ को इस हल्के हास्य के रूप में पिरोना आप जैसी कुशल शिल्पी के बस की ही बात हो सकती है. और हाँ सारे कमेंटस भी बहुत मज़ेदार लगे.

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  60. फिल्म हिट है ... आज का मैच आप ही ने जीता है . पर इतनी भी वाट मत लगाएं ...

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  61. Hi,
    kahte hain, Eshwar jo karta hai, achhe ke liye hi karta hai.. Agar main yah post pahle padh paya hota to etne saare sarthak comments padhne se purntaya vanchit rah jata..

    Mahilayen to janmon se purushon par bhari hain.. Shayad kabhi anuchar rahi hon par adhikanshtah sahchar aur ab to aage hi hain.. Aapke 'NIRMAL HASYA' ke shabdon main.. Aajkal Purush to mahilaon ke peechhe hain.. Haha, har mamle main..

    Saare comments padhne ke baad ye to pakka ho gaya ki purush bloggers par film to banayi ja sakti hai.. Chahe documentry film hi kyon na ho..

    Aapki post ne purushon par vyang kam aur mahilaon ke dard ko jyada ukera hai.. (aur adhiktar mahilayen maano khushi se uchhal padi hain, apne dil ki baat aapki post main padhkar..ya.. purushon ki burai sun kar.. Haha..)

    Nice post..

    DEEPAK..

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  62. Es post par to comments ki jhadi lag gayi.. Badhai ho!

    DEEPAK..

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  63. बू...हू...हू....हू....हू....हू....हू.....बू.....हू....हू....हू.....मगर भूतों का क्या होगा जी....वो तो दिखाई भी नहीं देते जी......बू....हू...हू...हू....मेरा क्या होगा जी.....बू...हू....हू....हू....!!!

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  64. जी रश्मि जी देखी आपकी ये पोस्ट भी ....बहुत ही बढिया और मजेदार ......!!

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  65. beshak bahot khoob alfaaz rakam kiye hai

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  66. wah, idea to dhansu hai aur is dhansu idea ke andar ke sach ko aapne badhiya samne laya hai.
    ye vakai haqikat hai ki mahila blogger par jyada dabav, jimmedari rahti hai, chahe vah working woman ho ya only house wife.

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  67. बस यहाँ भी अपनी जिज्ञासा लेकर टहल रहे कि शायद .....?

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  68. बहुत मजेदार कल्पना की आपने। बस थोड़ा जुतमपैजारियता का तड़का लगा दीजिये, हिट हो जाएगी:)
    रामराम

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