Friday, March 12, 2010

बैगन की व्यथा कथा



आजकल एक मामूली सी उपेक्षित सी सब्जी बैगन ख़बरों में है.उस पर विदेशियों ने प्रयोग किये हैं और एक ऐसे बैगन(BT Brinjal ) की किस्म तैयार की है जिसमे कीड़े नहीं लगेंगे.और.(GEAC) ने अक्तूबर से इसके कमर्शियल रिलीज़ की अनुमति दे दी है.कृषि मंत्री 'शरद पवार' ने कहा है कि जबGEAC ने इसे स्वीकृति दे दी है तो सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती.पर पर्यावरण मंत्री 'जय राम रमेश' ने कहा है कि पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति जरूरी है. वे कई शहरों में मीटिंग कर रहें हैं और कई लोग BT Brinjal का विरोध कर रहें हैं.अभी तो बहस जारी है और किसी नतीजे पर सरकार नहीं पहुंची है.
बहरहाल मैं तो बहुत खुश हूँ कि मेरी प्रिय सब्जी इतनी चर्चा में है.मेरा बैगन प्रेम सर्वविख्यात(जितने लोगों तक मेरी पहुँच) है.

माँ ने मेरे बचपन का एक किस्सा सुनाया कि जब मैं शायद सिर्फ ढाई साल की थी. पापा हेड ऑफिस जा रहें थे,उन्होंने प्यार से पूछा "तुम्हारे लिए क्या लेकर आऊं?"...लडकियां, गुडिया,चौकलेट,खिलौने की फरमाईश करती हैं. इतना मशहूर गाना भी है, "पापा जल्दी आ जाना छोटी सी गुडिया लाना"..और मैं बेवकूफ. मैंने कहा था,'बैंगन ले आना' (मन तो नहीं होता विश्वास करने का कि कभी इतनी बेवकूफ भी मैं थी, पतिदेव सुन लें तो कहेंगे "थी???") .मेरे पापा बहुत पेशोपेश में पड़े क्यूंकि बिहार में अफसरों की एक शान होती है ,वे कभी सब्जी नहीं खरीदते. इसके लिए सरकार उन्हें एक अर्दली और चपरासियों की एक फौज मुहैया करवाती है. वे तो क्या उनके घर का कोई भी सब्जी खरीदने नहीं जाता. मैंने भी शादी के पहले कभी सब्जी नहीं खरीदी.जब पहली बार शादी के बाद दिल्ली में 'वीर बाज़ार' में नीचे बैठकर तराजू पर आलू प्याज चढ़ाए वह तस्वीर अब भी आँखों के आगे स्थिर है.

खैर , पापा ने एक तरीका ढूंढ निकाला.उन्होंने एक फल वाले को बोला कि आधा किलो बैंगन खरीद कर रखे. शाम को ममी ने एक ब्राउन लिफ़ाफ़े(जिन्हें ठोंगा कहते थे) में से जब दो चमकते हुए बैगन निकाले तब उन्हें सारी कहानी पता चली.

जब थोड़ी बड़ी हुई तब सबके सामने 'बैगन' की शान में कसीदे पढ़ती रहती पर सब इसे . 'बेगुन' कहते और मैं इसे 'बहू गुण'.

आज भी जब सुबह मॉनिंग वाक से लौटते हुए सुबह की किरणें , गोल मटोल बैंगन पर पड़ते हुए देखती हूँ तो बरबस ही वह छटा मन मोह लेती है..मैं सहेली की तरफ देखती हूँ, "एक्चुअली सब्जी तो है फ्रिज में, पर ले लूँ?' वह बोलती है.."हाँ हाँ..बैंगन देख कर तुम कैसे रुकोगी' .कभी अगर बातचीत के दरम्यान कह दिया कि मुझे आलू,भिन्डी नहीं पसंद और एक ने पूछ लिया 'फिर तुम्हे पसंद क्या है ?" दूसरी सहेली तुरंत टपक पड़ती है..."अरे! इसे तो बैंगन पसन्द है बैंगन."

कल का अखबार खोला,तो बड़ा सुकून महसूस हुआ,अकेले मैं ही इस सब्जी की मुरीद नहीं .किसी सतीश शर्मा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में ठीक एडिटोरियल के नीचे "बैगन का ब्लॉग 'नाम से एक लेख लिखा है और बैंगन की व्यथा कथा बैगन के ही शब्दों में ही बयाँ की है

बैगन उवाच ;

अब तक लोग मुझे घर की मुर्गी दाल बराबर समझते रहें .जब विदेशियों ने मुझपर प्रयोग किये तब मेरी महत्ता को समझा

मुझसे ये सौतेला व्यवहार क्यूँ करते हैं सब?.भारत में पूरब से पश्चिम,उत्तर से दक्षिण हर घर के किचेन में मेरा बसेरा है. पर जब देखो वे बस आलू प्याज के ही गुण गाते रहेंगे... और उनकी ही महंगाई का रोना.प्याज को तो इलेक्शन इशु तक बना डाला.

मैंने हमेशा गृहणियों का साथ दिया है.कभी इतना महंगा नहीं हुआ कि उनकी पर्स इजाजत ना दे.पर उन्हें भी मेरी कोई कद्र नहीं. कोई मेहमान आए तो आलू दम बनाएंगी, दोप्याजा बनाएंगी,भिन्डी भी बना लेंगी पर मुझ बैगन पर कोई रहमो करम नहीं.

कितनी फिल्मो में भी डायलॉग रहता है, "अरे बेटा भिन्डी खा लो भिन्डी' या फिर 'मटर पनीर पर कंसंट्रेट करो.' कभी नहीं सुना "और बैगन लो"

यहाँ तक कि चुनाव में आलू का एक गाना भी बना दिया, "जबतक रहेगा समोसे में आलू.." पर मुझ बैगन को किसी ने चुनाव चिन्ह तक बनाने की नहीं सोची. और ये समोसे में आलू ही क्यूँ भरते हैं?,बैंगन क्यूँ नहीं? पराठे भी बनायेंगे गोल गोल घी में तर पर मुझे बेसन में लपेट अजीब सी शक्लों में तल कर पकौड़े बना डालेंगे या फिर सीधा ही आग में जला डालेंगे. मेरी कोमल चिकनी त्वचा का क्या हाल कर डालते हैं.उस मटमैले रूखी त्वचा वाले आलू को तो पानी में डाल कर उबालते हैं.

मेरे पर एक कहावत तक नहीं.उस टेढ़ी मेढ़ी शक्ल वाले अदरक पर है.'बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद".उस मिटटी में लिपटी मूली के लिए है 'किस खेत की मूली हो" पर मेरे ऊपर इतना नेगेटिव कहावत, 'थाली का बैंगन"

मेरी सुन्दरता को भी नज़रंदाज़ कर दिया.सारे हरे रंग की सब्जियों के बीच मेरा रंग कितना सुन्दर लगता है,स्मूथ स्किन और स्लिम फिगर या फिर खाते पीते घर की गोल मटोल.विदेशियों ने तो 'एपल' और 'ब्लैक बेरी' पर सेल फोन लौंच किये तो मैंने बुरा नहीं माना.पर जब एक भारतीय ने लेमन को मेरे ऊपर प्राथमिकता दी तो ये गाने के सिवा कोई चारा ना रहा ,'जब दिल ही टूट गया..."

उस भिन्डी के ऊपर मुंबई में एक पूरा 'भिन्डी बाज़ार' है. दरभंगा में कोहंडा जैसी अजीब सी सब्जी के ऊपर 'कोहंडा बाज़ार' है पर मेरे इतने सुन्दर नाम बैंगन के ऊपर बरेली में एक गली तक नहीं.

बच्चे मेरा नाम सुनते ही कहते हैं,'मैं बैंगन नहीं खाता/खाती' ऐसा ही बच्चे पालक के लिए कहते थे और देखो विदेशियों ने एक कार्टून कैरेक्टर 'popeye 'ही बना दिया जो जैसे ही पालक (स्पिनेच ) खाता है उसे शक्ति आ जाती है.पर किसी ने नहीं सोचा कि मेरे ऊपर एक कार्टून कैरेक्टर बनाए जो बैगन खाता हो.

और अब देखो लोग मेरी ही चर्चा में अखबार रंगे जा रहें हैं..मैं तो अब सेलिब्रिटी बन गया हूँ. अब मैं अपना एक पी.ए.रखने जा रहा हूँ . अब कहीं कोई मेरे बारे में लिखेगा तो उसे पहले मेरी परमिशन लेनी होगी.(आलू,प्याज अपना आवेदन पत्र भेज सकते हैं)

29 comments:

  1. waaaaaaaaaah bhai bengan ke bahu guno ki charcha bhi khoob rahi...

    naye blog k liye badhayi.

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  2. waaaaaaaaaah bhai bengan ke bahu guno ki charcha bhi khoob rahi...

    naye blog k liye badhayi.

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  3. अरे आपने तो बैगन का भरता बनाने कि जगह बैगन पुराण लिख डाला..वाह जी वाह बढ़िया पोस्ट रही मजा आया पढने में अब एक बात तो पक्की है कि आपके यहाँ आये तो बैगन तो खाना ही पड़ेगा हा हा हा .

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  4. क्या बैगन है!!! मतलब क्या बात है!! एक राज की बात बताऊं? मुझे भी बैंगन बहुत पसन्द है...हाहा..एक से भले दो..है न? बढिया पोस्ट.

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  5. धन्य हुआ बे गुण - निर्गुण सुनकर !
    मगर जो आ रहा है और जिसे जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी की हरी झंडी मिली है वह
    भीमकाय भस्मासुरी भारतीय भांटा है -बैगन को भाटा भी कहते हैं .
    भीमकाय भस्मासुरी भारतीय भांटा=gaint frankensteinian Indian brinjal

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  6. Waahji khub rahi yah baigan puraan ....lekin swad to barate ki tarah hi mazedaar hai, aakhir kyu na ho aapane itane laziz shabdo ke masale ke sath jo paraosa hai :D

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  7. @ शिखा
    ही ही ही नहीं बाबा ,मैं भी ये रिस्क नहीं लेती...तुम नौनवेज़ खाने वालों के लिए इतनी मेहनत कोई करे भी क्यूँ...एक ही डिश काफी है....पर पहले कभी घर आओ तो सही...

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  8. Hi..
    Baigan ki vytha ..'RASHMI' ki jubani..
    'BEGUN' se 'BAHUT GUNI' banne ki kahani..
    Baigan ke dard ka khoob chitran kiya hai.. Aalo ke sath tulna bhi atulneeya hai.. Wah..

    Akhbaaron, samacharon main manhgaai se jyada BT Baigan aajkal chhaya hai
    kash sab virodhi aapka aalekh padhte to unka gyan vardhan ho jata.. Ek sher ki pankti hai na.. Badnaam hue to kya naam na hoga.. Aaj Baingan mahoday ka bhi yahi haal hua hai BT BAINGAN ka MY Name is Khan jaise virodh ne kafi prachar diya hai shayad.. Es prachar se Baingan ji ke din bhi bahur jaayen..

    Aapke pahli baar sabji khareedne ki charcha ne ek joke yaad kara diya..
    Ek nayi bahu apni sasu maan ke sath sabji khareedne gayi.. Sabji wale ne unsi saas se puchha.. Mata ji bahu to B. A. Pass hongi..??
    Saas ne kaha.. Haan.. Kyon.. ??
    Sabji wala bola.. Tabhi jhole main tamatar ke upar kaddu rakh rahi hain.. Haha..

    Ek din wo tha jab aap delhi ke veer bazar main aalu khareed rahi thin(shayad us din baigan mile nahi the, ya fir madam ji paradheen thin..haha) aur ek din ye hai ki 'RASHMI' ji subah ki 'RASHMI' ke sath GM BAIGAN (GUD MORNING BAINGAN) khareedti hain.. Shayad ab madam ji ne apna ek chatr rajya sthapit kar liya hai.. Haha..

    Vaise kabhi aapke yahan aana hua to dekhenge ki 'humari thali ka baigan' kaisa hota hai..haha yani baigan ke kitne vyanjan khilati hain aap..

    Manoranjak post..

    DEEPAK SHUKLA..

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  9. baigan katha atyant rochak lagi!! yun mujhe bhi uska bharta aur bhi achcha lagta hai.

    lekin bt baigan ka virodhi to main hoon.

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  10. @अनामिका जी,
    आप इतने दिनों बाद आई इस ब्लॉग पे??...अब तो बहुत पुराना हो गया...फिर भी शुक्रिया..:)
    @वंदना
    क्या बात है...एक और बात मिलती है..हमारी..gr8888

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  11. बैंगन तेरी महिमा अपरमपार । क्या झकास आलेख लिख है आपने दीदी । साधू-साधू !!!!

    और हां मुझे ही बैंगन बहुत पसंद है । क्या सब्जी है । :)

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  12. बहुत सुंदर लिखा आप ने , इन बेगुन से जुडी खबर यहां देखे यहां देखे
    बाकी आप ने बहुत सुंदर लिखा, एक बात मुझे भी याद आ गई, पंजाब मै बेगन को बताऊं कहते है, जब हम आगरा मै गये तो मां सबजी वाले को बोली भाईया बताऊं केसे दिये? सब्जी वाला पुछे बहिन जी क्या बताऊं?

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  13. बहुत बढ़िया बैगन पुराण ...आज कल तो अखबार में छाया हुआ है....३ पेज पर नहीं प्रथम पृष्ठ पर...कलात्मक रूप से लिखा लेख अच्छा लगा...

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  14. आज बैंगन की सब्ज़ी खाने के बाद आपकी पोस्ट पढ़ी । बैंगन के लिये इतनी छोटी पोस्ट नाकाफी है । इसलिये कि इस "बेगुन " के गुण बहुत हैं । यह एक ऐसी सब्ज़ी है जिसे अनेक तरह से बनाया ज सकता है । परम्परिक तरीके से , भँरवा , छोटे छोटे टुकड़ों मे काट कर व तलकर ,भूनकर यानि भरता बनाकर । छत्तीसगढ़ मे इसे भाटा कहते हैं और यहाँ 5-6 तरह का बैंगन मिलता है । ओरिजिनल बैंगनी , हरा , हरे मे सफेद धारियाँ और सफेद । फिर इसके भी कई कई आकार हैं । यह एक बैगन 10 ग्राम से लेकर 3-4 किलो तक का हो सकता है । महाराष्ट्र में छोटे आकार के बैंगन को भटई कहते हैं जो बड़े बैंगन से ज़्यादा स्वादिष्ट होता है ।
    आज की टिप्पणी मे इतना ही बाकी बातें फिर कभी । हाँ मेरे पास भी बैंगन प्रेम के कई किस्से है ..फिलहाल इतना ही कि ज़िन्दगी मे पहली बार जो सब्ज़ी मैने खरीदी थी वह बैंगन ही था । बीटी बैंगन यानि बढ़िया तरकारी बैंगन ( यह मेरा किया गया नामकरण है भाई असली तो अपने को पता नहीं )

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  15. बैंगन तो वाकई सेलेब्रिटी हो गया और हम अपनी पसंदीदा करेले को सेलिब्रिटी होने के इन्तजार में है..हालांकि बैंगन भी हमेशा से प्रिय रहा है...



    बेहतरीन पोस्ट!

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  16. शरद जी के शब्दों के साथ ...........मोहक .

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  17. are yahan to sabhi ko baingan pasand hai unmein se ek hum bhi hain......shukra hai kahin to kisi ne charcha ki hamari pasand ki.....hahahaha

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  18. अरे अरे क्यों चिंता करती हो, बैगन की भरवाँ सब्जी बनाओ तो कितनी अच्छी होती है. पता नहीं क्यों बैगन मेरे अलावा कम ही लोग घर में पसंद करते हैं. पर हम एक बैगन यूनियन बना लेते हैं , जिन्हें बैगन पसंद हों. जिन्हें न पसंद हों - उनसे खाने के बारे में बात नहीं करेंगे. रेसिपी शेयर नहीं करेंगे. बैंगन की पूछेंगे तो जरूर बताएँगे. ठीक है न. अब परेशान मत हो. मैं तुम्हारे साथ हूँ न.

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  19. मुझे बैंगन को लेकर पूर्वाग्रह है.. चाहे कुछ भी हो जाये मैं इसका सब्जी और भुजिया नहीं खा सकता हूँ.. :)
    हाँ सब्जी और भुजिया के आलावा इसका भुरता, साम्भर में डाला हुआ बैंगन पसंद है.. :D

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  20. अरे...सूखा बैंगन और बैंगन के अचार का उल्लेख करना तो भूल ही गया ..।

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  21. हाहा हाँ हना हना हसे जा रहा हूँ आप ने बैगन का तो पूरा ही बखान ही कर दिया खुश हो रहा होगा आप पर आखिर कोई तो है जो मेरा ध्यान रखता है
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  22. अब तक लोग मुझे घर की मुर्गी दाल बराबर समझते रहें .जब विदेशियों ने मुझपर प्रयोग किये तब मेरी महत्ता को समझा
    waah baigan ne kya vyangya kiya hai

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  23. Ashrudhara bah nikli bauigan ki vyathakatha sun.. :(
    Sharad bhaia ne bada jaroori ansh jod kar sone si post par suhaga rakh diya.. aur bhai hamen to bhate(green baigan) ka bharta bahut hi pasand hai.. :)
    vaise ye baat bhi sach hai ki jo swad hare dharidar baigan(bhate) me hai wo baigan ki kisi bhi kism me nahin.. ye videshi to beejviheen baigan bana hamare desh ke baigan ki biodiversity hi khatm karne par tule hain.. ayur ye kya baat di ki har baar beej inhi se khareedo..
    dar hai kal ke din sarkar aisi companies ko kahin bachche bhi bechne ka theka na de de.. kuchh bharosa nahin..

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  24. ओम जय बैंगन राजा...

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  25. चलिए इस पोस्ट के बहाने ये तो पता लग गया कि अगर कभी मुंबई आना हुआ तो बहन के लिए क्या गिफ्ट लेकर जाना है...

    जय हिंद...

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  26. बैंगन की बात चली तो बता दूं ...नहीं यहाँ रहने देते हैं...कभी चैट पर बताउंगी ...
    बैंगन पुराण अच्छा रहा ...देर से कर पा रही हूँ टिप्पणी ...कम्प्यूटर महाराज बड़े नाराज चल रहे हैं आजकल ...क्या करे ...ये पूरा दौर ही अपनों की नाराजगी का चल रहा है ....:):)

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  27. Very interesting!Vaise baigan to mujhe bhi pasand hai,aapne kabhi bataya nahi!

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  28. Avinash vaachaspati said :

    आपने बैंगनकथा लिख डाली और यहां बैंगन के प्‍यारों को खबर तक नहीं हुई। वैसे बैंगनदम बनाने का प्रयोग किया जा सकता है। जिन कवियों को बैंगन पसंद हो वे इस पर अपनी कविताएं लिखकर योगदान दे सकते हैं और कहानी लेखक 'बैंगन जाने बैंगन का स्‍वाद' शीर्षक से कहानी रचकर। इस पर डॉक्‍यूमेंट्रीज और फीचर फिल्‍मों का भविष्‍य बैंगनी है। बशर्ते किसी फाइनेंसर और निर्देशक की प्रिय सब्‍जी बैंगन हो। फिर बैंगन को कोई नहीं रोक सकता।

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  29. रश्मि जी,
    बहुत ही अच्छी पोस्ट है. दुःख है कि देर से पढ़ रही हूँ. इधर थोड़ी व्यस्त थी. बैगन बहुत से लोगों की तरह मुझे भी नहीं पसंद, पर इसका भुर्ता और पकौड़े मुझे भी बहुत अच्छे लगते हैं. और मज़े की बात मैं इसकी बिना मसाले की सब्ज़ी बहुत अच्छी बनाती हूँ, सिर्फ़ हल्दी और टमाटर के साथ, जो कि मेरे पिताजी को बहुत पसंद थी.

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